पटना के मॉडल स्कूलों में शिक्षा की नई क्रांति
बिहार की राजधानी पटना के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले उन मेधावी विद्यार्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी है, जो डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देखते हैं लेकिन महंगी फीस के कारण पीछे रह जाते हैं। अब पटना के 10 चयनित मॉडल स्कूलों में जेईई और नीट की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निशुल्क कोचिंग की सुविधा शुरू कर दी गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत बीते गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा की गई। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बड़े संस्थानों के बराबर अवसर प्रदान करना है।
कंकड़बाग का स्कूल बना मिसाल
इस योजना के दायरे में आने वाले विद्यालयों में कंकड़बाग स्थित श्री रघुनाथ प्रसाद बालिका उच्च विद्यालय भी शामिल है। यहां कोचिंग शुरू होने के अगले ही दिन से नियमित कक्षाएं पूरी रफ्तार से चलने लगी हैं। स्कूल प्रशासन ने इस कोचिंग प्रोग्राम के लिए एक विशेष और आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम तैयार किया है। यहां रोजाना पढ़ाई के घंटों के अलावा तीन घंटे की अतिरिक्त स्पेशल क्लास आयोजित की जाती है। स्कूल की सामान्य पढ़ाई समाप्त होने के बाद शाम के समय इन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
मिल रही हैं तमाम आधुनिक सुविधाएं
इस निशुल्क कोचिंग व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए न केवल अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन मिल रहा है, बल्कि स्टडी मैटेरियल, किताबें, कॉपी, कलम और ड्रेस जैसी बुनियादी जरूरतें भी पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही हैं। कंकड़बाग स्कूल के प्रिंसिपल पुनेश्वर प्रसाद सिन्हा ने बताया कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति यानी बीएसईबी द्वारा इस कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है, जिससे इसकी गुणवत्ता और निरंतरता बनी रहे।
क्लास में डिजिटल बोर्ड और एसी का इंतजाम
प्रिंसिपल पुनेश्वर प्रसाद सिन्हा के अनुसार, छात्रों के लिए जो क्लासरूम तैयार किया गया है, वह किसी नामचीन निजी कोचिंग संस्थान से कम नहीं है। इस कमरे में एसी, आरामदायक बेंच-डेस्क, हाई-स्पीड वाई-फाई और डिजिटल बोर्ड जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। शिक्षक माइक्रोफोन का उपयोग करते हुए डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से पढ़ाते हैं, जिससे जटिल विषयों को समझना छात्रों के लिए बेहद आसान हो जाता है। शिक्षक पूरी तरह से प्रशिक्षित और अनुभवी हैं, जो छात्रों के हर छोटे-बड़े डाउट को क्लास में ही क्लियर करते हैं।
पहले ही दिन से छात्रों का उत्साह
कोचिंग के पहले दिन से ही छात्रों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। गुरुवार को जब पहली क्लास शुरू हुई, तो इसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ की कक्षाएं एक-एक घंटे के लिए आयोजित की गईं। इस दौरान शिक्षकों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया और विषयों की बारीकियों को समझाना शुरू किया। पहले दिन जहां 38 छात्राओं ने इस कोचिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था, वहीं शुक्रवार तक यह संख्या और बढ़ गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी बेहतर अवसर मिलने पर अपनी पूरी क्षमता दिखाने के लिए तैयार हैं।
महंगी कोचिंग की चिंता से मुक्ति
कक्षा 12वीं की छात्रा अंशु ने बताया कि पहले बड़े-बड़े कोचिंग संस्थानों की आलीशान इमारतों को देखकर ही मन में घबराहट होती थी और यह सोचकर डर लगता था कि उनका शुल्क कितना अधिक होगा। अंशु ने कहा, मेरा परिवार इतनी भारी फीस भरने में सक्षम नहीं था, इसलिए मैं ऑनलाइन पढ़ाई का सहारा ले रही थी, जिसमें कई तकनीकी दिक्कतें आती थीं। लेकिन अब सरकार द्वारा अपने ही स्कूल में यह सुविधा मिलने से मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है। उसने कहा कि डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना अब उसे सच के करीब लग रहा है।
कॉन्सेप्ट की गहराई पर जोर
अंशु ने अपनी पढ़ाई का अनुभव साझा करते हुए बताया कि यहाँ रटने के बजाय विषयों को समझने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने फिजिकल केमिस्ट्री के एटॉमिक स्ट्रक्चर टॉपिक का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षक हर विषय को बहुत ही गहराई से और तार्किक तरीके से समझाते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में रटने की जगह कॉन्सेप्ट की स्पष्टता बहुत मायने रखती है, और यहाँ का शिक्षण सत्र बिल्कुल इसी दिशा में काम कर रहा है। इसी तरह कक्षा 12वीं की पूजा कुमारी ने भी खुशी जाहिर की कि उनके पिता किसान हैं और इस निशुल्क सुविधा से उन्हें अपना भविष्य संवारने का मौका मिल रहा है।
भविष्य की योजनाएं
वर्तमान में यह कोचिंग कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध है। क्लास का समय दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित किया गया है। प्रिंसिपल ने आश्वासन दिया है कि यदि आने वाले समय में विद्यार्थियों की संख्या में और वृद्धि होती है, तो उनके लिए अलग-अलग बैचों का संचालन किया जाएगा। इस योजना ने उन विद्यार्थियों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है, जो संसाधन के अभाव में अपने सपनों को दबा देते थे। सरकार की यह पहल बिहार के शिक्षा जगत में एक सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
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