ईरानी अधिकारी की अमेरिका को खुली धमकी, कहा- मोजतबा खामेनेई के शब्दों का अर्थ समझ गए तो मैदान छोड़कर भागेंगे अमेरिकी सैनिक

ईरान की संसद के सुरक्षा प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने अमेरिकी सैनिकों को चेताया है कि वे ईरान के सुप्रीम लीडर के संदेश को गंभीरता से लें, अन्यथा उन्हें परिणाम भुगतने होंगे।

अमेरिकी सैनिकों को मैदान छोड़ने की चेतावनी

ईरान की संसद के नेशनल सिक्योरिटी कमीशन के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने अमेरिका को लेकर एक बेहद सख्त चेतावनी जारी की है। अजीजी के अनुसार, यदि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिक ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई द्वारा हाल ही में दिए गए 'कभी न भूलने वाले सबक' वाले संदेश के वास्तविक अर्थ को समझ लें, तो वे मध्य-पूर्व से अपना बोरिया-बिस्तर समेटने में एक पल भी देर नहीं करेंगे।

इब्राहिम अजीजी का सोशल मीडिया पर कड़ा रुख

अमेरिका और ईरान के बीच गहराते संकट के बीच इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर अमेरिकी सैन्य बल हमारे सुप्रीम लीडर के उस संदेश की गहराई को भांप लें, जिसमें उन्होंने भविष्य की कठोर प्रतिक्रिया का जिक्र किया है, तो वे वहां से तुरंत भागने का फैसला लेंगे। उनका यह बयान ईरान के आक्रामक तेवरों को फिर से दुनिया के सामने रखने वाला है।

मोजतबा खामेनेई की अमेरिका को सीधी चुनौती

इब्राहिम अजीजी का यह बयान सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के उस हालिया बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने अमेरिका को अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहने को कहा था। सुप्रीम लीडर ने स्पष्ट किया कि जब अमेरिकी दुश्मन युद्ध को विस्तार देने की कोशिश कर रहा है, तो उसे यह याद रखना चाहिए कि ईरान और उसका 'रेजिस्टेंस फ्रंट' ऐसी जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है, जो अमेरिका के लिए अपमानजनक और विनाशकारी साबित होगी। उन्होंने कहा कि ईरान के पास ऐसे कड़े सबक सुरक्षित हैं जिन्हें अमेरिका ताउम्र याद रखेगा।

अमेरिका को बताया 'बड़ा शैतान'

अपने संबोधन में मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका पर तीखा हमला करते हुए उसे 'बड़ा शैतान' करार दिया। उन्होंने 17 जून, 2026 को हुए 14 सूत्री अंतरिम शांति समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर को पूरी तरह से व्यर्थ और अर्थहीन बताया। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि अमेरिका की ओर से ईरान पर हमलों का सिलसिला जारी रहता है, तो ईरान और उसका 'रेजिस्टेंस फ्रंट' उसे ऐसा सबक सिखाएगा जो इतिहास में दर्ज हो जाएगा।

विफल हुआ शांति समझौता

गौर करने वाली बात यह है कि 17 जून को हुए जिस अंतरिम शांति समझौते पर दुनिया की नजरें टिकी थीं, वह महज 8 दिन भी नहीं टिक सका। समझौते के एक महीने के भीतर ही दोनों देश एक भीषण युद्ध की कगार पर आ खड़े हुए हैं। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से कई बार 'रेड लाइन' पार की गई है। शांति समझौते पर हस्ताक्षर के मात्र 8वें दिन ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज पर हमला करने के बाद से जो जंग शुरू हुई, वह आज भी जारी है।

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