दतिया उपचुनाव: कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल में पाई सफलता, नाराज अवधेश नायक अब चुनावी मैदान में

मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर होने वाले उपचुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने नाराज नेता अवधेश नायक को मनाकर बड़ी राहत हासिल की है। टिकट न मिलने से खफा चल रहे अवधेश नायक अब कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करते नजर आ रहे हैं, जिससे पार्टी को चुनावी बढ़त मिलने की उम्मीद है।

दतिया उपचुनाव का सियासी पारा

मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी माहौल बेहद गर्म है और दोनों प्रमुख दल इस सीट को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ने ही अपने पत्ते खोल दिए हैं। जहां भाजपा ने वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को दरकिनार करते हुए आशुतोष तिवारी पर दांव लगाया है, वहीं कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। दोनों ही उम्मीदवारों ने अपने नामांकन दाखिल कर दिए हैं और अब प्रचार का दौर जोर-शोर से जारी है।

अवधेश नायक की नाराजगी और कांग्रेस की कशमकश

इस पूरे चुनावी घटनाक्रम में अवधेश नायक एक ऐसे केंद्र बिंदु बनकर उभरे थे, जिस पर भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजरें टिकी हुई थीं। अवधेश नायक, जो पूर्व में भाजपा का हिस्सा थे और साल 2023 में कांग्रेस में शामिल हुए थे, इस बार दतिया से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। जब कांग्रेस ने उन्हें टिकट न देकर घनश्याम सिंह को मौका दिया, तो वे पार्टी से काफी नाराज बताए जा रहे थे। उनकी इस नाराजगी का फायदा उठाने के लिए भाजपा भी पीछे नहीं रही और उम्मीदवार आशुतोष तिवारी खुद उनसे मिलने पहुंचे, जिससे यह अटकलें तेज हो गई थीं कि क्या अवधेश नायक घर वापसी कर सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस ने समय रहते स्थिति को भांप लिया और उन्हें मनाने के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय किया।

जीतू पटवारी के साथ साझा किया मंच

कांग्रेस की ओर से किए गए डैमेज कंट्रोल का असर अब जमीन पर साफ दिखाई दे रहा है। अवधेश नायक न केवल मान गए हैं, बल्कि उन्होंने सक्रिय रूप से चुनाव प्रचार की कमान भी संभाल ली है। हाल ही में शहर में आयोजित एक बड़ी चुनावी सभा के दौरान अवधेश नायक ने मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ मंच साझा किया। इस मंच से जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की सरकार ने किसानों और दलित वर्ग को केवल धोखा देने का काम किया है। पटवारी ने यह भी दावा किया कि दतिया में कांग्रेस न केवल मजबूती से चुनाव लड़ेगी, बल्कि 25000 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल करेगी। उन्होंने सरकार पर ओबीसी आरक्षण के मामले में भी अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए।

कांग्रेस को क्या मिलेगा फायदा?

अवधेश नायक का प्रचार में उतरना कांग्रेस के लिए एक संजीवनी की तरह है। दतिया के सियासी गलियारों में अवधेश नायक को एक जमीनी और अनुभवी नेता के तौर पर देखा जाता है। वे दतिया नगर पालिका के पार्षद भी रह चुके हैं और विधानसभा चुनाव का भी अनुभव रखते हैं। उनके पास अपना एक समर्पित समर्थक वर्ग है, जो उनकी बातों को महत्व देता है। जानकारों का मानना है कि उनका समर्थन मिलने से कांग्रेस के वोट बैंक में इजाफा होगा और घनश्याम सिंह की राह आसान हो सकती है।

अवधेश नायक का पक्ष और भाजपा की चुनौतियां

नाराजगी की खबरों के बीच खुद अवधेश नायक ने स्पष्ट किया है कि वे कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा कि उनकी भाजपा उम्मीदवार से मुलाकात केवल एक औपचारिक शिष्टाचार थी, क्योंकि वे छोटे भाई के समान हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे पूरी निष्ठा के साथ कांग्रेस का प्रचार करेंगे। दूसरी ओर, भाजपा के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा जैसे कद्दावर नेता का टिकट काटा है, जो दतिया से लगातार तीन बार विधायक रहे हैं। हालांकि नामांकन के समय नरोत्तम मिश्रा खुद आशुतोष तिवारी के साथ नजर आए थे, लेकिन उनके समर्थकों में पनपा असंतोष पार्टी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

निष्कर्ष और भविष्य की चुनावी तस्वीर

दतिया उपचुनाव के इस मुकाबले में अब दोनों ही दल अपनी पूरी ताकत के साथ चुनावी बिसात पर उतर चुके हैं। जहां एक तरफ कांग्रेस राजेंद्र भारती के परिवार को टिकट न मिलने से उपजी आंतरिक खींचतान को थामने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव वाले क्षेत्र में नई लीडरशिप को स्थापित करने की जद्दोजहद में जुटी है। आने वाला समय ही बताएगा कि मतदाताओं का मन किस ओर जाता है और किसकी चुनावी बिसात जीत का रास्ता तय करती है।

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