बिहार के गया जिले से एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। जिले के फतेहपुर प्रखंड क्षेत्र में आने वाले गुरपा थाना अंतर्गत रंगून नगर में गुरुवार को एक बड़ा हादसा टल गया। यहां खेलते खेलते एक 3 साल का मासूम बच्चा अचानक 30 फीट गहरे खुले बोरवेल में जा गिरा। बच्चे का नाम पीयूष कुमार बताया गया है। जैसे ही ग्रामीणों को बच्चे के बोरवेल में गिरने की भनक लगी, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। घटनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और बच्चे के रोने की आवाज सुनकर परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था। ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए इसकी सूचना तुरंत पुलिस और स्थानीय प्रशासन को दी।
प्रशासनिक सक्रियता और मौके पर राहत कार्य
हादसे की सूचना मिलते ही गुरपा थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम तुरंत हरकत में आई और बचाव दल के साथ मौके पर पहुंच गई। जिला पदाधिकारी के निर्देश मिलते ही अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी और फतेहपुर थाना पुलिस घटनास्थल पर मुस्तैद हो गई। बोरवेल के अंदर बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सबसे पहले ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू की गई। प्रशासन ने तुरंत पाइप के जरिए बोरवेल के भीतर ऑक्सीजन पहुंचाई ताकि बच्चे को सांस लेने में कोई कठिनाई न हो।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना से NDRF की विशेषज्ञ टीम और SDRF की टीम को भी फौरन मौके पर बुलाया गया। बचाव दल ने वैज्ञानिक और तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल करते हुए राहत कार्य शुरू किया। चूंकि बोरवेल नीचे की ओर से काफी संकरा था, इसलिए बच्चे के दम घुटने का खतरा लगातार बना हुआ था। इस वजह से ऑक्सीजन की आपूर्ति को लगातार जारी रखा गया और बचाव कर्मी बहुत सावधानी से बच्चे तक पहुंचने की कोशिश में जुट गए।
मां की सूझबूझ और चॉकलेट का नुस्खा आया काम
इस बेहद संवेदनशील रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान NDRF की टीम के साथ बच्चे की मां ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बच्चे को बोरवेल के अंदर से ऑक्सीजन पाइप पकड़ने के लिए राजी करना एक बड़ी चुनौती थी। ऐसे में उसकी मां ने सूझबूझ दिखाई और बच्चे को पुचकारते हुए कहा कि अगर वह पाइप पकड़ेगा तो उसे चॉकलेट दी जाएगी। मां की आवाज और चॉकलेट का लालच काम कर गया और मासूम ने पाइप को कसकर पकड़ लिया। इसके बाद बचाव दल के लिए बच्चे को धीरे-धीरे ऊपर खींचना आसान हो गया।
7 घंटे की कड़ी मशक्कत और सफल रेस्क्यू
प्रशासन, आपदा राहत बल और स्थानीय ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों से यह बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन आखिरकार सफल रहा। लगभग 7 घंटे की सांसें थाम देने वाली मशक्कत के बाद मासूम पीयूष को सुरक्षित और सकुशल बोरवेल से बाहर निकाल लिया गया। जैसे ही बच्चा बाहर आया, वहां मौजूद लोगों और परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े और सभी ने राहत की सांस ली। परिजनों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने जिला प्रशासन, NDRF, SDRF तथा रेस्क्यू टीम के सभी सदस्यों का हृदय से आभार जताया।
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