मिथिला पेंटिंग में स्टेट अवॉर्ड पाने का क्या है तरीका, विजेता ज्वालामुखी देवी ने बताई पूरी प्रक्रिया

मधुबनी की जानी-मानी कलाकार और स्टेट अवॉर्ड विजेता ज्वालामुखी देवी ने मिथिला पेंटिंग के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार पाने की पूरी चयन प्रक्रिया साझा की है। उन्होंने बताया कि अब ऑनलाइन आवेदन के साथ वीडियो जमा करना अनिवार्य हो गया है, और पुरस्कार मिलने के बाद कलाकारों को पेंशन का लाभ भी मिलता है।

कलाकारों के लिए खास जानकारी

बिहार का मधुबनी जिला सदियों से मिथिला पेंटिंग का मुख्य केंद्र रहा है। इस मिट्टी से कई ऐसे कलाकार निकले हैं जिन्होंने पद्म श्री, नेशनल और स्टेट अवॉर्ड से देश-दुनिया में नाम रोशन किया है। आज भी हजारों कलाकार इस अद्भुत कला से जुड़े हुए हैं और लगातार अपनी साधना में लगे हैं। कई उभरते हुए कलाकार अक्सर यह जानना चाहते हैं कि वे स्टेट अवॉर्ड के लिए कैसे दावेदारी पेश कर सकते हैं और इसकी चयन प्रक्रिया क्या है। इस विषय पर अधिक स्पष्टता के लिए स्टेट अवॉर्ड विजेता ज्वालामुखी देवी ने विस्तार से जानकारी साझा की है। उन्होंने न केवल आवेदन के चरणों को समझाया है, बल्कि पुरस्कार मिलने के बाद मिलने वाले सरकारी लाभों पर भी रोशनी डाली है।

पहले कैसी होती थी चयन प्रक्रिया

ज्वालामुखी देवी को वर्ष 2012-13 में स्टेट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। उस दौर की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि तब सिस्टम आज की तुलना में काफी अलग था। उस समय राज्य भर से लगभग 500 से 600 कलाकारों को नामांकित किया जाता था। इन सभी प्रतिभागियों को एक साथ पटना बुलाया जाता था और वहीं पर एक परीक्षा आयोजित की जाती थी। परीक्षा में कलाकारों को गोबर की परत तैयार करने से लेकर प्राकृतिक रंगों का उपयोग करके पेंटिंग बनाने तक का हुनर दिखाना पड़ता था। वहां मौजूद सरकारी अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीम बारीकी से काम का निरीक्षण करती थी और फिर विजेता का चयन किया जाता था।

अब ऑनलाइन आवेदन और वीडियो का चलन

वर्तमान में प्रक्रिया पूरी तरह बदल चुकी है। अब कोई भी कलाकार जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक है और जिन्हें इस कला का अनुभव है, वे अप्रैल से मई के बीच ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकते हैं। नई व्यवस्था के तहत, कलाकार को अपने घर पर ही पेंटिंग तैयार करनी होती है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गोबर की परत तैयार करने से लेकर अंतिम कलाकृति के बनने तक की पूरी प्रक्रिया का वीडियो बनाना पड़ता है। आपको अपनी पेंटिंग की थीम और उस पर की गई मेहनत के हर चरण को इस वीडियो में कैद करना होगा।

दस्तावेजों और वीडियो को जमा करने की प्रक्रिया

ऑनलाइन पंजीकरण के बाद, कलाकार को अपनी बनाई हुई कलाकृति के वीडियो और फोटो को सीडी में दर्ज करना होता है। इस सीडी को अपने जिले के हस्तकला एवं कला संस्कृति विभाग में जमा करना आवश्यक है। इसके साथ ही, कलाकार को अपने उन सभी पुराने प्रमाणपत्रों, पुरस्कारों और मंचों के फोटोग्राफ्स या वीडियो भी देने होते हैं जो उन्हें पहले मिल चुके हैं। इतना ही नहीं, आपको अपनी पेंटिंग की थीम के बारे में विस्तार से लिखकर भी देना पड़ता है। विभाग के जरिए ये दस्तावेज पटना भेजे जाते हैं, जहां चयन समिति अंतिम निर्णय लेती है। गौरतलब है कि पहले जहाँ कई कलाकारों को एक साथ पुरस्कार दिए जाते थे, अब नियम बदल गए हैं और फिलहाल एक जिले से केवल एक ही कलाकार को स्टेट अवॉर्ड के लिए चुना जाता है।

अवॉर्ड मिलने के फायदे

स्टेट अवॉर्ड मिलने के बाद कलाकार को न केवल समाज में मान-सम्मान मिलता है, बल्कि उन्हें काम के नए अवसर भी मिलने लगते हैं। सरकार द्वारा मान्यता मिलने से उनकी कला को नई पहचान मिलती है। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस सम्मान को प्राप्त करने वाले कलाकार जब 50 वर्ष की आयु पूरी कर लेते हैं, तो सरकार उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। सरकार की ओर से ऐसे स्टेट अवॉर्डी कलाकारों को प्रतिमाह ₹10,000 की पेंशन राशि दी जाती है, जो उनके बुढ़ापे और कला के प्रति उनके समर्पण का सम्मान है।

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