पटना में अनोखी खोज से सनसनी
बिहार की राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ इलाके से एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहाँ कुर्जी मोहम्मदपुर गांव में एक किसान जब अपने खेत में काम कर रहा था, तब उसे जमीन के भीतर से प्राचीन मूर्तियों का एक खजाना मिला। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में लोगों की भारी भीड़ जुट गई है और हर कोई इन प्रतिमाओं को देखने के लिए उत्सुक है। यह मूर्तियां साधारण नहीं हैं, बल्कि इनकी शिल्पकला और नक्काशी से इन्हें ऐतिहासिक महत्व का माना जा रहा है।
मेढ़ बनाते समय हुई मुलाकात
किसान अजीत भारती अपने खेत की मेढ़ को दुरुस्त कर रहे थे। खुदाई का काम चल रहा था कि अचानक कुदाल किसी सख्त चीज से टकराई और खट-खट की आवाज आई। किसान ने बताया कि जब उन्होंने सावधानी से उस जगह की मिट्टी हटाई, तो उन्हें काले पत्थर जैसी आकृति दिखाई दी। जैसे-जैसे खुदाई आगे बढ़ी, जमीन के नीचे से एक के बाद एक कई प्रतिमाएं बाहर निकल आईं। अजीत भारती के अनुसार, पहले उन्हें एक छोटी मूर्ति मिली और उसके बाद बड़ी प्रतिमाएं बरामद हुईं।
किन देवी-देवताओं की मिलीं प्रतिमाएं
खेत से मिली इन प्रतिमाओं में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की प्राचीन पत्थर की मूर्तियां शामिल हैं। इन मूर्तियों पर की गई बारीक नक्काशी और उन पर उकेरे गए आभूषण व मुकुट की बनावट अद्भुत है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ये प्रतिमाएं पाल काल की हैं। विशेषज्ञों के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इनका समय 9वीं से 11वीं शताब्दी के बीच का हो सकता है। यदि यह बात सच साबित होती है, तो इन मूर्तियों की उम्र लगभग 1250 साल हो सकती है।
धार्मिक स्थल से जुड़ा है इतिहास
दिलचस्प बात यह है कि जिस जगह से ये प्रतिमाएं निकली हैं, उसे ग्रामीण पहले से ही एक पवित्र स्थान मानते रहे हैं। इस जगह को 'अन्नकुड़ी बाबा' के नाम से जाना जाता है। गाँव के बुजुर्गों का कहना है कि वे पीढ़ियों से यहां किसी भी शुभ कार्य, जैसे शादी-ब्याह या मुंडन के दौरान निमंत्रण पत्र चढ़ाने आते रहे हैं। इसी धार्मिक मान्यता के कारण इस विशेष जमीन के टुकड़े को गांव वाले वर्षों से कभी पूरी तरह से नहीं जोतते थे। अब ग्रामीणों को यह संदेह हो रहा है कि क्या जमीन के नीचे कोई प्राचीन मंदिर या कोई बड़ा धार्मिक ढांचा दबा हुआ है।
पुरातत्व विभाग से उम्मीदें
फिलहाल, इन मूर्तियों के मिलने के बाद पूरे गांव में भक्ति का माहौल है और लोग दर्शन करने पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों ने सरकार और पुरातत्व विभाग से अपील की है कि इस पूरे इलाके का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए। लोगों का मानना है कि यदि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI की टीम यहां गहन जांच करे, तो इस ऐतिहासिक धरोहर के बारे में और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। हालांकि, इन मूर्तियों की आयु और उनके कालखंड की आधिकारिक पुष्टि विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जांच करने के बाद ही हो पाएगी। तब तक इन प्राचीन अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं ताकि हमारे इतिहास की इस अनमोल कड़ी को कोई नुकसान न पहुंचे।
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