दिलीप घोष के तीखे आरोप
दिलीप घोष ने मीडिया से बातचीत के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल विरोध प्रदर्शन का नहीं है बल्कि एक पवित्र शहीद मंच है। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि आखिर ममता बनर्जी वहां पूरी रात क्यों बैठी रहीं? दिलीप घोष ने कटाक्ष करते हुए कहा कि चाहे वे रात में बैठें या दिन में, अब वहां कोई मौजूद नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने शहीदों, उनके परिजनों और आम जनता के साथ बड़ा विश्वासघात किया है, यही वजह है कि आज वे बिल्कुल अकेली खड़ी हैं। घोष ने कहा कि 21 जुलाई 1993 को हुई पुलिस गोलीबारी की घटना में मारे गए लोगों के परिवारों को आज तक वह पूरा मुआवजा नहीं दिया गया, जिसके वे हकदार थे।
मुआवजे और दोषियों की पदोन्नति पर सवाल
दिलीप घोष ने मुआवजे की राशि में हेरफेर का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अदालत ने शहीदों के परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश जारी किया था। इसके बावजूद, प्रशासनिक अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों को केवल 2 लाख रुपये ही सौंपे। घोष ने सवाल उठाया कि आखिर बाकी की बड़ी राशि कहां गई? उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने बाकी के पैसे अपनी जेब में डाल लिए, जो शहीदों के परिवारों के साथ एक बड़ा धोखा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 21 जुलाई की गोलीबारी की हिंसक घटना के लिए जो लोग जिम्मेदार थे, उन्हें दंडित करने के बजाय सरकार ने मंत्री, सांसद और विधायक जैसे महत्वपूर्ण पदों से नवाज दिया।
क्या है 21 जुलाई का इतिहास?
पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में 21 जुलाई के दिन को 'शहीद दिवस' के रूप में मनाया जाता है। साल 1993 में तत्कालीन लेफ्ट फ्रंट शासन के दौरान एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में कांग्रेस के 13 युवा कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी, जिनकी याद में यह दिवस आयोजित किया जाता है। तृणमूल कांग्रेस के विधायक संदीपन साहा ने सोमवार को इस संबंध में बताया कि उनकी पार्टी पिछले कई वर्षों से लगातार इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन करती आ रही है। हालांकि, इस वर्ष की खास बात यह है कि यह कार्यक्रम उसी मुख्य सड़क पर आयोजित किया जा रहा है जहां साल 1993 में यह दर्दनाक घटना घटित हुई थी।
कांग्रेस ने भी की अपनी तैयारी
दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने जानकारी दी कि कांग्रेस पार्टी को साल 1993 की पुलिस गोलीबारी में जान गंवाने वाले यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की स्मृति में शहीद मीनार पर एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करने की आधिकारिक अनुमति मिल गई है। शुभंकर सरकार ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अपना खुद का स्मारक कार्यक्रम आयोजित करेगी। उन्होंने याद दिलाया कि जब पीड़ित पुलिस की गोलियों का शिकार हुए थे, तब उनके हाथों में कांग्रेस का झंडा था। उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि वे उस झंडे के तले इस कार्यक्रम को क्यों नहीं मना रही हैं, जिसके सम्मान की रक्षा के लिए उन कार्यकर्ताओं ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। यह पूरी राजनीतिक बयानबाजी टीएमसी के भीतर चल रहे अंदरूनी राजनीतिक टकराव के बीच सामने आई है।
https://www.indiatv.in/west-bengal/dilip-ghosh-targeted-mamata-banerjee-to-turning-the-shaheed-diwas-event-in-political-event-2026-07-21-1232489