भोजपुर का बीरमपुर बना 'सब्जी वाला गांव', 90 फीसदी आबादी खेती से जुड़ी, सालभर होती है ताजी सब्जियों की सप्लाई

बिहार के भोजपुर जिले का बीरमपुर गांव अपनी बेहतरीन सब्जी उत्पादन के कारण 'सब्जी वाला गांव' के रूप में प्रसिद्ध हो चुका है, जहां के 90 प्रतिशत लोग इस व्यवसाय से जुड़े हैं।

बिहार के भोजपुर जिले में स्थित बीरमपुर गांव आज अपनी कड़ी मेहनत और उन्नत कृषि तकनीकों के बल पर पूरे क्षेत्र में एक नई मिसाल बनकर उभरा है। इस गांव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां की लगभग 90 प्रतिशत आबादी पूरी तरह से सब्जियों की खेती और उससे जुड़ी व्यापारिक गतिविधियों पर टिकी हुई है। यही कारण है कि अब इस गांव को लोग सम्मान से 'सब्जी वाला गांव' कहने लगे हैं। बीरमपुर के किसानों का हौसला केवल अपनी जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अधिक उत्पादन की चाह में आसपास की कई पंचायतों और गांवों में भी खेतों को पट्टे पर लेकर बड़े पैमाने पर सब्जियों की बुवाई कर रहे हैं।

साल के बारह महीने होती है ताजी सब्जियों की पैदावार

बीरमपुर गांव की सबसे बड़ी सफलता यह है कि यहां मौसम के बदलाव के अनुसार सालभर अलग-अलग सब्जियों की खेती की जाती है। इससे स्थानीय बाजारों में हर समय ताजी सब्जियों की आवक बनी रहती है। अगर परवल को छोड़ दिया जाए, तो यहां लगभग हर तरह की सब्जी उगाई जाती है। मुख्य रूप से इस गांव में निम्नलिखित फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन होता है:

  • भिंडी और बैंगन
  • आलू और गोभी
  • टमाटर और तीखी हरी मिर्च
  • लौकी, कद्दू और अन्य मौसमी सब्जियां

केवल आजीविका नहीं, एक मुनाफे का व्यवसाय बनी खेती

गांव के निवासी और प्रगतिशील किसान मुना कुमार के अनुसार, अब उनके गांव में खेती केवल पेट पालने का साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह एक बेहद मुनाफेदार और सफल व्यापार बन चुकी है। गांव के अधिकांश परिवार सब्जियों के उत्पादन के साथ-साथ उनकी खरीद-बिक्री, ढुलाई और उन्हें मंडियों तक सुरक्षित पहुंचाने के काम में भी सक्रिय हैं। इस तरह एक किसान की मेहनत से गांव के कई अन्य बेरोजगार लोगों को भी रोजगार के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं।

कायमनगर में लगने लगी है भोजपुर की मुख्य सब्जी मंडी

बीरमपुर के किसानों के इस बड़े प्रयास का ही नतीजा है कि भोजपुर जिले की मुख्य सब्जी मंडी अब गांव के बिल्कुल नजदीक कायमनगर में स्थापित की जाने लगी है। इससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं पड़ती। हर सुबह दूर-दूर से व्यापारी सीधे कायमनगर मंडी पहुंच जाते हैं और किसानों से उनके खेतों की ताजी सब्जियां खरीद लेते हैं, जिससे किसानों को फसलों का वाजिब दाम समय पर मिल जाता है।

आर्थिक तरक्की से बदल गया किसानों का जीवन स्तर

सब्जी उत्पादन से होने वाली लगातार और अच्छी आमदनी ने बीरमपुर के लोगों का जीवन स्तर पूरी तरह बदल दिया है। इस मुनाफे के दम पर कई किसानों ने अपने कच्चे घरों को पक्के मकानों में बदल लिया है, अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं और आधुनिक कृषि मशीनें खरीदकर अपनी खेती को और अधिक उन्नत बना रहे हैं। गांव की नई पीढ़ी भी अब शहरों की तरफ भागने के बजाय इसे एक सम्मानजनक पेशा मानकर खेती से जुड़ रही है। बीरमपुर आज ग्रामीण आत्मनिर्भरता और कृषि आधारित समृद्धि का एक बेहतरीन और जीवंत मॉडल बन चुका है।

नौकरी छोड़ खेती में आजमाया हाथ: कन्हैयालाल की कहानी

खेती के क्षेत्र में लीक से हटकर काम करने की एक ऐसी ही मिसाल कन्हैयालाल ने भी पेश की है। उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर पारंपरिक दायरे से बाहर निकलने का फैसला किया और मल्लिका किस्म के आम की बागवानी शुरू की। महज 2 बीघा जमीन पर की गई इस अनोखी खेती के दम पर वे अब हर साल लाखों रुपये की बंपर कमाई कर रहे हैं। कन्हैयालाल की इस अभिनव सोच और सफलता को देखते हुए उन्हें वर्ष 2025 में 'इनोवेटिव फार्मर' यानी नवोन्मेषी किसान के सम्मान से भी नवाजा गया है।

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