मुंगेर में बुलडोजर एक्शन से बेघर हुए लोग, बोले- सामान निकालने तक की नहीं मिली मोहलत

बिहार के मुंगेर में सड़क चौड़ीकरण के लिए की गई बुलडोजर कार्रवाई से टिकरामपुर के कई परिवार प्रभावित हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें अपना कीमती सामान निकालने का समय भी नहीं दिया और मुआवजा भी अधूरा है।

सड़क चौड़ीकरण की भेंट चढ़े आशियाने

बिहार के मुंगेर सदर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले आदर्शग्राम टिकरामपुर में विकास की दौड़ ने कई परिवारों के सामने जीवन का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। यहाँ एनएच-333बी मार्ग को चौड़ा करने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा चलाए गए बुलडोजर अभियान में दर्जनों मकान और दुकानें मलबे में तब्दील हो गईं। सड़क का विस्तार निश्चित रूप से क्षेत्र की बेहतरी के लिए जरूरी माना जा रहा है, लेकिन जिस तरह से इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया, उसने स्थानीय निवासियों के भीतर भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। अब ये पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।

सामान तक निकालने की नहीं मिली मोहलत

प्रभावित परिवारों का सबसे बड़ा दर्द यह है कि उन्हें अपना घर और दुकान खाली करने के लिए बहुत कम समय दिया गया। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन उन्हें कम से कम एक घंटे का भी अतिरिक्त समय देता, तो वे घर का जरूरी सामान और दुकानों की सामग्री सुरक्षित बाहर निकाल सकते थे। निवासियों के अनुसार, करीब 15 दिन पहले माइकिंग के माध्यम से उन्हें इस कार्रवाई के बारे में जानकारी दी गई थी, लेकिन जिस दिन प्रशासन का अमला बुलडोजर लेकर पहुंचा, उस समय बिना किसी पूर्व सूचना के तुरंत ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस अचानक हुई कार्रवाई के कारण लोग अपने घरेलू सामान और व्यापारिक सामग्री को बचाने में नाकाम रहे।

मुआवजे और पुनर्वास को लेकर खड़ा हुआ विवाद

बुलडोजर कार्रवाई झेलने वाले परिवारों का आरोप है कि उन्हें मिलने वाला मुआवजा भी अभी तक पूर्ण नहीं है। कई लोगों का कहना है कि उन्हें मुआवजे की राशि का केवल एक हिस्सा ही प्राप्त हुआ है और उससे पहले ही उनके आशियाने तोड़ दिए गए। इस स्थिति ने उन्हें गंभीर आर्थिक संकट में धकेल दिया है। अपनी जमा-पूंजी और घर गवाने के बाद, अब ये पीड़ित परिवार प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि उनकी बकाया मुआवजा राशि का भुगतान अविलंब किया जाए और उनके पुनर्वास के लिए कोई ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

रोज़गार पर भी लगा बड़ा ग्रहण

इस तोड़फोड़ का सीधा असर लोगों की आजीविका पर भी पड़ा है। कई दुकानदार ऐसे थे जिन्होंने सरकार की उद्यमी योजना के तहत बैंक से कर्ज लेकर अपना कारोबार शुरू किया था। दुकानें जमींदोज होने के बाद अब उनके सामने बैंक की किश्तें चुकाने की बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। सावन का महीना चल रहा है और ढाबा संचालकों को उम्मीद थी कि इस दौरान उनकी कमाई अच्छी होगी, लेकिन अचानक दुकान छिन जाने से उनका रोजी-रोटी का जरिया पूरी तरह समाप्त हो गया है।

विकास और मानवीय संवेदनाओं का टकराव

एनएच-333बी का चौड़ीकरण मुंगेर के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जिससे आवागमन और कनेक्टिविटी में सुधार होना तय है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि क्षेत्र के विकास के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार आवश्यक है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास की गति मानवीय संवेदनाओं और विस्थापन की पीड़ा को दरकिनार नहीं कर सकती। अब हर किसी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इन प्रभावित परिवारों की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और उन्हें कब तक उचित मुआवजा एवं पुनर्वास का लाभ दिलाते हैं।

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