राहुल गांधी की नई भविष्यवाणी और INDIA गठबंधन में बढ़ता बिखराव

राहुल गांधी ने दावा किया है कि नरेंद्र मोदी एक साल के भीतर प्रधानमंत्री पद से हट जाएंगे, जबकि उधर DMK के बैठक बहिष्कार और आम आदमी पार्टी, TMC के अलग होने से INDIA गठबंधन टूटता दिख रहा है। साथ ही दिल्ली के होटल अग्निकांड में 21 मौतों के बाद अधिकारी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।

पहले भूकंप और फिर हाइड्रोजन बम फटने की बात कह चुके राहुल गांधी ने एक बार फिर नई भविष्यवाणी कर दी। उनका कहना है कि उन्हें लगता है कि नरेंद्र मोदी ज्यादा दिन तक प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नहीं रहेंगे और एक साल के भीतर उनकी सत्ता चली जाएगी। कांग्रेस के आदिवासी कार्यक्रम में राहुल ने ऐसी बातें कहीं जिन्हें सुनकर हंसी आ जाए। उन्होंने दावा किया कि अब बड़े-बड़े सरकारी अफसर ही उन्हें नरेंद्र मोदी, अमित शाह और अजित डोभाल के बारे में जानकारी पहुंचा रहे हैं।

राहुल का कहना था कि सरकार के भीतर भारी खींचतान चल रही है और देश में जल्द ही आर्थिक सुनामी आने वाली है, जिसके चलते मोदी इमरजेंसी तक लगा सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अपनी कुर्सी नहीं बचा पाएंगे। सच्चाई यह है कि हमारे देश में सरकार बदलने का फैसला जनता अपने वोट से करती है। हाल ही में बंगाल, केरल और तमिलनाडु में जनता ने जिसे चाहा, उसे हटा दिया। पर जो लोग मोदी को चुनाव में हरा नहीं पाते, वे चाहते हैं कि नौजवान सड़कों पर उतरें, आग लगाएं, दंगा कराएं और देश में अराजकता फैले। यह नकारात्मक सोच देश के लिए खतरनाक है।

जनता के सामने संविधान की प्रति लहराने वालों को कम से कम इतना तो मालूम होना चाहिए कि संविधान साफ कहता है — सरकार और सिस्टम बदलने का एकमात्र रास्ता चुनाव ही है। अब तो खुद कांग्रेस के लोग कहने लगे हैं कि मोदी के रहते BJP को चुनाव में हराया नहीं जा सकता और राहुल के रहते कांग्रेस को जिताया नहीं जा सकता। यही वजह है कि राहुल कभी भूकंप आने की बात करते हैं, तो कभी कहते हैं कि लोग मोदी को डंडे से मारेंगे और लिखकर ले लो, मोदी हार जाएंगे।

राहुल की असली मुश्किल यह है कि मोदी आज तक कोई चुनाव नहीं हारे और आने वाली 10 जून को नरेंद्र मोदी भारत में सबसे लंबे समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बना देंगे और नेहरू जी का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। जाहिर है, यह बात कुछ लोगों को हजम नहीं हो रही और इसका कोई इलाज भी नहीं है।

INDIA गठबंधन में बिखराव का सिलसिला

उधर, INDIA गठबंधन में टूट का दौर जारी है। DMK ने गुरुवार को ऐलान कर दिया कि वह 8 जून को दिल्ली में होने वाली INDIA alliance की बैठक का बहिष्कार करेगी। DMK ने कांग्रेस पर दगाबाजी का आरोप लगाया, क्योंकि राहुल गांधी ने DMK का साथ छोड़कर TVK के साथ जाने का फैसला किया।

अब DMK के सांसद लोकसभा में कांग्रेस से अलग बैठेंगे और पार्टी ने INDI Alliance छोड़ दिया है। इसका असर केंद्र की राजनीति पर बड़ा पड़ेगा। आम आदमी पार्टी पहले ही कांग्रेस से किनारा कर चुकी है, जबकि TMC ममता के हाथ से निकल चुकी है और तृणमूल के बागी सांसद INDI Alliance के साथ जाने वाले नहीं हैं। पिछले लोकसभा चुनाव के समय जो गठबंधन बड़े जोर-शोर से बना था और जिसकी शुरुआत नीतीश कुमार ने की थी, उसी नीतीश के साथ छोड़ने और गठबंधन तोड़ने से जो सिलसिला शुरू हुआ था, उसका अंजाम अब सबके सामने दिख रहा है।

दिल्ली का अग्निकांड और जिम्मेदारी से भागते अफसर

दिल्ली के एक होटल में लगी आग में 21 लोगों की जान जाने के बाद अब नगर निगम और राजस्व विभाग के अफसर जांच में जुट गए हैं। एक विभाग के अधिकारी दूसरे विभाग पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ रहे हैं। सबके मन में बस एक ही सवाल है कि 21 लोगों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है? नगर निगम के लोग दावा कर रहे हैं कि होटल में बिना अनुमति के निर्माण किया गया था, बिना परमिशन के कमरे बने थे, न फायर अलार्म था, न वेंटिलेशन का इंतजाम, खिड़कियां सील थीं और आने-जाने का सिर्फ एक ही रास्ता था।

अफसरों ने बताया कि होटल के पास फायर डिपार्टमेंट की NOC नहीं थी, लेकिन सवाल यह है कि यह सब जांचने की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी। इमारत सही ढंग से बनी है या नहीं, यह देखना MCD का काम है और फायर NOC फायर डिपार्टमेंट देता है, पर अब सारे अधिकारी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। दिल्ली नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार का कहना है कि MCD ने न तो आवासीय मकान में होटल चलाने का लाइसेंस दिया और न ही उनके पास फायर NOC की कोई फाइल आई, इसलिए यह उनकी जिम्मेदारी नहीं बनती। उन्होंने यह भी कहा कि इमारत गैरकानूनी नहीं है और पूरी गलती लाइसेंस देने वाले विभाग की है।

मालवीय नगर में आग की चपेट में आकर मरने वाले लोगों का आखिर क्या कसूर था? वे तो अपने किसी परिजन का इलाज कराने वहां आए थे, जो पास के अस्पताल में भर्ती थे। पिछले हफ्ते साकेत में एक इमारत गिरने से जिन लोगों की जान गई, उनका क्या गुनाह था? वे तो बेकसूर छात्र थे, जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे और पास के ढाबे में खाना खाने गए थे। कुछ महीने पहले मुखर्जी नगर के एक कोचिंग सेंटर में पानी भर जाने से छात्र डूबकर मर गए थे।

ऐसी न जाने कितनी घटनाएं हैं, जहां हर बार लापरवाही और लूट का आलम सामने आया। आज जिस तरह मालवीय नगर की घटना को लेकर नगर निगम और फायर डिपार्टमेंट ने अपनी जिम्मेदारी मानने से इनकार किया और एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे, वह बेहद शर्मनाक है। अब यह सरकार की जिम्मेदारी है कि जवाबदेही तय करे। चाहे पुलिस हो या अफसर, फायर डिपार्टमेंट हो या नगर निगम, सबको सबक सिखाया जाना चाहिए।

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