मानसून के दिनों में छत्तीसगढ़ का पारंपरिक जायका
छत्तीसगढ़ का खानपान अपनी सादगी और क्षेत्रीय विशिष्टता के लिए जाना जाता है। जैसे ही राज्य में मानसून की दस्तक होती है, यहां के गांवों और घरों की रसोई में कई तरह के पारंपरिक पकवान बनने शुरू हो जाते हैं। बारिश के दौरान चारों तरफ फैली हरियाली के बीच छत्तीसगढ़ की थाली में एक ऐसी सब्जी सबसे ज्यादा खास मानी जाती है, जो सीधे बांस के पेड़ों से प्राप्त होती है। इसे स्थानीय भाषा में करिल कहा जाता है, जो बांस की कोपल होती है। मानसून की फुहारों के साथ यह सब्जी छत्तीसगढ़ी संस्कृति और रसोई का एक अभिन्न हिस्सा बन जाती है।
करिल सब्जी की तैयारी और सफाई की प्रक्रिया
बिलासपुर की रहने वाली अन्नू बताती हैं कि बांस की कोपल से तैयार होने वाली यह सब्जी स्वाद के साथ-साथ पारंपरिक महत्व भी रखती है। करिल को सब्जी के रूप में पकाने से पहले एक विशेष प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। बांस की कोपल की तासीर में थोड़ी प्राकृतिक कड़वाहट होती है, जिसे दूर करना बहुत जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले कोपल को छीलकर साफ किया जाता है और फिर बारीक टुकड़ों में काट लिया जाता है। काटने के बाद इसे पानी में अच्छी तरह से उबाला जाता है ताकि इसकी कड़वाहट पूरी तरह निकल जाए। उबालने के बाद पानी को निचोड़कर अलग कर दिया जाता है, जिससे यह सब्जी बनाने के लिए तैयार हो जाती है।
स्वादिष्ट करिल सब्जी बनाने की विधि
अन्नू ने इस पारंपरिक सब्जी को तैयार करने की विस्तृत विधि साझा की है। उन्होंने बताया कि इसे बनाने का तरीका काफी सरल है लेकिन मसालों का चयन बहुत महत्वपूर्ण है।
- सबसे पहले कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें। सरसों का तेल इस सब्जी के स्वाद को और अधिक निखार देता है।
- तेल गर्म होने के बाद इसमें लहसुन और हरी मिर्च का तड़का लगाएं। यह खुशबू के लिए बेहद जरूरी है।
- अब कटी हुई प्याज और टमाटर डालें और उन्हें तब तक भूनें जब तक कि वे नरम न हो जाएं।
- इसके बाद इसमें हल्दी, धनिया पाउडर और लाल मिर्च पाउडर जैसे आवश्यक मसाले मिलाएं और इसे अच्छी तरह भूनें।
- जब मसाले तेल छोड़ने लगें, तब उबले हुए और निचोड़े हुए करिल को कड़ाही में डाल दें।
- स्वाद के अनुसार नमक डालें और अंत में एक खास चीज मिलाएं, जो है अचार का मसाला।
- मसाला मिलाने के बाद सब्जी को धीमी आंच पर कुछ देर तक पकने दें ताकि मसालों का स्वाद करिल के रेशों में अच्छी तरह मिल जाए।
- पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद ऊपर से हरा धनिया छिड़कें।
अचार मसाले का कमाल
करिल की सब्जी में सबसे महत्वपूर्ण सामग्री अचार का मसाला है। सरसों के तेल के तड़के और लहसुन की सोंधी खुशबू के साथ जब अचार का मसाला मिलता है, तो यह सब्जी का स्वाद कई गुना बढ़ा देता है। यह इसे एक अलग प्रकार का चटपटापन देता है, जो छत्तीसगढ़ी स्वाद की पहचान है। गरमागरम चावल के साथ जब इस सब्जी को परोसा जाता है, तो यह मानसून के मौसम का सबसे पसंदीदा भोजन बन जाता है।
सेहत के लिए कितनी गुणकारी है करिल
करिल की सब्जी न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि यह सेहत के लिए भी किसी खजाने से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि बांस की कोपल में फाइबर की प्रचुर मात्रा होती है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करती है। इसके अलावा इसमें कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक होते हैं। यही कारण है कि सदियों से छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खानपान में इसे एक महत्वपूर्ण स्थान मिला हुआ है। बारिश के मौसम में यह सब्जी न केवल पेट के लिए फायदेमंद है बल्कि यह लोगों को अपनी जड़ों, मिट्टी और छत्तीसगढ़ की प्राचीन संस्कृति से जोड़े रखने का काम भी करती है। आज भी छत्तीसगढ़ के अनेक घरों में मानसून के आगमन पर इस सब्जी का इंतजार बड़ी बेसब्री से किया जाता है।
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