कोडरमा के राहुल ने नीट में लहराया परचम, पिता के संघर्ष और डॉक्टर बनने के संकल्प ने बदली तकदीर

झारखंड के कोडरमा के रहने वाले 19 वर्षीय राहुल कुमार ने नीट परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। साल 2020 में पिता को कोरोना से जूझते देख राहुल ने डॉक्टर बनने का जो संकल्प लिया था, उसे उन्होंने अपनी मेहनत और निरंतर अभ्यास से पूरा कर दिखाया है।

कोडरमा के होनहार बेटे की बड़ी कामयाबी

झारखंड के कोडरमा जिले के झुमरी निवासी 19 वर्षीय राहुल कुमार ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में बेहतरीन प्रदर्शन कर न केवल अपने परिवार का बल्कि पूरे जिले का गौरव बढ़ाया है। बालेश्वर यादव और बलिया देवी के होनहार पुत्र राहुल ने इस कठिन परीक्षा में 595 अंक प्राप्त किए हैं। उनकी इस उपलब्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 11591वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की है, जबकि ओबीसी एनसीएल श्रेणी में उनकी रैंक 5262 रही है। राहुल की यह सफलता उनके वर्षों के अथक परिश्रम, अनुशासित जीवनशैली और एक डॉक्टर बनने के मजबूत इरादे का सीधा परिणाम है।

कोविड के दौर में उपजा डॉक्टर बनने का सपना

राहुल के जीवन में डॉक्टर बनने की प्रेरणा वर्ष 2020 में आई भीषण कोविड महामारी के दौरान मिली। उस चुनौतीपूर्ण समय में उनके पिता बालेश्वर यादव खुद कोरोना वायरस की चपेट में आ गए थे। हालत गंभीर होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। उस दौर में राहुल ने बहुत करीब से स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और अस्पतालों के माहौल को महसूस किया। महामारी के उस कठिन समय को अपनी आंखों से देखने के बाद, राहुल ने मन ही मन यह दृढ़ संकल्प ले लिया था कि वह भविष्य में एक डॉक्टर बनेंगे और समाज में जरूरतमंद लोगों का इलाज कर उनकी सेवा करेंगे। तभी से उन्होंने मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने को अपना एकमात्र लक्ष्य बना लिया था।

रणनीति में बदलाव और असफलता से सीख

राहुल की सफलता की कहानी रातों-रात नहीं लिखी गई है। उन्होंने बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई कोडरमा में ही हुई थी। वर्ष 2023 में उन्होंने पीवीएसएस डीएवी पब्लिक स्कूल, कोडरमा से अपनी दसवीं की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने के उद्देश्य से कोटा चले गए। कोटा में उन्होंने करीब तीन वर्षों तक लगातार मेहनत की और पूरी तरह अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहे। उन्होंने वर्ष 2025 में पहली बार नीट की परीक्षा दी थी, लेकिन उस प्रयास में उनकी रैंक एक लाख से अधिक आई थी। हालांकि, राहुल ने उस असफलता से हार मानने के बजाय अपनी कमियों का बारीकी से विश्लेषण किया। उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया और रिवीजन, सेल्फ स्टडी और मॉक टेस्ट पर पहले से कहीं अधिक जोर दिया। इस नई रणनीति का ही नतीजा था कि इस बार उन्हें बड़ी सफलता मिली।

मॉक टेस्ट को बताया सफलता की कुंजी

अपनी तैयारी के दौरान बरती गई सावधानियों के बारे में राहुल का कहना है कि नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं को पास करने के लिए मॉक टेस्ट बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका मानना है कि आप जितने ज्यादा मॉक टेस्ट देंगे, आपका आत्मविश्वास उतना ही बढ़ेगा और परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन (टाइम मैनेजमेंट) में उतनी ही आसानी होगी। राहुल कोटा में रहने के दौरान प्रतिदिन 5 से 6 घंटे कोचिंग क्लास लेते थे और इसके अतिरिक्त 5 से 6 घंटे पूरी निष्ठा के साथ सेल्फ स्टडी करते थे। उन्होंने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अपने नियमित अभ्यास को दिया है।

पिता का त्याग और परिवार का गर्व

राहुल सात भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं और छह बहनों के इकलौते भाई हैं। उनकी इस कामयाबी से परिवार में खुशी का माहौल है। राहुल के पिता बालेश्वर यादव ने बताया कि उन्होंने स्वयं केवल दूसरी कक्षा तक ही पढ़ाई की थी, लेकिन उन्होंने हमेशा यह सपना देखा कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा हासिल करें। उन्होंने खेती के साथ-साथ वर्षों तक ट्रक चालक के रूप में कड़ी मेहनत की ताकि बच्चों की पढ़ाई में कभी कोई बाधा न आए। उनकी मेहनत रंग लाई और आज उनके पास स्वयं के दो ट्रक हैं। भविष्य की योजनाओं के बारे में बताते हुए राहुल ने कहा कि एमबीबीएस पूरा करने के बाद वह कार्डियोलॉजी में विशेषज्ञ बनना चाहते हैं, ताकि हृदय रोगियों का बेहतर उपचार कर सकें और समाज को अपना योगदान दे सकें।

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