सबरामपुरा में विकास की हकीकत
राजधानी जयपुर के झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों विकास के दावों और जमीनी स्तर पर मौजूद हकीकत के बीच का बड़ा फासला चर्चा का विषय बना हुआ है। सबरामपुरा ग्राम पंचायत में फलोदी मेगा स्टेट हाईवे से गांव की ढाणियों को जोड़ने वाली महज 850 मीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य पिछले आठ महीनों से पूरी तरह से अधर में लटका हुआ है। इस स्थिति ने स्थानीय निवासियों के मन में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। सड़क के नाम पर जारी इस लंबे इंतजार ने सरकार और प्रशासन के विकास कार्यों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नवंबर 2025 में हुआ था शिलान्यास
इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना का शिलान्यास नवंबर 2025 में बड़े जोर-शोर और तमाम वादों के साथ किया गया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी और धूल व कीचड़ से निजात मिल जाएगी। हालांकि, जुलाई 2026 तक का समय बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। नतीजतन, हर रोज इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। कच्चे और उबड़-खाबड़ रास्ते के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है और लोगों का जीवन दूभर हो गया है।
धीमी रफ्तार पर ग्रामीणों का गुस्सा
जब जमीनी स्तर पर पड़ताल की गई, तो ग्रामीणों का गुस्सा साफ तौर पर देखने को मिला। स्थानीय लोगों का स्पष्ट रूप से मानना है कि निर्माण की गति इतनी धीमी है कि यह एक सोची-समझी लापरवाही का हिस्सा लगती है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित ठेकेदार केवल कागजों में काम जारी दिखाने के लिए महीने में एक-दो बार खानापूर्ति कर देता है। लोगों का कहना है कि यदि काम को पूरी ईमानदारी और निरंतरता के साथ किया जाए, तो 850 मीटर की सड़क को तैयार करने में महज एक से दो दिन का समय ही लगना चाहिए था, लेकिन इसे आठ महीने से जानबूझकर लटकाया जा रहा है।
भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप
सड़क की इस बदहाली को लेकर स्थानीय निवासियों ने सरपंच, वार्ड पंच, ठेकेदार और संबंधित विभागीय अधिकारियों पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इस निर्माण कार्य की निगरानी के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचता है। लोगों का आरोप है कि यदि इस सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का खेल नहीं होता, तो आज उन्हें इस नारकीय स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। ग्रामीणों का यह भी तर्क है कि झोटवाड़ा क्षेत्र से जो भी जनप्रतिनिधि चुनकर जाते हैं, वे अक्सर सरकार में कैबिनेट मंत्री बनते हैं, इसके बावजूद क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं का बुरा हाल है, जो जनता को अत्यधिक निराश कर रहा है।
मानसून ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुश्किलें
मौजूदा समय में हो रही बारिश के कारण ग्रामीणों की चिंताएं और भी ज्यादा बढ़ गई हैं। अधूरी पड़ी इस सड़क पर जगह-जगह पानी भर गया है, जिसके कारण पूरा मार्ग अब कीचड़ में बदल चुका है। यदि इस सड़क का निर्माण कार्य जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह से टूट जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि स्थिति बिगड़ने से पहले उन्हें इस मुसीबत से बाहर निकाला जाए।
प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें
इस पूरी समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार के समक्ष अपनी मांगें पुरजोर तरीके से रखी हैं:
- 850 मीटर की इस लंबित सड़क का निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर अविलंब पूरा किया जाए।
- इस पूरे प्रोजेक्ट की निष्पक्षता से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि अनियमितताओं का पता चल सके।
- यदि इस मामले में किसी भी स्तर पर वित्तीय लापरवाही या भ्रष्टाचार पाया जाता है, तो जिम्मेदार ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, सबरामपुरा की यह अधूरी सड़क क्षेत्र के विकास दावों की एक कड़वी तस्वीर बनकर रह गई है, जिसे देखकर स्थानीय लोग अपने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता को कोस रहे हैं।
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