विपक्ष के विरोध पर उठे सवाल
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नीट परीक्षा लीक प्रकरण को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। जंतर मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री आवास के बाहर भी विरोध दर्ज कराया जा रहा है। केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों के इस आक्रामक तेवर पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चिराग ने कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्ष अक्सर यह शिकायत करता है कि सरकार उनसे संवाद नहीं करती, लेकिन हकीकत यह है कि जब बातचीत का अवसर आता है, तो ये नेता खुद ही गायब हो जाते हैं। उन्होंने विपक्ष के रवैये की तुलना मुहावरे से करते हुए कहा कि इनके सामने बात रखना भैंस के आगे बीन बजाने के समान है, क्योंकि वे सुनना ही नहीं चाहते।
प्रधानमंत्री का रुख और सांसदों के साथ बैठक
चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे तमाम मुद्दों से परे, सरकार का ध्यान युवाओं और छात्रों के हितों पर केंद्रित है। हाल ही में हुई एनडीए सांसदों की बैठक का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा है कि भारत के युवाओं के भविष्य और छात्रों के हितों के साथ किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा। चिराग ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वे सत्र शुरू होते ही एक-दो मुद्दे उछालते हैं, लेकिन उन पर तार्किक अंत तक चर्चा क्यों नहीं करते? उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का असली इरादा समस्याओं का समाधान ढूंढना नहीं है, बल्कि सदन में हंगामा करके कार्यवाही बाधित करना है। हर नए सत्र में वे नए मुद्दे ले आते हैं, जो साबित करता है कि उनका ध्यान केवल व्यवधान डालने पर होता है।
सुझावों की अपील और चर्चा की चुनौती
विपक्ष को नसीहत देते हुए चिराग पासवान ने कहा कि यदि वे वास्तव में किसानों, छात्रों और युवाओं के कल्याण के प्रति गंभीर हैं, तो उन्हें सरकार को ठोस सुझाव देने चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार ऐसे सभी सुझावों को स्वीकार करने के लिए तैयार है, बशर्ते वे तथ्यों पर आधारित हों। चिराग के अनुसार, वे विपक्ष की हर तर्कसंगत बात मानने को तैयार हैं। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि चर्चा के लिए बने उचित मंचों का उपयोग करने के बजाय, विपक्षी दल सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहे हैं और जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। संवाद के बजाय अराजकता को चुनना विपक्ष की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है।
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