BPSC सफलता की कहानी: बिना कोचिंग सेल्फ-स्टडी से 10वीं रैंक पाने वाली प्रिया ने बताया कामयाबी का राज

दरभंगा की प्रिया ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में बिना किसी कोचिंग के सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि कैसे निरंतर अभ्यास और सही रणनीति अपनाकर आप भी इस बड़ी परीक्षा को क्रैक कर सकते हैं।

सफलता का नया अध्याय

बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के लिए दरभंगा की प्रिया एक मिसाल बन गई हैं। प्रिया ने 70वीं BPSC परीक्षा में 10वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो किसी बड़ी कोचिंग की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने पूरी तरह से सेल्फ-स्टडी यानी खुद की मेहनत के दम पर यह उपलब्धि अपने नाम की है। प्रिया की तैयारी करने का अंदाज और उनकी रणनीति उन तमाम अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणादायक है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अफसर बनने का सपना देखते हैं।

तैयारी की खास रणनीति

प्रिया का कहना है कि परीक्षा की तैयारी के दौरान सबसे महत्वपूर्ण पहलू सिलेबस को गहराई से समझना है। उन्होंने बताया कि 70वीं BPSC की परीक्षा में इस बार तथ्यात्मक यानी फैक्चुअल प्रश्नों पर अधिक ध्यान दिया गया था। अपनी सफलता का श्रेय देते हुए उन्होंने कहा कि जो विषय वर्तमान में चर्चा में रहे, उनसे जुड़े सवालों को उन्होंने प्राथमिकता दी। मुख्य परीक्षा के लिए उन्होंने पिछले सालों के प्रश्न पत्रों यानी PYQ का विशेष अध्ययन किया। उन्होंने हर विषय को सिलेबस के आधार पर टॉपिक के हिसाब से कवर किया और नियमित रूप से करंट अफेयर्स के नोट्स तैयार किए। पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण जैसे ज्वलंत मुद्दों पर उन्होंने खास तैयारी की थी।

इंटरव्यू का अनुभव

साक्षात्कार के दौरान प्रिया को काफी सहज माहौल मिला। उनसे पूछा गया कि अधिकारी बनने के बाद वह अपनी जिम्मेदारी को कैसे निभाएंगी। प्रिया ने बताया कि उनके सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़े होने के कारण उनसे सबरीमाला विवाद और महिलाओं से संबंधित गंभीर सवाल किए गए। उन्होंने अपनी राय बेहद ईमानदारी और स्पष्टता के साथ बोर्ड के सामने रखी, जिसे उन्होंने काफी गंभीरता से सुना।

संघर्ष और अनुशासन का महत्व

एक छोटे कस्बे की लड़की के लिए अफसर बनने का सफर आसान नहीं होता, लेकिन प्रिया ने इसे अपनी मेहनत से मुमकिन कर दिखाया। वह रोजाना 8 से 10 घंटे तक पढ़ाई करती थीं। एकाग्रता बनाए रखने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बना ली थी। अपनी तैयारी को परखने के लिए वह हर हफ्ते मॉक टेस्ट देती थीं और अपनी गलतियों में सुधार करती थीं। उनके माता-पिता ने उन पर दबाव बनाने के बजाय उन पर अटूट भरोसा जताया, जो उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

अभ्यर्थियों के लिए खास सुझाव

प्रिया की सलाह है कि कोचिंग के बिना भी अफसर बना जा सकता है, बस दिशा सही होनी चाहिए। उन्होंने आने वाली पीढ़ी के लिए ये सुझाव दिए हैं:

  • सिलेबस को अपना गुरु मानें और उसी के अनुसार पढ़ाई करें।
  • अनुशासन को अपना सबसे करीबी दोस्त बनाएं।
  • सिर्फ फैक्चुअल जानकारी ही नहीं, बल्कि चीजों का विश्लेषण करना भी सीखें।
  • करंट अफेयर्स की खबरों को अपने उत्तर में शामिल करना सीखें।
  • हार मानने की बजाय हर चुनौती को एक मौके की तरह देखें।

प्रिया की यह कामयाबी मिथिलांचल ही नहीं, पूरे राज्य की बेटियों के लिए एक बड़ा संदेश है कि अपनी मेहनत और खुद पर विश्वास ही सफलता की असली कुंजी है।

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