धार भोजशाला परिसर: नमाज के लिए जगह को लेकर नया विवाद, मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने का किया ऐलान

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर के बाहर नमाज के लिए तय की गई जगह को लेकर मुस्लिम समाज और जिला प्रशासन में तनातनी बढ़ गई है। मुस्लिम पक्ष ने प्रशासन द्वारा आवंटित की गई दो किलोमीटर दूर की जगह को नकार दिया है और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

भोजशाला के बाहर नमाज के लिए नई जगह पर टकराव

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज की जगह को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में प्रशासन ने कोर्ट के आदेशों के पालन में एक अस्थायी व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय के लोगों को हर शुक्रवार को नमाज अदा करने के लिए परिसर के पास जमीन मुहैया कराई जानी है। हालांकि, प्रशासन द्वारा चुनी गई जमीन की दूरी को लेकर मुस्लिम पक्ष ने गहरी नाराजगी जाहिर की है। प्रशासन ने नमाज के लिए जो स्थान चिह्नित किया है, वह भोजशाला परिसर से करीब 2 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है, जिस पर मुस्लिम समाज ने आपत्ति जताई है।

प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के बीच हुई बैठक

इस पूरे मामले को सुलझाने के उद्देश्य से धार जिला प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस चर्चा के बाद प्रशासन ने घोषणा की कि हर शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज के लिए 'चालीस पीर' परिसर की जमीन का उपयोग किया जा सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि ग्राम मालीवाड़ा के सर्वे क्रमांक 664 की यह जमीन, जो 'चालीस पीर' के निकट स्थित है, नमाज के लिए सबसे उपयुक्त और नजदीक उपलब्ध विकल्प है। इस मामले में अगली अंतिम सुनवाई अब 5 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में निर्धारित की गई है, तब तक के लिए यह अस्थायी व्यवस्था प्रभावी रहेगी।

एडीएम ने दी स्पष्टीकरण

इस विषय पर पूछे गए सवालों के जवाब में धार के एडीएम ने स्पष्ट किया कि नमाज के लिए दी गई यह जगह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई के 300 मीटर के संरक्षित दायरे में नहीं आती है। एडीएम के अनुसार, प्रशासनिक रूप से उनके पास 300 मीटर के भीतर कोई अन्य भूमि उपलब्ध नहीं थी, इसलिए इस विकल्प को चुना गया। अधिकारी ने यह भी स्वीकार किया कि बैठक में अंतिम निर्णय लिए जाने और इसकी जानकारी मुस्लिम पक्ष तक पहुँचाने में समय लगा, इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो सका कि उस दिन नमाज संपन्न हो पाई या नहीं।

मुस्लिम पक्ष का कड़ा विरोध

मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के सदर अब्दुल समद ने प्रशासन के निर्णय पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए इसे कोर्ट के आदेशों की गलत व्याख्या करार दिया है। उन्होंने बताया कि अदालत ने स्पष्ट रूप से कमाल मौला मस्जिद के बगल में या उससे सटी हुई जगह पर नमाज की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था, वह भी 1 से 3 बजे के बीच। समद के अनुसार, कलेक्टर ने उन्हें घंटों इंतजार करवाया और अंत में जो जगह दी गई, वह मस्जिद से 2 किलोमीटर दूर 'चालीस पीर' दरगाह के पास है। उन्होंने तर्क दिया कि यह 700 वर्षों से चली आ रही परंपरा का अपमान है और मुस्लिम अधिकारों का हनन है। मुस्लिम पक्ष ने इसके विरोध में लिखित आपत्ति भी दर्ज कराई है।

अगली कानूनी लड़ाई की तैयारी

अब्दुल समद ने साफ कर दिया है कि मुस्लिम समाज 'चालीस पीर' दरगाह पर नमाज अदा नहीं करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी प्राथमिकता 'कमाल मौला मस्जिद' परिसर है, न कि कोई अन्य जगह। चूंकि कोर्ट ने परिसर के आंगन में अलग एंट्री और एग्जिट की व्यवस्था के साथ जगह देने की बात कही थी, इसलिए मुस्लिम समाज अब अपने सभी याचिकाकर्ताओं और वकीलों के साथ परामर्श करके इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। विवाद के चलते मौके पर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। एएसपी विजय डाबर ने जानकारी दी है कि कानून और शांति बनाए रखने के लिए मौके पर 300 पुलिसकर्मियों के बल को तैनात किया गया है।

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