नीट में फेल होने के बाद छात्र ने अपना लिया संन्यास, छोटे भाई ने भी पकड़ी भक्ति की राह

बिहार के भोजपुर में नीट परीक्षा में लगातार असफलता से हताश होकर एक युवक ने गृहस्थ जीवन त्यागकर वृंदावन में संत का मार्ग चुन लिया। उसे खोजने निकले छोटे भाई पर भी वैराग्य का ऐसा रंग चढ़ा कि वह भी भक्ति में लीन हो गया, जिससे पूरा परिवार हैरान रह गया है।

नीट परीक्षा की तैयारी और संन्यास का सफर

बिहार के भोजपुर जिले के शीतल टोला से एक बेहद चौंकाने वाला और भावुक मामला सामने आया है। नीट परीक्षा में लगातार असफलता के बाद एक युवा छात्र का वैराग्य की ओर मुड़ जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। कुमार विशाल के बेटे सिद्धांत विशाल ने डॉक्टर बनने का सपना संजोया था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सिद्धांत ने साल 2023 से 2025 तक राजस्थान के कोटा में रहकर नीट की कठिन तैयारी की थी। लगातार मेहनत के बावजूद जब 2025 में उसे सफलता नहीं मिली, तो वह गहरे मानसिक तनाव में डूब गया।

घर से बिना बताए निकलने की घटना

तनाव के चलते 14 जून 2025 की सुबह लगभग 4 बजे सिद्धांत घर से बिना किसी को बताए कहीं चला गया। परिवार ने हर संभव जगह पर उसकी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई अता-पता नहीं चला। अंततः परिवार ने स्थानीय टाउन थाना में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। इसी बीच, दिसंबर 2025 में एक और चौंकाने वाली घटना घटी। सिद्धांत को ढूंढने के इरादे से उसका छोटा भाई सार्थक विशाल भी घर से निकल गया। परिवार को उम्मीद थी कि सार्थक अपने भाई को वापस लेकर आएगा, लेकिन वह भी गायब हो गया।

वृंदावन में मिला सिद्धांत और भक्ति का मार्ग

पुलिस की सक्रियता के बाद करीब पांच दिन पहले जानकारी मिली कि सिद्धांत उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित सुसुखराल उपवन में रह रहा है। पुलिस टीम तुरंत वहां पहुंची और सिद्धांत को सुरक्षित बरामद किया। पूछताछ में सिद्धांत ने खुलासा किया कि नीट में मिली लगातार असफलता ने उसका मन पढ़ाई-लिखाई और दुनियावी मोह-माया से हटा दिया था। उसे लगा कि जीवन का वास्तविक मार्ग केवल संन्यास और ईश्वर की भक्ति में ही है। वृंदावन पहुंचने के बाद उसने अपना सिर मुंडवा लिया और भगवा धारण कर लिया। अब वहां के लोग उसे श्याम बाबा के नाम से जानते हैं। उसने स्पष्ट कर दिया है कि वह दोबारा कभी गृहस्थ जीवन में नहीं लौटना चाहता।

भाई की भक्ति और परिवार की स्थिति

जांच में पता चला कि सिद्धांत का छोटा भाई सार्थक भी वृंदावन गया था, लेकिन दोनों भाई अलग-अलग स्थानों पर रहे और एक-दूसरे से कभी नहीं मिले। सार्थक बाद में अपने घर वापस लौट आया। हालांकि, इस घटनाक्रम ने पूरे परिवार को बदल कर रख दिया है। सिद्धांत के दादा विपिन प्रसाद सिंह ने बताया कि उनके पोते का संन्यासी बनना उन्हें दुख तो देता है, लेकिन वे इस बात से संतुष्ट हैं कि वह गलत राह पर नहीं गया। उन्होंने कहा कि अक्सर असफल छात्र अपराध की दुनिया में चले जाते हैं या गलत कदम उठा लेते हैं, लेकिन उनके पोते ने संयम और वैराग्य को अपनाया।

प्रेमानंद जी महाराज का सानिध्य

विपिन प्रसाद सिंह ने गर्व के साथ बताया कि सिद्धांत ने श्री प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम में दीक्षा ली है। दादा के अनुसार, यह मार्ग सामान्य जीवन से कहीं अधिक कठिन है, और यदि सिद्धांत इसमें खुशी पा रहा है, तो वे उसका समर्थन करते हैं। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि अब सिद्धांत के माता-पिता भी प्रेमानंद जी महाराज की भक्ति की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यह भोजपुर के लिए एक अनूठा मामला है जहां परिवार का एक बड़ा हिस्सा आध्यात्मिक जीवन की ओर झुकाव महसूस कर रहा है।

कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय का रुख

इस पूरे मामले में टाउन थाना की पुलिस अधिकारी परिणीता कुमारी और एएसआई विदु भूषण की टीम ने अहम भूमिका निभाई। परिणीता कुमारी ने स्पष्ट किया कि शुरुआत में यह मामला किडनैपिंग का लग रहा था, लेकिन जांच के बाद यह साफ हो गया कि सिद्धांत अपनी स्वेच्छा से वैराग्य जीवन जीने के लिए वृंदावन गया था। पुलिस ने सिद्धांत को वृंदावन से बरामद कर स्थानीय अदालत में पेश किया। कोर्ट में सिद्धांत ने अपना बयान दर्ज कराते हुए साफ कहा कि वह अपनी मर्जी से वृंदावन आश्रम में रहना चाहता है और उसे गृहस्थ जीवन की कोई इच्छा नहीं है। अब कानूनी कार्रवाई के तहत उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत न्यायालय में पेश किया जा रहा है और आगे का निर्णय अदालत के निर्देशों के अनुसार ही लिया जाएगा।

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