देश के उत्तरी इलाके इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में हैं, लेकिन उत्तराखंड के जिलों में नजारा बिल्कुल उलट है। यहां जून के महीने में भी लोगों को ठंड महसूस हो रही है। हाल यह है कि राजधानी देहरादून के निवासी 24 घंटे के भीतर एक या दो नहीं, बल्कि तीन-तीन मौसमों का अनुभव एक साथ कर रहे हैं।
पहेली बना देहरादून का मौसम
इन दिनों देहरादून के मौसम का मिजाज किसी पहेली से कम नहीं रह गया है। पल-पल बदलती धूप और बादलों की आंख-मिचौली स्थानीय लोगों को हैरान कर रही है। दून घाटी में दिन की शुरुआत चटख और तीखी धूप के साथ होती है, जिससे बचने के लिए लोग सूती कपड़ों और छतरियों का सहारा ले रहे हैं। लेकिन दोपहर ढलते ही आसमान का रंग अचानक बदल जाता है—काले बादल छा जाते हैं और तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश शुरू हो जाती है।
रात होते ही गिर रहा तापमान
मौसम का यह यू-टर्न लोगों के लिए हैरानी का सबब बना हुआ है। बारिश के बाद रात होते-होते तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है और ठंडी हवाएं चलने लगती हैं। हालत यह है कि जून के महीने में भी दूनवासियों को कंबल और हल्की चादरें ओढ़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
जलवायु परिवर्तन का बड़ा संकेत
देहरादून के स्थानीय निवासी और पर्यावरणविद दानिश मलिक का कहना है कि शहर का मौसम तेजी से बदल रहा है। गर्मी से राहत मिलने की वजह से लोग इसे लेकर खुश तो हैं, लेकिन यह जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा उदाहरण भी है, जिसे लेकर चिंतित होने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि यह ग्लोबल वार्मिंग का ही नतीजा है कि बरसात से पहले बारिश और गर्मी में भी ठंडे मौसम का अनुभव हो रहा है। पहले हमें लगता था कि दूसरे देशों के मौसम में बदलाव से हम पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन अब हम खुद को ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से प्रभावित होता देख रहे हैं और पड़ोसी राज्यों की हवा का असर भी हम पर पड़ रहा है।
फसलों और सेहत पर असर
दानिश मलिक ने बताया कि पिछले महीने ही पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में आंधी-तूफान देखने को मिला था, जिसमें कई लोगों की जान भी चली गई थी। अब राजधानी में मौसम का बदलना और जून में ठंडी हवाएं चलना न सिर्फ इंसान की सेहत के लिए नुकसानदेह है, बल्कि फसलों के लिए भी बेहद हानिकारक है।
उन्होंने कहा कि किसानों को फसल पकने से पहले ही बारिश और ओलावृष्टि के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है। जब यही बारिश मौसम के सही चक्र में होती है तो फसलों के लिए फायदेमंद होती है, लेकिन बेमौसमी होने पर यह खेती और बागवानी दोनों के लिए बहुत नुकसानदायक साबित हो रही है। उन्होंने जोड़ा कि देहरादून में सुबह तेज धूप होती है, शाम तक मिजाज पूरी तरह बदल जाता है और रात की बारिश से इतनी ठंड बढ़ जाती है कि लोगों को गर्म कंबल ओढ़ने पड़ते हैं।
बदलते मौसम से परेशान प्रकृति
दानिश के मुताबिक जब मौसम का सामान्य चक्र चलता है तो जीव-जंतु, पेड़-पौधे, फसल और इंसान—सबके लिए बेहतर होता है, लेकिन बदलते मौसम से प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पक्षी मौसम और जलवायु के अनुसार ही जीवन जीते हैं। पक्षी ठंडी जलवायु से दूर गर्म प्रदेशों की ओर पलायन करते हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन के चलते यदि उन्हें गर्म प्रदेशों में भी ठंडा मौसम मिलेगा तो वे कैसे जीवित रह पाएंगे।
उन्होंने आगाह किया कि मानवीय गतिविधियों और प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण ही मार्च में गर्मी और जून में सर्दी देखने को मिल रही है। यह आने वाले समय के लिए एक चेतावनी है कि अगर जल स्रोतों और पर्यावरणीय संसाधनों का इसी तरह दोहन होता रहा तो सब कुछ खत्म हो जाएगा।
बारिश में भीगी पहाड़ों की रानी
एक ओर जहां 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान से लोगों को राहत मिली है, वहीं देहरादून में मौसम का यह बदलाव लोगों को परेशान भी कर रहा है। शुक्रवार तड़के से ही देहरादून में झमाझम बारिश हुई। पहाड़ों की रानी मसूरी में भी लगातार 2 से 3 घंटे बारिश होने से तापमान गिरकर 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम के बदले मिजाज के बीच मसूरी में सैलानियों की आमद बढ़ी, जिसके चलते लोग जाम की समस्या से जूझते नजर आए।
इन जिलों में बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, आज देहरादून, पिथौरागढ़, चमोली, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और टिहरी में गर्जन के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं प्रदेश के 4200 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने की भी संभावना है।
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