मोबाइल चोरी के बाद साइबर जालसाजों का खतरनाक खेल
आज के दौर में मोबाइल फोन केवल एक संचार का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारी निजी और बैंकिंग दुनिया का केंद्र बन चुका है। फोन खोना या चोरी होना अब केवल हार्डवेयर का नुकसान नहीं, बल्कि गंभीर साइबर सुरक्षा का खतरा भी बन गया है। पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान में एक ऐसी ही डरावनी घटना सामने आई है, जहां एक प्रसिद्ध डॉक्टर का आईफोन-16 चोरी होने के बाद उनके बैंक खातों से 1.45 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि निकाल ली गई। इस घटना ने आम जनता के बीच मोबाइल सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
एसएमएस से मिली धोखाधड़ी की जानकारी
पीड़ित चिकित्सक डॉ. सुब्रत भट्टाचार्य ने बताया कि उनके साथ यह वारदात तब हुई जब किसी ने उनका कीमती आईफोन-16 उड़ा लिया। 11 जून को उनके दूसरे मोबाइल नंबर पर जब संदेश आए, तो उन्हें पता चला कि उनके बैंक खातों में सेंध लग चुकी है। संदेशों के मुताबिक, अपराधियों ने आईसीआईसीआई बैंक के खाते से कुल चार बार में 1 लाख रुपये और एक्सिस बैंक के खाते से एक ही बार में 45 हजार रुपये की अवैध निकासी कर ली।
बैंक जानकारी का गलत इस्तेमाल
डॉक्टर भट्टाचार्य का स्पष्ट कहना है कि उन्होंने किसी भी प्रकार के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की न तो अनुमति दी थी और न ही कोई पहल की थी। उन्हें इस बात का पूरा संदेह है कि चोरों ने फोन हाथ लगते ही उसमें सुरक्षित मौजूद बैंकिंग ऐप और संवेदनशील जानकारी को डिकोड कर लिया और देखते ही देखते उनके खातों को खाली कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
इस साइबर अपराध के सामने आने के बाद दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट ने मामला दर्ज कर जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है। पुलिस की टीम अब तकनीकी सबूतों और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर साइबर अपराधियों की तलाश में जुटी है, ताकि इस गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके।
मोबाइल चोरी होने पर क्या करें
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल चोरी होने के बाद हर एक मिनट कीमती होता है। अपराधियों का मुख्य लक्ष्य पीड़ित के बैंक अकाउंट और यूपीआई ऐप तक पहुंच बनाना होता है। विशेषज्ञों ने सुरक्षा के लिए ये महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
- मोबाइल चोरी होते ही सबसे पहले अपने बैंक में संपर्क करें और अपने खातों को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक या होल्ड करवाएं।
- अपनी मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी से संपर्क करके अपने सिम कार्ड को तुरंत बंद करवाएं ताकि ओटीपी के जरिए होने वाले किसी भी फ्रॉड को रोका जा सके।
- अपने सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म के पासवर्ड को किसी अन्य सुरक्षित उपकरण से बदलें।
- जल्द से जल्द नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं ताकि घटना का आधिकारिक रिकॉर्ड बन सके।
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