ऑपरेशन म्यूल हंटर: दुबई से संचालित 160 करोड़ की साइबर ठगी का मास्टरमाइंड डूंगरपुर पुलिस के हत्थे चढ़ा

राजस्थान की डूंगरपुर पुलिस ने ऑपरेशन म्यूल हंटर के तहत एक बड़े साइबर अपराधी घनश्याम कलाल को गिरफ्तार किया है, जो दुबई में बैठकर करीब 160 करोड़ रुपये का ठगी का नेटवर्क चला रहा था।

साइबर जालसाजों पर पुलिस का बड़ा प्रहार

राजस्थान के डूंगरपुर जिले की साइबर थाना पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अपने विशेष अभियान ऑपरेशन म्यूल हंटर में एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने साइबर ठगी के एक विशाल नेटवर्क के सरगना, घनश्याम कलाल को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। आरोपी काफी लंबे समय से कानून की नजरों से बचकर भाग रहा था और देश के बाहर बैठकर लोगों को अपना शिकार बना रहा था। पुलिस की शुरुआती जांच में इस पूरे नेटवर्क के माध्यम से देशभर में करीब 160 करोड़ रुपये की साइबर ठगी किए जाने का खुलासा हुआ है।

इस तरह शुरू हुआ ठगी का पूरा मामला

इस बड़े साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश तब हुआ जब साल 2025 में बथड़ी निवासी लालशंकर रोत ने डूंगरपुर साइबर थाने में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने बताया कि विक्रम मालीवाड़ और उसके साथियों ने उसे सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और मुफ्त में पैन कार्ड बनवाकर देने का झांसा दिया था। इसी बहाने से आरोपियों ने उसका बैंक खाता खुलवाया, नया सिम कार्ड लेकर उसे बैंक खाते से लिंक किया और पूरी बैंक किट अपने कब्जे में ले ली। जांच में पाया गया कि इस खाते के जरिए करीब 81.69 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन किया गया था। इस मामले की गहराई से जांच की गई तो विक्रम मालीवाड़ के अलावा बांसिया के रहने वाले महावीर सिंह, सीमलवाड़ा के घनश्याम कलाल और कनबा निवासी एक बैंक कर्मचारी कौशल प्रजापत की संलिप्तता भी सामने आई।

दुबई से भारत तक का चकमा देने वाला सफर

इस केस के अन्य आरोपी, जिनमें विक्रम, महावीर सिंह और कौशल प्रजापत शामिल थे, उन्हें पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी थी। हालांकि, मुख्य मास्टरमाइंड घनश्याम कलाल पुलिस की पहुंच से लगातार बाहर बना हुआ था। उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी करवाया गया था। साइबर थाना प्रभारी मुकेश परमार की देखरेख में एक विशेष टीम गठित की गई थी जो आरोपी के हर कदम पर नजर रखे हुए थी। तकनीकी साक्ष्यों और खुफिया जानकारी से यह पता चला कि आरोपी दुबई में छिपकर बैठा था। वहां से वह सीधे भारत न आकर पहले बैंकॉक गया और फिर भूटान के रास्ते देश में दाखिल हुआ। इसके बाद वह असम और केरल के अलग-अलग शहरों में घूमता रहा और अंततः अजमेर पहुंचा। डूंगरपुर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उदयपुर के पास घेराबंदी की और इस शातिर अपराधी को दबोच लिया।

450 से ज्यादा फर्जी म्यूल खातों का जाल

पुलिस की विस्तृत पड़ताल में सामने आया है कि ये ठग बेहद शातिर तरीके से काम करते थे। ये लोग आम जनता को विभिन्न सरकारी योजनाओं के फायदे, फ्री पैन कार्ड या अन्य लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों का उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में किया जाता था ताकि असली सरगनाओं की पहचान छिपी रहे। इन फर्जी खातों के माध्यम से शेयर मार्केट में ट्रेडिंग और ऑनलाइन सट्टेबाजी के नाम पर पूरे देश में लोगों को लूटा जा रहा था। पुलिस ने अब तक की जांच में 450 से ज्यादा ऐसे फर्जी म्यूल खातों की पहचान की है। फिलहाल, घनश्याम कलाल से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि इस पूरे साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आ सकें और ठगी के इस तंत्र को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।

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