मामले की पृष्ठभूमि और विजिलेंस की कार्रवाई
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया जब कांगड़ा जिले के देहरा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक होशियार सिंह के खिलाफ राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने एफआईआर दर्ज की है। होशियार सिंह पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान विधायक ऐच्छिक निधि का गलत इस्तेमाल किया और सरकारी धन को अपनी निजी कंपनी के कर्मचारियों के खातों में डायवर्ट किया। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, इस मामले में शिकायत मिलने के बाद सतर्कता विभाग ने गहन जांच पड़ताल की, जिसके बाद यह कानूनी कार्रवाई की गई है।
किस तरह हुआ सरकारी धन का खेल
जांच में खुलासा हुआ है कि होशियार सिंह ने देहरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहते हुए अपनी निजी फैक्ट्री में काम करने वाले 16 कर्मचारियों को अपना निशाना बनाया। उन्होंने प्रत्येक कर्मचारी के बैंक खाते में लाभार्थी के तौर पर 50-50 हजार रुपये की किश्तें जमा करवाईं। इस प्रकार कुल आठ लाख रुपये की राशि सरकारी खजाने से निकाली गई। सूत्रों और प्राप्त साक्ष्यों के अनुसार, यह रकम उन कर्मचारियों के खातों में पहुंचने के बाद पूर्व विधायक के निर्देश पर तुरंत नकद के रूप में उनसे वापस ले ली गई थी।
जांच में क्या तथ्य आए सामने
सतर्कता ब्यूरो ने जब मामले की प्राथमिक जांच शुरू की, तो उन्होंने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और बयानों का विश्लेषण किया। इसमें संबंधित लाभार्थियों के बैंक रिकॉर्ड, सरकारी फाइलें और शिकायतकर्ताओं के बयान शामिल थे। जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
- वर्ष 2023 और 2024 के दौरान जिन लोगों के नाम पर वित्तीय सहायता मंजूर की गई थी, उन्होंने असल में ऐसी किसी भी सहायता के लिए कभी कोई आवेदन ही नहीं किया था।
- जिन कर्मचारियों के खातों में पैसा भेजा गया था, उन्होंने अपने बयान में स्वीकार किया कि पैसा आते ही उसे निकालकर सीधे होशियार सिंह को सौंप दिया गया था।
- साक्ष्यों से स्पष्ट हुआ है कि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित नियमों के विपरीत निजी लाभ के लिए किया गया।
इन साक्ष्यों के आधार पर, धर्मशाला पुलिस स्टेशन में 16 जुलाई को भारतीय दंड संहिता की धारा 409 और 420 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
होशियार सिंह का राजनीतिक सफर
देहरा से ताल्लुक रखने वाले होशियार सिंह का राजनीतिक करियर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वे देहरा से दो बार विधायक चुने गए और दोनों ही बार उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीता था। साल 2022 में जीत हासिल करने के बाद वे काफी चर्चा में रहे, लेकिन 2024 में उनका राजनीतिक पाला बदल गया। राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई उथल-पुथल के बीच उन्होंने अपनी विधायकी से इस्तीफा दे दिया और भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। हालांकि, इसके बाद हुए उपचुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर के हाथों हार का सामना करना पड़ा। गौर करने वाली बात यह है कि जिस समय उन्होंने विधायक निधि के साथ यह कथित खेल किया, उस समय वे किसी भी पार्टी से नहीं जुड़े थे और एक स्वतंत्र विधायक के रूप में काम कर रहे थे। अब इस मामले ने हिमाचल की राजनीति में नया उबाल ला दिया है और प्रशासन आगे की कानूनी प्रक्रिया में जुट गया है।
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