मुजफ्फरपुर में ठगी का नया और आधुनिक तरीका
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने साइबर अपराध की दुनिया में हड़कंप मचा दिया है। यहां बदमाशों ने एक नामी होटल व्यवसायी को अपनी जाल में फंसाकर उनसे कुल 97 लाख रुपये की बड़ी राशि वसूल ली। इस अपराध में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अपराधियों ने अपनी पहचान छिपाने और पीड़ित को डराने के लिए आधुनिक एआई (AI) और डीपफेक तकनीक का सहारा लिया। फिलहाल पुलिस इस मामले में तेजी से कार्रवाई कर रही है और अब तक 20 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं, जबकि बाकी बचे 77 लाख रुपये की बरामदगी के लिए टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
क्या है पूरा मामला और कैसे फंसाया जाल में?
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, पीड़ित पटना का रहने वाला एक होटल व्यवसायी है। उन्हें मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र के एसकेएमसीएच गेट संकबय दो के निवासी अभिषेक कुमार ने अपने चार अन्य सहयोगियों और एक महिला मित्र के साथ मिलकर ठगी का शिकार बनाया। आरोपियों ने पहले एआई और डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग करते हुए व्यवसायी की अश्लील फोटो और वीडियो तैयार कीं। इसके बाद इन नकली कंटेंट को वायरल करने की धमकी देकर उनसे एक करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग की गई। व्यवसायी ने परेशान होकर 18 जुलाई को अहियापुर थाने में इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत दर्ज कराई।
चार किस्तों में दिए 97 लाख रुपये
अपनी बदनामी के डर और मानसिक दबाव में आकर व्यवसायी ने कर्ज लेकर अपराधियों की मांग पूरी की। ठगों ने उनसे कुल 97 लाख रुपये चार किस्तों में वसूले। पहली ही किस्त में 30 लाख रुपये लेने के बावजूद आरोपियों की भूख शांत नहीं हुई और वे लगातार और रुपयों की मांग करते रहे। ये रुपये मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और पटना के विभिन्न इलाकों में अलग-अलग समय पर सौंपे गए थे।
10 हजार के ट्रैकर ने खोली पोल
लगातार हो रही अवैध वसूली से तंग आकर व्यवसायी ने अंत में हिम्मत जुटाई। उन्होंने अपने परिवार से सलाह लेने के बाद एक 10 हजार रुपये का ट्रैकर खरीदा और इसे नोटों के आखिरी बंडल में छुपा दिया। 15 जुलाई को जैसे ही उन्होंने यह रकम ठगों को सौंपी, उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दे दी। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की। ट्रैकर की लाइव लोकेशन के आधार पर पुलिस ने अहियापुर में एक घर पर छापा मारा, जहां से वह बैग और 20 लाख रुपये बरामद हो गए। हालांकि, मुख्य आरोपी अभिषेक इस दौरान पुलिस को चकमा देकर फरार होने में सफल रहा।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
नगर एसडीपीओ विनीत सिन्हा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें 15 और 16 जुलाई की दरम्यानी रात को घटना की सूचना मिली थी। छापेमारी के दौरान जप्ती सूची तैयार कर आरोपी के माता-पिता के हस्ताक्षर भी लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि बरामद रुपयों की गिनती अहियापुर थाने में की गई और इस पूरे ऑपरेशन को स्टेशन डायरी में दर्ज किया गया है। वर्तमान में पुलिस ने दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है और उनसे सख्ती से पूछताछ की जा रही है।
पुलिस का यह भी कहना है कि बरामद 20 लाख रुपये की जानकारी आयकर विभाग को साझा कर दी गई है। जांच में पता चला है कि अभिषेक और उसके गिरोह ने मिलकर सुनियोजित तरीके से इस हनी ट्रैप को अंजाम दिया था। पीड़ित व्यवसायी की पहचान फिलहाल सुरक्षा कारणों से गुप्त रखी गई है, जो मूल रूप से सीतामढ़ी के निवासी हैं। इससे पहले राजस्थान के जयपुर में भी एआई तकनीक के इस्तेमाल से हनी ट्रैप के जरिए 90 लाख रुपये ठगने का ऐसा ही मामला सामने आ चुका है, जो इस तरह के अपराधों के बढ़ते खतरों को दर्शाता है।
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