बालाघाट का 500 करोड़ का डबल मनी घोटाला: मास्टरमाइंड सोमेंद्र कंकराने समेत 8 गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के बालाघाट में करोड़ों का चूना लगाने वाले बहुचर्चित डबल मनी घोटाले के मुख्य आरोपी सोमेंद्र कंकराने को पुलिस ने हरिद्वार से धर दबोचा है। लंबे समय से फरार चल रहे इस जालसाज के साथ उसके सात साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

हरिद्वार से हुई मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले को हिलाकर रख देने वाले विशालकाय 'डबल मनी घोटाले' के मुख्य आरोपी सोमेंद्र कंकराने को आखिरकार कानून के शिकंजे में ले लिया गया है। पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए सोमेंद्र और उसके सात अन्य साथियों को उत्तराखंड की तीर्थ नगरी हरिद्वार से गिरफ्तार किया है। यह गिरोह पिछले करीब तीन वर्षों से अपनी पहचान बदलकर और छिपकर फरारी काट रहा था। मुख्य आरोपी सोमेंद्र कंकराने के खिलाफ अदालत ने स्थाई वारंट जारी कर रखा था और वह भगोड़ा घोषित हो चुका था। निवेशकों की गाढ़ी कमाई लूटने के मामले में इस गिरोह पर अनियमित जमा प्रतिबंध कानून के तहत 63 से भी ज्यादा गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह घोटाला 500 करोड़ रुपये से भी अधिक का है, जिसके चलते पुलिस और प्रशासन पर आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ने का भारी दबाव बना हुआ था।

साल 2022 में हुआ था घोटाले का पर्दाफाश

इस फर्जी निवेश योजना की पोल साल 2022 में खुली थी, जिसके बाद पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए सख्ती दिखाई थी। उस समय पुलिस ने सोमेंद्र कंकराने सहित कई अन्य लोगों को हिरासत में लिया था। छापेमारी के दौरान पुलिस के हाथ 13 करोड़ रुपये से अधिक की नकद राशि लगी थी। जांच की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने 32 बैंक खातों को सीज किया, जिनमें 11 करोड़ रुपये जमा थे। इसके अलावा, आरोपियों की लगभग 45 करोड़ रुपये से ज्यादा की बेनामी संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई भी की गई। हालांकि, शुरुआती गिरफ्तारी के बाद सोमेंद्र को सशर्त जमानत मिल गई थी, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में उच्च न्यायालय ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। जमानत रद्द होने और ट्रायल कोर्ट में लगातार नदारद रहने की वजह से निवेशकों के मामले ठंडे बस्ते में चले गए थे क्योंकि आरोपी का पक्ष तारीखें डलवाने का खेल खेल रहा था।

लालच का जाल और रसूखदारों का संरक्षण

इस घोटाले की जड़ें केवल बालाघाट तक सीमित नहीं थीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों के नागरिक भी इसके जाल में फंसे। कम समय में अपनी जमापूंजी को दोगुना करने की चाहत रखने वाले सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों, बड़े व्यापारियों और यहां तक कि कई रसूखदारों ने भी इस योजना में भारी निवेश किया था। सोमेंद्र कंकराने की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। उसने शुरुआत में निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए 8 से 9 महीने की अवधि में पैसा दोगुना करके लौटाना शुरू किया था। लेकिन जब बाजार में अन्य प्रतिस्पर्धी सक्रिय हुए और उन्होंने 2 से 3 महीने में पैसा डबल करने के दावे किए, तो सोमेंद्र का धंधा प्रभावित होने लगा। स्थिति को संभालने के लिए उसने एजेंटों का एक जाल बिछाया और निवेशकों को गारंटी देने के नाम पर ब्लैंक चेक थमा दिए। जब लोगों का पैसा डूबने लगा और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतों की भरमार हो गई, तब पुलिस ने इस पूरे रैकेट के खिलाफ मोर्चा खोला। तत्कालीन विधानसभा उपाध्यक्ष सुश्री हिना कावरे ने भी इस गंभीर मुद्दे को सदन में पुरजोर तरीके से उठाया था। कयास लगाए जा रहे हैं कि सोमेंद्र के लंबे समय तक फरार रहने के पीछे कई सफेदपोश और रसूखदार लोगों का संरक्षण था।

पूरा गिरोह आया पुलिस की गिरफ्त में

पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के दिशा-निर्देशों पर गठित पुलिस टीम ने मुस्तैदी से काम करते हुए सोमेंद्र के साथ उसके मददगारों को भी गिरफ्तार किया है। हरिद्वार से पकड़े गए आरोपियों में सोमेंद्र के परिजन और उसके साथी शामिल हैं। गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम राकेश महेश्वरे, तामेश महेश्वरे, प्रदुम्मन कंकराने, दिनेश कंकराने, रामप्रसाद मनसुरे, प्रदीप कंकराने और रूपचंद घरडे हैं। इन सभी पर अवैध वित्तीय योजनाएं चलाकर लोगों को ठगने का आरोप है। इससे पहले भी इस मामले में अजय तिडके और हेमराज आमाडारे को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। सोमेंद्र की गिरफ्तारी से अब उन मुकदमों में तेजी आने की उम्मीद है जो लंबे समय से अदालती गलियारों में अटके हुए थे, जिससे हजारों निवेशकों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

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