आसमान में गायब हो जाने वाला ड्रोन
कल्पना कीजिए कि युद्ध के मैदान में या किसी संवेदनशील क्षेत्र में दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखने के लिए एक उपकरण आसमान में मौजूद है, लेकिन वह किसी को दिखाई नहीं देता। हवा में एक हल्की सी सरसराहट महसूस होती है और पलक झपकते ही वह साया गायब हो जाता है। यह किसी फिल्म या जादू का दृश्य नहीं है, बल्कि आधुनिक विज्ञान की एक नई और अद्भुत उपलब्धि है। अमेरिका की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने एक ऐसा ड्रोन विकसित किया है जो उड़ान भरते ही आंखों के सामने से ओझल हो जाता है। वैज्ञानिकों ने इसे मिस्टर इंडिया फिल्म के हीरो की तर्ज पर पूरी तरह से अदृश्य होने वाला ड्रोन बताया है। इस क्रांतिकारी तकनीक का विवरण रोबोटिक्स साइंस एंड सिस्टम्स कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत एक रिसर्च पेपर में दिया गया है, जिसका शीर्षक है ‘कम्प्यूटेशनल डिजाइन ऑफ ए लो-विजिबिलिटी यूएवी यूजिंग ह्यूमन-अलाइंड पर्सेप्चुअल मीट्रिक’ (Computational Design of a Low-Visibility UAV Using Human-Aligned Perceptual Metric)।
दिमाग को धोखा देने वाली तकनीक
आमतौर पर किसी ड्रोन को अदृश्य या कम दृश्यमान बनाने के लिए वैज्ञानिक पारदर्शिता प्रदान करने वाले पदार्थों, विशेष प्रकार के पेंट या लेंस का सहारा लेते रहे हैं। लेकिन ये तमाम प्रयास अब तक विफल साबित हुए हैं, क्योंकि पारदर्शी होने के बावजूद ड्रोन सूरज की रोशनी को रोकता है, जिससे जमीन पर उसकी परछाईं स्पष्ट रूप से नजर आती है। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने इस समस्या का समाधान किसी महंगे मैटेरियल में नहीं, बल्कि मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को समझने में ढूंढा है। इस ड्रोन का नाम फैंटम ट्विस्ट रखा गया है, जो मोशन ब्लर यानी गति के कारण होने वाले धुंधलेपन के सिद्धांत पर आधारित है।
इंसानी आंखों की सीमा का फायदा
पारंपरिक क्वाडकॉप्टर ड्रोन में उसका मुख्य ढांचा स्थिर रहता है और केवल पंख घूमते हैं, जिससे वह आसानी से दिखाई दे जाता है। इसके विपरीत, फैंटम ट्विस्ट एक सिंगल-मोटर एयरक्राफ्ट है। जब यह ड्रोन उड़ान भरता है, तो इसका प्रोपेलर एक दिशा में घूमता है, जबकि ड्रोन की मुख्य बॉडी विपरीत दिशा में 25 बार प्रति सेकेंड की रफ्तार से घूमने लगती है। इंसानी आंखें एक विशिष्ट शटर स्पीड वाले कैमरे की भांति काम करती हैं, जिन्हें किसी भी छवि को मस्तिष्क तक भेजने के लिए समय की आवश्यकता होती है। जब ड्रोन के पुर्जे इतनी तेज गति से घूमते हैं, तो इंसानी दिमाग उन हिस्सों को अलग-अलग पहचानने में असमर्थ हो जाता है। इस कारण यह ड्रोन पृष्ठभूमि की रोशनी में मिलकर पूरी तरह धुंधला हो जाता है। वैज्ञानिकों ने विशेष कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की सहायता से इसकी बैटरी, तारों और अन्य हिस्सों को अलग-अलग कोणों और ऊंचाइयों पर फिट किया है, जिससे यह आसमान में केवल रोशनी का एक सामान्य सा भ्रम प्रतीत होता है।
पर्यावरण और निगरानी में क्रांतिकारी बदलाव
इस लो-विजिबिलिटी ड्रोन का उपयोग भविष्य में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकता है:
- वन्यजीव संरक्षण: सामान्य ड्रोन की आवाज और आकार से पक्षी और जंगली जानवर अक्सर डरकर दूर भाग जाते हैं। यह अदृश्य ड्रोन बिना किसी खलल के संवेदनशील इकोसिस्टम और लुप्तप्राय जीवों की बारीकी से निगरानी कर सकेगा।
- शहरी बुनियादी ढांचे की देखभाल: घनी आबादी वाले इलाकों में स्थित पुलों, बिजली की लाइनों और ऊंची इमारतों की रूटीन चेकिंग के दौरान यह ड्रोन बिना लोगों का ध्यान आकर्षित किए अपना काम चुपचाप पूरा कर सकेगा।
आम ड्रोन से 10 गुना ज्यादा छुपा रुस्तम
नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के न्यूज सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, विजिबिलिटी मॉडल के आधार पर यह नया ड्रोन एक साधारण फोर-रोटर क्वाडकॉप्टर की तुलना में 10 गुना कम दिखाई देता है। हालांकि, शोधकर्ता इसे अभी और अधिक प्रभावी बनाने पर काम कर रहे हैं। वर्तमान में, इसके प्रोपेलर से बहुत हल्की सी आवाज आती है और बेहद करीब से देखने पर इसकी पतली रॉड्स नजर आ सकती हैं। आने वाले समय में वैज्ञानिक इसे और बेहतर बनाने के लिए विशेष साउंड-डैंपनिंग डिजाइन और पूरी तरह से ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक का उपयोग करने की योजना बना रहे हैं। यह तकनीक आने वाले वर्षों में वाइल्डलाइफ रिसर्च के साथ-साथ कंज्यूमर फोटोग्राफी के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव ला सकती है।
https://hindi.news18.com/world/america-invisible-drone-phantom-twist-uses-motion-blur-to-blend-into-the-sky-making-it-10x-less-visible-than-regular-drones-10667435.html