नशे की लत छुड़ाने गई एडल्ट स्टार एमिली विलिस बनीं जिंदा लाश, रिहैब सेंटर की लापरवाही पर कोर्ट का बड़ा फैसला

एडल्ट फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर स्टार एमिली विलिस एक वीआईपी रिहैब सेंटर में इलाज के दौरान कोमा जैसी स्थिति में पहुंच गईं, जिसके बाद अब कोर्ट ने उन्हें 3 मिलियन डॉलर का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

एक चमकते सितारे का दर्दनाक अंत

एडल्ट फिल्म इंडस्ट्री का जाना-माना नाम एमिली विलिस, जिनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2021 में उन्हें 'फीमेल परफॉर्मर ऑफ द ईयर' के प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया था, आज एक ऐसी स्थिति में हैं जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। एमिली विलिस, जिनका वास्तविक नाम लिट्जी लारा बानुएलोस है, मात्र 27 साल की उम्र में ही जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। एक वीआईपी रिहैब सेंटर में इलाज कराने गई इस स्टार की कहानी किसी रोंगटे खड़े कर देने वाली फिल्म से कम नहीं है, जहां लापरवाही ने उन्हें 'जिंदा लाश' बना दिया है।

रिहैब सेंटर की लापरवाही और एनोक्सिक ब्रेन इंजरी

यह दुखद घटना साल 2024 की है, जब एमिली केटामाइन ड्रग्स की लत से पीछा छुड़ाने के लिए मालिबू स्थित एक बेहद महंगे और लग्जरी माने जाने वाले 'समिट मालिबू' रिहैब सेंटर में भर्ती हुई थीं। इलाज के दौरान वहां कुछ ऐसा घटित हुआ जिसने उनकी पूरी दुनिया ही बदल दी। केंद्र के भीतर एमिली की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ गई। गंभीर मेडिकल लापरवाही के चलते उनके दिमाग तक ऑक्सीजन का प्रवाह पूरी तरह से रुक गया। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इस गंभीर स्थिति को 'एनोक्सिक ब्रेन इंजरी' कहा जाता है। इस हादसे ने एमिली के मस्तिष्क को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है, जिसके परिणामस्वरूप उनका पूरा शरीर हमेशा के लिए पैरालाइज्ड हो गया है और वे एक तरह से 'फ्रीज' हो गई हैं।

कानूनी लड़ाई और 3 मिलियन डॉलर का हर्जाना

अपनी बेटी की यह दुर्दशा देखकर एमिली की मां येसेनिया लारा कूपर ने रिहैब सेंटर के खिलाफ कानूनी जंग छेड़ दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सेंटर के कर्मचारियों ने एमिली की बिगड़ती सेहत के प्रति भयंकर उपेक्षा दिखाई। समय रहते सही चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण एमिली की यह स्थिति हुई। इस मामले पर अब लॉस एंजिल्स की अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए परिवार के पक्ष में 3 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 25 करोड़ रुपये के मुआवजे का आदेश दिया है। वकील जेम्स ए मॉरिस जूनियर ने बताया कि एमिली अब पूर्ण रूप से दूसरों पर निर्भर हैं। वे केवल कभी-कभार अपनी आंखें खोल पाती हैं या हल्की आवाजें निकालती हैं, लेकिन किसी भी प्रकार का संवाद करने या प्रतिक्रिया देने में पूरी तरह असमर्थ हैं।

रिहैब सेंटर का अपना पक्ष

इस पूरे घटनाक्रम पर 'समिट मालिबू' रिहैब सेंटर का कहना है कि उन पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। सेंटर की ओर से सफाई देते हुए दावा किया गया कि जब एमिली वहां भर्ती हुई थीं, तब भी उनकी शारीरिक स्थिति अत्यंत नाजुक थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एमिली ने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया था और केंद्र के स्टाफ की चिकित्सकीय सलाह तथा दवाओं को लेने में भी आनाकानी की थी। दूसरी ओर, उनके वकील जेम्स ए मॉरिस जूनियर का मानना है कि दो साल की लंबी जांच के बावजूद उस रात रिहैब सेंटर के कमरों के भीतर क्या हुआ था, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन एमिली की वर्तमान हालत ने उनकी जिंदगी को तबाह कर दिया है।

करियर की ऊंचाइयों से शून्य तक का सफर

एमिली विलिस की ख्याति का पैमाना काफी ऊंचा था। साल 2019 में उन्हें 'पेंटहाउस पेट ऑफ द मंथ' चुना गया था और उसके दो साल बाद ही उन्होंने अपने करियर का सबसे बड़ा 'फीमेल परफॉर्मर ऑफ द ईयर' का अवॉर्ड जीता था। करोड़ों लोगों के आकर्षण का केंद्र रही यह अभिनेत्री आज अपनी मां की आंखों के सामने बिस्तर पर पड़ी है, जिसे देखकर उनकी मां का दुख असहनीय हो गया है। छाती पीट-पीट कर रोती एक मां का दर्द उस सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है, जो इलाज के नाम पर एक जानलेवा जाल बनकर रह गया है। यह घटना न केवल एमिली के प्रशंसकों के लिए एक सदमा है, बल्कि उन वीआईपी रिहैब सेंटर्स की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है जो भारी फीस वसूलने के बावजूद मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं।

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