मुजफ्फरपुर के छात्र का कमाल: जंगली अरबी के पत्तों से तैयार किया इंसुलेशन पैनल, अब बिना AC के ठंडा रहेगा घर

मुजफ्फरपुर के एक होनहार छात्र ने जंगली अरबी के पत्तों का उपयोग करके एक विशेष इंसुलेशन पैनल विकसित किया है, जो घरों के तापमान को 8 से 10 डिग्री सेल्सियस तक कम करने की क्षमता रखता है।

गर्मी से मिलेगी निजात, बिजली का बिल होगा कम

बढ़ती गर्मी और बेतहाशा बिजली की खपत के बीच बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बेहद सुखद और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। यहां मनियारी हाईस्कूल में पढ़ने वाले 10वीं कक्षा के छात्र योगेश तिवारी ने एक ऐसी तकनीक का आविष्कार किया है जो भविष्य में घरों को ठंडा रखने का तरीका पूरी तरह बदल सकती है। योगेश ने जंगली अरबी के पत्तों के गुणों को समझकर एक खास इंसुलेशन पैनल की अवधारणा पेश की है। उनका दावा है कि इस नवाचार के माध्यम से घरों की दीवारों और छतों के तापमान को 8 से 10 डिग्री सेल्सियस तक घटाया जा सकता है, जिससे एयर कंडीशनर और कूलर पर निर्भरता कम होगी और बिजली की भारी बचत होगी।

जंगली पत्तों में छिपा है विज्ञान

इस प्रोजेक्ट की मार्गदर्शक शिक्षिका अलका के अनुसार, जंगली अरबी के पत्तों में प्राकृतिक रूप से ऊष्मा को रोकने यानी इंसुलेशन के बेहतरीन गुण पाए जाते हैं। इन्हीं गुणों को आधार बनाकर छात्र ने एक ऐसा पैनल डिजाइन किया है जो बाहर की भीषण गर्मी को अंदर नहीं आने देता। यह समाधान न केवल पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि ऊर्जा संरक्षण की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दो साल की कड़ी मेहनत और शोध

योगेश तिवारी ने अपनी बातचीत में साझा किया कि यह विचार उन्हें द्वितीय बिहार बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम के दौरान आया था। उन्होंने महसूस किया कि चिलचिलाती धूप और गर्मी से राहत पाने के लिए लोग जिस तरह से एसी और कूलर का इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे बिजली की खपत लगातार बढ़ती जा रही है। इसी समस्या का कोई टिकाऊ, सस्ता और पर्यावरण के हित में समाधान खोजने के लिए उन्होंने पिछले दो वर्षों से गहन शोध शुरू किया। इन दो वर्षों में उन्होंने अरबी के पत्तों की वायु को रोकने और ऊष्मा को अवशोषित करने की अद्भुत क्षमता का अध्ययन किया है।

भविष्य के लिए बड़ी योजनाएं

योगेश की योजना इस तकनीक को और अधिक व्यावहारिक बनाने की है। उनका लक्ष्य है कि भविष्य में इसे सोलर पैनल की तरह एक विशेष ढांचा तैयार करके घरों की छतों पर इंस्टॉल किया जाए। फिलहाल यह पूरी परियोजना अभी शोध और परीक्षण के चरण से गुजर रही है। योगेश का कहना है कि वे लगातार इसकी कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं और जल्द ही वे इसे पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो सरकारी और निजी संस्थाओं के सहयोग से इसे घरों, छोटे भवनों और सार्वजनिक कार्यालयों में भी आसानी से लगाया जा सकेगा।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना

योगेश के इस अनूठे नवाचार को न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति मिल रही है। उनका चयन प्रतिष्ठित विकसित भारत बिल्डथॉन के लिए हुआ है, जहां वे अपने इस प्रोजेक्ट को बड़े मंच पर प्रस्तुत करेंगे। हालांकि, योगेश और उनकी टीम ने यह स्पष्ट किया है कि अभी 8 से 10 डिग्री तापमान कम करने का दावा उनके परीक्षणों पर आधारित है और इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। यदि भविष्य में यह प्रयोग सफल रहता है, तो यह आम आदमी के लिए कम लागत वाला और पर्यावरण के लिए वरदान साबित होने वाला एक क्रांतिकारी कूलिंग समाधान सिद्ध हो सकता है।

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