छत्तीसगढ़ की पारंपरिक फिश करी रेसिपी: बारिश के मौसम में ऐसे बनाएं देसी मछली की सब्जी

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में बारिश के दौरान मिलने वाली छोटी मछलियों से बनने वाली यह पारंपरिक रेसिपी अपने अनोखे खट्टे स्वाद के लिए जानी जाती है। गरमा-गरम भात के साथ इसका आनंद लेना मानसून का एक खास अनुभव है।

बारिश में छत्तीसगढ़ का खास स्वाद

छत्तीसगढ़ में, विशेषकर बिलासपुर जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में, मानसून का आगमन पारंपरिक व्यंजनों के लिए नई सौगात लाता है। बारिश के मौसम में नदियों और तालाबों का जलस्तर बढ़ने से खेतों में पानी भर जाता है, जिससे कोतरी, लपची और टेंगना जैसी छोटी और ताजी मछलियां आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। ग्रामीण अंचल में इन मछलियों से तैयार होने वाली मिक्स सब्जी का स्वाद बेहद लाजवाब माना जाता है।

तैयारी की विधि

इस पारंपरिक व्यंजन को बनाने के लिए सबसे पहले मछलियों को साफ करना बहुत जरूरी है। सफाई के बाद इन मछलियों पर नमक और हल्दी लगाकर कुछ देर के लिए अलग रख दिया जाता है। इसके पश्चात, कड़ाही में तेल गरम करके मछलियों को तब तक तला जाता है जब तक कि वे सुनहरी और कुरकुरी न हो जाएं।

मसाले और तड़के का जादू

सब्जी को स्वादिष्ट बनाने के लिए एक अलग कड़ाही में तेल गरम करके उसमें जीरा, हरी मिर्च और आमा खोईला यानी अमचूर का तड़का लगाया जाता है। यह आमा खोईला ही इस व्यंजन को एक विशिष्ट खट्टापन और गहरा स्वाद प्रदान करता है। इसके बाद इसमें कटे हुए टमाटर, कसूरी मेथी, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, नमक और गरम मसाला मिलाकर मसाले को तेल छोड़ने तक अच्छी तरह भूना जाता है।

परोसने का तरीका

जब मसाला तैयार हो जाए, तब इसमें आवश्यकतानुसार पानी डालें और तली हुई मछलियों को कड़ाही में डाल दें। इसे धीमी आंच पर 5 से 7 मिनट तक पकने दें। यह पारंपरिक छत्तीसगढ़िया व्यंजन तैयार होने के बाद गरमा-गरम भात के साथ परोसा जाता है। मानसून के दौरान छत्तीसगढ़ के हर घर में यह डिश काफी लोकप्रिय है।

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