चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी हमले से उपजा तनाव
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी जंग अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड, जिसे CENTCOM के नाम से जाना जाता है, ने आधिकारिक दावा किया है कि उनकी सेना ने ईरान के चाबहार में स्थित शहीद कलंतरी पोर्ट के सर्विलांस टावर को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। इस घटना की पुष्टि स्वयं ईरान के सरकारी मीडिया द्वारा भी की गई है। इस कार्रवाई के बाद ईरान ने भी चुप्पी तोड़ते हुए खाड़ी क्षेत्र में स्थित कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और नौसैनिक परिसंपत्तियों को अपना निशाना बनाने की घोषणा की है। ईरान का दावा है कि उसने कतर, कुवैत, जॉर्डन, ओमान और सीरिया में अमेरिकी ठिकानों पर घातक हमले किए हैं।
अमेरिका ने क्यों बनाया चाबहार को अपना लक्ष्य
अमेरिकी सेना के लिए यह लगातार सातवीं ऐसी रात थी जब उसने ईरान पर हवाई हमले किए। CENTCOM के अनुसार, 16 जुलाई को की गई इस कार्रवाई में शहीद कलंतरी पोर्ट का वह सर्विलांस टावर ध्वस्त कर दिया गया, जो ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के समुद्री निगरानी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। अमेरिका का तर्क है कि इस टावर का उपयोग पिछले कई वर्षों से ओमान की खाड़ी और विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर नजर रखने और उन्हें बाधित करने के लिए किया जा रहा था। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया मंच X पर इस नष्ट किए गए टावर की तस्वीर साझा करते हुए स्पष्ट किया कि इस हमले का मुख्य उद्देश्य समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता को सुरक्षित करना है। अमेरिका का मानना है कि इससे ईरान की जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता कमजोर होगी।
ईरान का दावा, कई नागरिक ढांचों को पहुंचा नुकसान
भले ही ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने चाबहार के टावर के नष्ट होने की पुष्टि की हो, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बंदरगाह के मुख्य घाट, माल ढुलाई के उपकरण और अन्य परिचालन ढांचों को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है। सुरक्षा जांच के बाद वहां काम फिर से शुरू करने की कोशिशें की जा रही हैं। हालांकि, ईरान के प्रेस टीवी चैनल के अनुसार, अमेरिका के हमले केवल चाबहार तक सीमित नहीं रहे। गुरुवार देर रात से शुक्रवार सुबह के बीच हुए इन हमलों ने होर्मोज़गान, बुशेहर, सिस्तान-बलूचिस्तान, खुज़ेस्तान और लोरेस्तान प्रांतों के कई नागरिक ढांचों को बुरी तरह प्रभावित किया है।
हमलों में 38 लोगों की मौत और 400 से अधिक घायल
इस संघर्ष की मानवीय कीमत बेहद दुखद है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इन अमेरिकी हमलों में कम से कम 38 लोगों की मौत हो गई है, जबकि घायलों की संख्या 400 के पार पहुंच गई है। मृतकों में महिलाएं और एक नाबालिग बच्चा भी शामिल है। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। खमीर काउंटी के 6 पुलों के क्षतिग्रस्त होने से बंदर अब्बास, बंदर खमीर और अन्य आसपास के इलाकों के बीच सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है। कोहोरेस्तान गांव के पास दो पुलों, शोर नदी के पुल, तप्पे अल्लाह अकबर इलाका, बंदर अब्बास रेलवे जंक्शन और गिरीवेह ब्रिज जैसी महत्वपूर्ण संपत्तियां भी इन हमलों की चपेट में आई हैं।
ईरान का जोरदार पलटवार और 'ऑपरेशन लाइटनिंग'
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरानी सेना और IRGC ने बड़े पैमाने पर जवाबी सैन्य अभियानों की शुरुआत की है। ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB के मुताबिक, सेना के 'ऑपरेशन लाइटनिंग' के 13वें चरण में नौसेना ने उत्तरी हिंद महासागर में मौजूद एक अमेरिकी जहाज को निशाना बनाकर तट से समुद्र में मार करने वाली क्रूज मिसाइल छोड़ी। ईरान ने दावा किया है कि इस हमले के दबाव में अमेरिकी जहाज को पीछे हटना पड़ा और अमेरिकी सैनिकों के बीच खलबली मच गई। ईरान का यह भी कहना है कि उन्होंने कतर, कुवैत, जॉर्डन, ओमान और सीरिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
IRGC ने दावों में कहा- नष्ट किए कई अमेरिकी विमान
ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने 'ऑपरेशन नस्र-2' के 16वें चरण के तहत कतर स्थित अल उदैद एयर बेस को निशाना बनाया। उन्होंने दावा किया कि इस हमले में लंबी दूरी के रडार सिस्टम और अमेरिका के कई रणनीतिक हवाई ईंधन भरने वाले विमान नष्ट कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं, IRGC का यह भी कहना है कि 'ऑपरेशन नस्र-2' के 15वें चरण में कुवैत के ठिकानों पर हमला कर वहां तैनात HIMARS मिसाइल लॉन्चर और उनकी मिसाइलों को तबाह कर दिया गया। ड्रोन और मिसाइलों का उपयोग करके उन स्थानों पर भी हमला किया गया जहां अमेरिकी सैनिक मौजूद थे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण का दावा
ईरान का आक्रामक रुख जारी है। उन्होंने जॉर्डन में तैनात अमेरिकी लड़ाकू विमानों और हवाई ईंधन भरने वाले विमानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागने का दावा किया है। साथ ही, ओमान के घानेम क्षेत्र में अमेरिकी एयर कंट्रोल रडार और सलामेह रॉक्स के समुद्री नियंत्रण रडार को नष्ट करने की भी जानकारी दी। ईरान का दृढ़तापूर्वक कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अभी भी उनकी नौसेना का ही नियंत्रण बना हुआ है।
बंदी बनाने का दावा और अमेरिका का खंडन
तनाव उस समय और बढ़ गया जब IRGC ने एक और चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन नस्र-2' के 11वें चरण में सीरिया के अल-तनफ क्षेत्र में अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस कमांड सेंटर पर अचानक हमला कर उन्होंने रडार और हेलीकॉप्टर नष्ट कर दिए और कुछ अमेरिकी सैनिकों को पकड़ भी लिया है। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस दावे को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिका का कहना है कि अल-तनफ में न तो किसी सैनिक की मौत हुई है और न ही कोई बंदी बनाया गया है।
आगे की चिंता
ईरानी सेना ने 'ऑपरेशन लाइटनिंग' के 12वें चरण में अराश ड्रोन का उपयोग करके कुवैत में अमेरिकी रसद केंद्रों को निशाना बनाने की भी बात कही है। ईरान का साफ कहना है कि यह केवल जवाबी कार्रवाई है और यदि अमेरिका ने हमले नहीं रोके, तो यह सैन्य अभियान और तेज किया जाएगा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती यह भीषण जंग न केवल इन दोनों देशों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा पर गहरा पड़ रहा है।
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