श्योपुर: जमीन पर कब्जे के खिलाफ 32 घंटे तक 60 फीट ऊंचे टॉवर पर डटी रही रमाबाई

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में अपनी जमीन से अवैध कब्जा हटवाने की मांग को लेकर एक महिला करीब 32 घंटे तक 60 फीट ऊंचे बीएसएनएल टॉवर पर बैठी रही। प्रशासन द्वारा मामले के निपटारे का ठोस आश्वासन मिलने के बाद ही महिला नीचे उतरी।

आंदोलन का अनोखा तरीका

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में एक महिला के विरोध प्रदर्शन ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। अपनी निजी जमीन को दबंगों के चंगुल से मुक्त कराने की जिद लिए रमाबाई नाम की महिला ने जान जोखिम में डालते हुए 60 फीट ऊंचे बीएसएनएल टॉवर का सहारा लिया। यह महिला लगातार 32 घंटे तक टॉवर के ऊपरी शिखर पर डटी रही। इस दौरान उसने न तो कुछ खाया और न ही पानी पिया। अंततः प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई लंबी बातचीत और जमीन विवाद को सुलझाने के आश्वासन के बाद महिला सुरक्षित नीचे उतर आई है।

विवाद की जड़ क्या है

यह पूरा मामला बीरपुर थाना क्षेत्र के श्यार्दे गांव का है। रमाबाई का आरोप है कि उनके नाम पर आवंटित पट्टे वाली जमीन पर गांव के एक दबंग व्यक्ति ने जबरन अवैध कब्जा कर रखा है। महिला का कहना है कि वह लंबे समय से स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग के दफ्तरों के चक्कर काट रही थी, ताकि उसे उसकी हक की जमीन मिल सके। हालांकि, उसकी फरियाद सुनने के बजाय प्रशासन ने कथित तौर पर एकतरफा रुख अपना लिया, जिससे आक्रोशित होकर महिला को यह कठोर कदम उठाना पड़ा।

प्रशासन की कार्रवाई से बढ़ी नाराजगी

महिला के टॉवर पर चढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण प्रशासन का दोहरा रवैया बताया जा रहा है। रमाबाई के अनुसार, प्रशासन ने उसकी पट्टे वाली जमीन से दबंग का कब्जा हटाने के बजाय, उसे उस सरकारी जमीन से बेदखल करने की कोशिश की जिस पर वह वर्तमान में रह रही है। इस अन्यायपूर्ण कार्रवाई से खफा होकर रमाबाई ने टॉवर पर चढ़ने का फैसला किया। उसकी मांग बिल्कुल स्पष्ट थी कि जब तक उसकी पट्टे वाली जमीन दबंगों से खाली नहीं कराई जाती, वह शासकीय भूमि छोड़ने को तैयार नहीं होगी।

परिवार और ग्रामीणों का समर्थन

टॉवर के ऊपर भीषण गर्मी और खुले आसमान के नीचे रमाबाई के 32 घंटे बिताने के दौरान नीचे उसके परिजन और ग्रामीण भी एकजुट रहे। टावर के नीचे लोग धरने पर बैठ गए थे और लगातार प्रशासन पर दबाव बना रहे थे। परिजनों ने अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी थी कि यदि भूख, प्यास या किसी अन्य वजह से महिला को कोई शारीरिक नुकसान होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी। इस दबाव के कारण अधिकारियों के बीच भी हड़कंप की स्थिति बनी रही।

आश्वासन के बाद थमा आंदोलन

मामले की गंभीरता को भांपते हुए मौके पर पहुंचे आला अधिकारियों ने काफी मशक्कत की। प्रशासन ने अंततः महिला की बेदखली वाली कार्रवाई को फिलहाल स्थगित कर दिया है। साथ ही, अधिकारियों ने रमाबाई को भरोसा दिलाया है कि जल्द ही दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर पूरे विवाद की जांच की जाएगी और उनकी पट्टे वाली जमीन से अवैध कब्जा हटवाने के लिए हर संभव कानूनी प्रयास किए जाएंगे। इस आश्वासन के मिलने के बाद ही रमाबाई ने टॉवर से नीचे उतरना स्वीकार किया। फिलहाल इस मामले ने स्थानीय स्तर पर प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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