बांस की 15 दुर्लभ प्रजातियां: निर्माण से लेकर स्वादिष्ट व्यंजन तक, जानिए इसके हैरान करने वाले उपयोग

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में बांस की विभिन्न प्रजातियों पर शोध किया जा रहा है, जो केवल निर्माण ही नहीं बल्कि खाद्य पदार्थों में भी इस्तेमाल होती हैं।

बांस का बहुआयामी उपयोग

ज्यादातर लोगों की यह सोच है कि बांस का इस्तेमाल केवल निर्माण कार्यों, बाड़ लगाने या फिर लाठी और बांसुरी जैसी सामान्य चीजों को बनाने तक सीमित है। लेकिन सच्चाई इससे कहीं अधिक विस्तृत और दिलचस्प है। दरअसल, बांस की दुनिया बहुत बड़ी है और इसकी विभिन्न प्रजातियां अपने विशिष्ट गुणों के कारण कई तरह के काम आती हैं। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा का वानिकी विभाग इस दिशा में एक मिसाल पेश कर रहा है। यहां बांस की 15 से अधिक दुर्लभ प्रजातियों का न केवल संरक्षण किया जा रहा है, बल्कि उन पर निरंतर शोध भी हो रहा है। विश्वविद्यालय का मुख्य लक्ष्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान न देकर उन्हें यह समझाना है कि बांस किस प्रकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था, हस्तशिल्प, सजावट और खाद्य उद्योग का आधार बन सकता है।

हर प्रजाति का अपना खास महत्व

वानिकी विभाग की एमएससी द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा सुप्रिया राय के अनुसार, बांस की प्रत्येक प्रजाति की अपनी अलग पहचान और उपयोग है। इन प्रजातियों की विशेषताओं को इस प्रकार समझा जा सकता है:

  • डेंड्रोकैलामस हैमिल्टोनी: यह बांस काफी मजबूत होता है और इसके मोटे तनों का उपयोग मुख्य रूप से भवन निर्माण एवं विभिन्न प्रकार के कंस्ट्रक्शन कार्यों में किया जाता है।
  • डेंड्रोकैलामस स्ट्रिक्टस: इसे ग्रामीण अंचलों में आम तौर पर 'लाठी बांस' के नाम से पुकारा जाता है। यह अपनी मजबूती के लिए प्रसिद्ध है और इससे टिकाऊ लाठियां बनाई जाती हैं।
  • बम्बूसा वल्गेरिस वैरायटी विटाटा: अपने चमकीले पीले रंग के कारण यह प्रजाति लोगों को खूब आकर्षित करती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से हस्तशिल्प और सुंदर कलाकृतियां बनाने में होता है।
  • बम्बूसा न्यूटन: यह प्रजाति भी निर्माण कार्यों के लिए एक बेहतरीन विकल्प मानी जाती है।
  • बम्बूसा वल्गेरिस वैरायटी वामिन: इसकी शारीरिक संरचना काफी अनोखी होती है, जिसके चलते इसका उपयोग घरों और गार्डन को सजाने के लिए विशेष तौर पर किया जाता है।
  • भाला बांस: हल्का होने की खूबी के कारण इसका उपयोग खेलकूद की सामग्री यानी भाला बनाने में किया जाता है।
  • बम्बूसा ट्यूल्डा: इस प्रजाति का उपयोग मुख्य रूप से उच्च गुणवत्ता वाली बांसुरी तैयार करने में किया जाता है।

भोजन और खेती में बांस की भूमिका

बांस का उपयोग केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे खानपान का भी हिस्सा बन सकता है। सुप्रिया राय ने जानकारी दी कि थाइर्सोस्टैचिस ओलिवरी, जो मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया में पाई जाती है, के सीधे और लंबे तनों का इस्तेमाल निर्माण में होता है। वहीं, डेंड्रोकैलामस एस्पर के कोमल अंकुरों को लोग बड़े चाव से खाते हैं। इसके अंकुरों से स्वादिष्ट अचार और कई प्रकार की मिठाइयां भी तैयार की जाती हैं। इसके अलावा, डेंड्रोकैलामस गिगैन्टियस की बनावट काफी मोटी और मजबूत होती है, जिसका आधार हाथी के पैर जैसा होता है। इसी मजबूती के कारण खेतों और पशुपालन के क्षेत्र में इसका इस्तेमाल मजबूत खूंटे बनाने के लिए किया जाता है। वानिकी विभाग का यह स्पष्ट मानना है कि बांस न केवल पर्यावरण को सुरक्षित रखने का एक जरिया है, बल्कि यह रोजगार पैदा करने और ग्रामीण विकास के लिए एक सशक्त माध्यम भी है।

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