घर की छत पर पानी की टंकी रखने के लिए कौन सी दिशा है सबसे उत्तम? जानें वास्तु शास्त्र के जरूरी नियम

घर की छत पर रखी पानी की टंकी की दिशा आपके जीवन में सुख-समृद्धि और तनाव का कारण बन सकती है। वास्तु विशेषज्ञ महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य से जानिए टंकी रखने की सही दिशा और इसके आसान उपाय।

घर के निर्माण में पानी की टंकी का महत्व

नया मकान बनाते समय लोग अक्सर हर छोटी-बड़ी चीज का बेहद बारीकी से ध्यान रखते हैं। कमरों की दिशा, रसोईघर का स्थान, मुख्य द्वार, बाथरूम और सीढ़ियों की बनावट को लेकर लोग काफी सतर्क रहते हैं। लेकिन इन सबके बीच अक्सर छत पर रखी जाने वाली पानी की टंकी की दिशा को नजरअंदाज कर दिया जाता है। अधिकांश लोग सोचते हैं कि छत पर जहां भी खाली जगह मिले, वहां टंकी रखवा देना सबसे आसान और सही विकल्प है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह एक बहुत बड़ी भूल साबित हो सकती है। छत पर रखी पानी की टंकी की दिशा का हमारे जीवन, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। यदि पानी की टंकी को गलत दिशा में रख दिया जाए, तो घर में बेवजह का तनाव, कलह और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, यदि इसे सही दिशा में स्थापित किया जाए, तो यह घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।

भूमिगत जल स्रोत और ओवरहेड टंकी में क्या है अंतर?

बल्लभगढ़ उदासीन साधु आश्रम के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार, वास्तु शास्त्र में पानी के स्थान को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। लेकिन लोगों को यह समझना बेहद जरूरी है कि जमीन के अंदर के जल स्रोत और छत पर रखी जाने वाली भारी पानी की टंकी के नियम पूरी तरह से अलग हैं।

आमतौर पर घर में बोरिंग, कुआँ या भूमिगत पानी की टंकी बनाने के लिए पूर्व और उत्तर दिशा के कोने यानी ईशान कोण को सबसे उत्तम और शुभ माना जाता है। यह दिशा पूजा-पाठ, ध्यान और जल के प्रवाह के लिए बहुत पवित्र मानी गई है। लेकिन जब बात छत पर रखी जाने वाली पानी की टंकी की आती है, तो नियम बिल्कुल बदल जाते हैं। चूंकि छत पर रखी टंकी बहुत भारी होती है और उसमें हजारों लीटर पानी का वजन होता है, इसलिए इसे ईशान कोण में रखना बिल्कुल वर्जित माना गया है।

भूलकर भी इन दिशाओं में न रखें पानी की टंकी

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि घर की छत पर पानी की टंकी को कभी भी ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व या अग्नि कोण यानी दक्षिण-पूर्व में नहीं रखना चाहिए। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि ये दिशाएं बेहद संवेदनशील और हल्की होनी चाहिए।

  • ईशान कोण में रखने के नुकसान: यदि आप ईशान कोण में भारी पानी की टंकी रखते हैं, तो इससे घर का संतुलन बिगड़ता है। परिवार के सदस्यों के बीच बिना किसी वजह के मानसिक तनाव रहने लगता है और आपसी मतभेद बढ़ने लगते हैं।
  • अग्नि कोण में रखने के नुकसान: दक्षिण-पूर्व दिशा को अग्नि की दिशा माना जाता है। अग्नि और जल का मेल कभी भी शुभ नहीं होता। इस दिशा में पानी की टंकी रखने से घर में हमेशा कलह और नकारात्मकता का माहौल बना रहता है।

छत पर पानी की टंकी के लिए सबसे शुभ दिशा कौन सी है?

वास्तु विज्ञान के नियमों के अनुसार, छत पर भारी वजन को हमेशा दक्षिण या पश्चिम दिशा में ही रखा जाना चाहिए। इसलिए, पानी की टंकी को स्थापित करने के लिए सबसे शुभ स्थान दक्षिण-पश्चिम दिशा का कोना माना जाता है।

यदि किसी कारणवश आपको दक्षिण-पश्चिम का कोना नहीं मिल पा रहा है, तो आप टंकी को केवल पश्चिम दिशा में भी रख सकते हैं। पश्चिम दिशा को भी जल देव की दिशा माना जाता है, इसलिए यहां पानी की टंकी रखना बहुत ही अनुकूल और फलदायी होता है। इससे घर के मुखिया का प्रभाव बढ़ता है और परिवार में स्थिरता आती है।

गलत दिशा में रखी टंकी को हटाने का क्या है आसान उपाय?

कई बार लोग अनजाने में गलत दिशा में पानी की टंकी बनवा लेते हैं और बाद में कंक्रीट या भारी सेटअप के कारण उसे वहां से हटाना या तोड़ना बेहद कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने कुछ बेहद सरल और प्रभावी वास्तु उपाय बताए हैं, जिन्हें अपनाकर दोष को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

अगर पानी की टंकी गलत दिशा में है, तो आप उस टंकी को सफेद रंग से पेंट कर सकते हैं या फिर बाजार से सफेद रंग की ही टंकी खरीदकर लगाएं। वास्तु शास्त्र में सफेद और पीले रंग की पानी की टंकी को बहुत शुभ और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना गया है।

सफेद रंग की टंकी से घर में आती है समृद्धि

वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपकी पानी की टंकी सही दिशा यानी दक्षिण या पश्चिम में रखी हो और उसका रंग भी सफेद हो, तो यह सोने पर सुहागा जैसा काम करती है। सफेद रंग शांति और शुद्धता का प्रतीक है। इस उपाय को करने से घर में अनावश्यक तनाव दूर होता है, परिवार के सदस्यों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है और घर में धन की देवी मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।

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