राजनीति में शुचिता और अवसरवाद पर सवाल
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय अग्निमित्रा पॉल ने हाल ही में राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर अपनी बेबाक राय साझा की है। उन्होंने अभिनेत्री कोयल मलिक द्वारा तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने को लेकर गहरी नाराजगी और तंज व्यक्त किया है। अग्निमित्रा पॉल ने स्पष्ट रूप से कहा कि फिल्मी दुनिया और सक्रिय राजनीति के बीच एक संतुलन बनाना या स्पष्ट निर्णय लेना अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग एक साथ सिनेमा और राजनीति दोनों का लाभ उठाना चाहते हैं, जिसे जनता कभी स्वीकार नहीं करती। उनके अनुसार, बंगाल के लोग इस प्रकार के अवसरवादी रवैये को पूरी तरह से नकारते हैं, जहां सुविधा के अनुसार अपनी निष्ठा बदली जाती है।
शेर बनाम चूहे वाली टिप्पणी
तृणमूल कांग्रेस में अभिषेक बनर्जी को ममता बनर्जी द्वारा 'शेर' कहे जाने पर अग्निमित्रा पॉल ने तल्ख टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि शेर का वास्तविक ठिकाना तो जंगल होता है, समाज में ऐसे शब्दों का उपयोग करना उचित नहीं है। उन्होंने पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस पहले भी बीरभूम के नेता अनुब्रत मंडल को शेर बता चुकी है और अब वही सिलसिला अभिषेक बनर्जी के लिए दोहराया जा रहा है। अग्निमित्रा पॉल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि देश का कानून सर्वोपरि है और वह किसी के रसूख या पद को नहीं देखता। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिसने भी गलत काम किया है, उसका हिसाब किताब होकर रहेगा, चाहे वह खुद को शेर समझे या फिर चूहा।
मस्जिद विवाद और तुष्टिकरण का आरोप
कोलकाता एयरपोर्ट के भीतर बनी मस्जिद को हटाने के मुद्दे पर पूर्व मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी द्वारा किए जा रहे विरोध को भी अग्निमित्रा पॉल ने आड़े हाथों लिया है। उन्होंने इसे विकास के रास्ते में बाधा डालने वाली राजनीति करार दिया है। पॉल का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस ने लंबे समय तक राज्य के मुस्लिम समुदाय के बीच भाजपा को लेकर जो डर पैदा किया था, वह पूरी तरह निराधार साबित हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' के मंत्र पर विश्वास करती है, जहां धर्म के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं किया जाता।
विकास की राह में रोड़ा न बनने की अपील
अग्निमित्रा पॉल ने कोलकाता एयरपोर्ट के विस्तार और नई एयरस्ट्रिप के निर्माण का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना राज्य की प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है और इससे सभी धर्मों और समुदायों को समान रूप से फायदा पहुंचेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्दीकुल्लाह चौधरी जैसे नेता विकास को प्राथमिकता देने के बजाय धार्मिक धुव्रीकरण की राजनीति कर रहे हैं। वक्फ कानून को लेकर भी उन्होंने कहा कि पहले इसे लेकर समाज में काफी भ्रम फैलाया गया था, लेकिन अब मुस्लिम समाज धीरे-धीरे सच्चाई को समझ रहा है। अंत में उन्होंने दोहराया कि केंद्र की सरकार हर हिंदू, मुसलमान, ईसाई, जैन और बौद्ध के सर्वांगीण विकास के लिए समान रूप से संकल्पित है और कोई भी समुदाय इससे अछूता नहीं है।
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