ग्रेटर नोएडा में 10 जून से इलेक्ट्रिक बस सेवा की शुरुआत होने जा रही है, जिसे लेकर शहरवासियों, उद्यमियों और सामाजिक संगठनों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। लंबे समय से बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की मांग कर रहे लोगों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि ई-बसों के चलने से जहां लोगों को किफायती और आरामदायक सफर का विकल्प मिलेगा, वहीं पर्यावरण की रक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि लोगों का मानना है कि यह पहल तभी पूरी तरह कामयाब होगी, जब बसों के रूट औद्योगिक इलाकों, अहम सेक्टरों और गांवों तक फैलाए जाएंगे।
शुरुआती चरण में चार प्रमुख रूट प्रस्तावित
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की योजना के मुताबिक, पहले चरण में चार मुख्य रूटों पर इलेक्ट्रिक बसें चलाने का प्रस्ताव है। पहला रूट ग्रेनो वेस्ट से चार मूर्ति चौक, सूरजपुर और वाया पाई-1 होते हुए नॉलेज पार्क तक रहेगा।
दूसरा रूट ग्रेनो वेस्ट से चार मूर्ति चौक, 130 मीटर रोड और तिलपता तक प्रस्तावित है, जिसका आगे चलकर नोएडा एयरपोर्ट तक विस्तार किया जा सकता है। तीसरा रूट 130 मीटर रोड, मकौड़ा रोटरी, एलजी चौक, नॉलेज पार्क और सेक्टर पी-7 से होते हुए नोएडा एयरपोर्ट तक जाएगा। चौथा रूट औद्योगिक सेक्टर ईकोटेक-16, तिलपता, स्वर्णनगरी, ओमीक्रॉन और जीबीयू से गुजरते हुए नोएडा एयरपोर्ट तक प्रस्तावित किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती दिनों में बसों का संचालन ट्रायल के तौर पर किया जाएगा और लोगों की जरूरतों के हिसाब से रूटों में फेरबदल या विस्तार किया जा सकता है।
लंबे समय से उठ रही थी मांग
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईईए) के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि औद्योगिक संगठनों की ओर से काफी समय से सार्वजनिक बस सेवा की मांग की जा रही थी। उन्होंने ई-बसों के संचालन को एक सकारात्मक और स्वागतयोग्य कदम बताया, लेकिन साथ ही जोड़ा कि इसके रूटों को और व्यावहारिक बनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि ईकोटेक-1, ईकोटेक-1 एक्सटेंशन और ईकोटेक-3 जैसे क्षेत्रों में बड़ी तादाद में उद्योग चल रहे हैं, जहां रोजाना हजारों कर्मचारी काम पर आते हैं। यदि बसों के रूट इन इलाकों से होकर गुजरें तो श्रमिकों और कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा।
मुख्य मार्गों को नेटवर्क से जोड़ने की दरकार
संजीव शर्मा के मुताबिक, बस सेवा को सिर्फ कुछ मुख्य मार्गों तक सीमित रखने के बजाय औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा, जेटा और पाई जैसे प्रमुख सेक्टरों को भी बस नेटवर्क से जोड़ने की जरूरत है। इससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों, छात्रों और आम नागरिकों को निजी वाहनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
महिलाओं की आवाजाही होगी आसान और सुरक्षित
अल्फा निवासी और उद्यमी महिपाल सिंह ने इलेक्ट्रिक बस सेवा को शहर के लिए बड़ी उपलब्धि करार दिया। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा लाभ श्रमिकों और निम्न आय वर्ग के लोगों को मिलेगा। सार्वजनिक परिवहन मजबूत होने से लोगों का समय और पैसा दोनों बचेगा।
महिपाल सिंह का मानना है कि महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से भी यह पहल बेहद अहम है। कई महिलाएं देर शाम सार्वजनिक परिवहन के सीमित विकल्पों के चलते परेशानी महसूस करती हैं। नियमित बस सेवा शुरू होने से उनकी आवाजाही आसान और सुरक्षित हो सकेगी।
प्रदूषण घटाने में मिलेगी मदद
पूर्व उद्योग आयुक्त और ग्रेटर नोएडा निवासी जीपी गोस्वामी ने कहा कि पर्यावरण की दृष्टि से इलेक्ट्रिक बसें शहर के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगी। उन्होंने कहा कि ग्रेटर नोएडा पहले से ही अपेक्षाकृत स्वच्छ और सुव्यवस्थित शहर है, लेकिन इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलने से प्रदूषण और कम होगा।
सरकार और प्राधिकरण की इस पहल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि बसों का संचालन केवल बाहरी मार्गों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सेक्टरों के भीतर और घनी आबादी वाले इलाकों में भी बसें चलनी चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस सुविधा का फायदा उठा सकें।
चार्जिंग ढांचे को मजबूत करने पर जोर
स्थानीय निवासी राहुल नंबरदार ने ई-बस सेवा की शुरुआत को सराहनीय बताते हुए कहा कि इसके साथ-साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि शहर में पर्याप्त संख्या में चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएं तो निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी।
प्राधिकरण की योजना के अनुसार, सेक्टर-90 स्थित नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के बस डिपो को ई-बसों के लिए तैयार किया जा रहा है। बस डिपो की मरम्मत और दूसरी सुविधाओं के विकास पर करीब 8.26 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
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