कोडरमा में गूंजे 'जय जगन्नाथ' के जयकारे, पहली भव्य रथ यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब

झुमरी तिलैया में पहली बार आयोजित भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा ने शहर को भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ रथ को खींचकर इस ऐतिहासिक आयोजन को यादगार बना दिया।

झुमरी तिलैया में भक्ति की अद्भुत लहर

झारखंड के कोडरमा जिले में स्थित झुमरी तिलैया शहर इन दिनों पूरी तरह से धार्मिक रंग में रंगा हुआ है। यहाँ इस्कॉन के मार्गदर्शन में पहली बार भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया गया, जिसने पूरे शहर के धार्मिक परिदृश्य को एक नई दिशा दी है। इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान सुभाष चौक से शुरू होकर मौसीबाड़ी तक निकली इस रथ यात्रा में हजारों की तादाद में भक्त शामिल हुए। भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए सड़कों पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा था।

श्रद्धा और भक्ति का संगम

इस भव्य रथ यात्रा का औपचारिक शुभारंभ सुभाष चौक से हुआ। रथ पर सवार देवी-देवताओं के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। कोडरमा की विधायक डॉ. नीरा यादव ने भी इस यात्रा में सक्रिय रूप से भाग लिया और भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर पुण्य अर्जित किया। रथ यात्रा का रूट सुभाष चौक से प्रारंभ होकर कोडरमा स्टेशन और झंडा चौक जैसे मुख्य इलाकों से गुजरते हुए महाराणा प्रताप चौक स्थित संकट मोचन मंदिर तक पहुंचा, जिसे मौसीबाड़ी का रूप दिया गया था। वहां भगवान का विशेष स्वागत किया गया, जिसने पूरे वातावरण को दिव्यता से भर दिया।

बारिश भी नहीं डिगा सकी भक्तों का हौसला

यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता श्रद्धालुओं का अटूट उत्साह रहा। रास्ते में जब तेज बारिश शुरू हुई, तब भी भगवान के भक्तों के कदमों में कोई कमी नहीं आई। बारिश की बूंदों के बीच 'जय जगन्नाथ' और 'हरि बोल' के जयघोष से पूरा शहर गूंज रहा था। महिला, पुरुष, युवा और बच्चे बड़ी ही श्रद्धा के साथ रथ की रस्सी पकड़कर उसे खींचते हुए नजर आए। भजनों और कीर्तन की धुनों ने माहौल को भक्तिमय और आनंदित बना दिया था। भक्त पूरे जोश के साथ रथ के साथ कदम से कदम मिलाकर मौसीबाड़ी तक पहुंचे, जो उनकी असीम आस्था का प्रतीक था।

सांस्कृतिक इतिहास में नया अध्याय

इस्कॉन के आयोजकों का कहना है कि झुमरी तिलैया में पहली बार इस प्रकार की रथ यात्रा आयोजित करने का मुख्य ध्येय सनातन संस्कृति और भगवान जगन्नाथ के भक्ति भाव को घर-घर तक पहुँचाना है। आयोजन को सुचारू बनाने के लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने सेवा दी। शहरवासियों का मानना है कि इस पहली रथ यात्रा ने कोडरमा के सांस्कृतिक इतिहास में एक स्वर्ण पन्ना जोड़ दिया है। लोगों ने यह कामना की है कि आने वाले समय में हर साल इसी तरह भव्य रूप में रथ यात्रा का आयोजन किया जाए।

भक्तों ने साझा किए अनुभव

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले 70 वर्षीय विजय पांडेय ने बताया कि कोडरमा में कांवड़ पदयात्रा का आयोजन तो पहले से होता रहा है जिसमें हजारों लोग जुड़ते हैं, लेकिन जिस संख्या में आज श्रद्धालु रथ यात्रा में उमड़े हैं, वह अपने आप में एक नया कीर्तिमान है। वहीं रामानुज सिंह ने कहा कि यह यात्रा समाज में एकता और सनातन संस्कृति की बढ़ती जागरूकता का एक सशक्त उदाहरण है। इसके अलावा सुमन रानी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहले उन्हें लगा था कि भारी भीड़ के कारण वह रथ तक नहीं पहुँच पाएंगी, लेकिन प्रभु की कृपा से उन्हें रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनके पति अनिल कुमार ने भी इस अवसर पर भगवान का आशीर्वाद पाकर स्वयं को धन्य बताया। यह रथ यात्रा कोडरमा के लोगों के लिए लंबे समय तक याद रहने वाला एक अविस्मरणीय अनुभव बन गई है।

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