मिशन सुदर्शन चक्र और भारत का अभेद्य हवाई किला
भारत अपने हवाई क्षेत्र को एक ऐसे अभेद्य किले में बदलने की राह पर है, जिसे भेदना किसी भी दुश्मन देश के लिए असंभव होगा। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 'मिशन सुदर्शन चक्र' की शुरुआत की गई है, जिसे वर्ष 2035 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम तैयार करना है, जो विदेशी और स्वदेशी तकनीक के अनूठे मिश्रण से बना हो। हाल ही में इस दिशा में एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है, जिसने भारतीय वायु सेना की ताकत में कई गुना इजाफा कर दिया है।
S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की ताकत
इक्कीसवीं सदी के आधुनिक युद्धों में केवल आक्रामक क्षमता का होना ही काफी नहीं है, बल्कि रक्षात्मक शक्ति भी उतनी ही अनिवार्य है। रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे सैन्य संघर्षों ने पूरी दुनिया को यह सिखा दिया है कि आधुनिक दौर के युद्ध में जिस देश के पास बेहतर फायर-पावर है, वही अधिक प्रभावी साबित होता है। इन संघर्षों में फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइलों का जिस तरह से उपयोग किया गया है, उसने एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका को सर्वोपरि बना दिया है। यदि इजरायल या अरब देशों के पास उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम नहीं होता, तो हालिया हमलों में उन्हें कहीं अधिक नुकसान उठाना पड़ता। भारत भी इन अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से सीख लेते हुए अपनी रक्षा प्रणालियों पर हजारों करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है।
5 अतिरिक्त स्क्वाड्रन को मंजूरी
भारत ने अपनी हवाई रक्षा क्षमता को और मजबूती देने के लिए रूस निर्मित S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम के 5 अतिरिक्त स्क्वाड्रन खरीदने के प्रस्ताव को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) में मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (AoN) को हरी झंडी दी गई। इस निर्णय के बाद भारत में S-400 स्क्वाड्रन की कुल संख्या 10 हो जाएगी, जिससे चीन और पाकिस्तान की ओर से होने वाले किसी भी संभावित हवाई हमले को प्रभावी तरीके से नाकाम किया जा सकेगा। भारत अब रूस के बाहर दुनिया में S-400 प्रणाली का सबसे बड़ा ऑपरेटर बनने की दिशा में आगे बढ़ चुका है।
बजट और खरीद की रूपरेखा
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह खरीद लगभग 2.38 लाख करोड़ रुपये के एक विशाल रक्षा आधुनिकीकरण पैकेज का अहम हिस्सा है। इस कुल राशि में से अकेले S-400 सिस्टम के लिए 50 हजार करोड़ से लेकर 1 लाख करोड़ रुपये तक खर्च होने का अनुमान है। याद रहे कि भारत ने अक्टूबर 2018 में लगभग 39 हजार करोड़ रुपये का सौदा करके 5 स्क्वाड्रन लेने का निर्णय लिया था। इनमें से 3 स्क्वाड्रन पहले से ही सक्रिय हैं, चौथी स्क्वाड्रन इसी वर्ष प्राप्त हो चुकी है, जबकि पांचवीं स्क्वाड्रन इस साल के अंत तक मिलने की उम्मीद है। नए ऑर्डर के तहत मिलने वाले अतिरिक्त 5 स्क्वाड्रन की आपूर्ति 2028 से शुरू होकर 2035 तक पूरी होने की संभावना है।
ऑपरेशन सिंदूर और S-400 का प्रदर्शन
मई 2025 में संचालित 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान S-400 सिस्टम ने अपनी मारक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया था। रक्षा सूत्रों का कहना है कि इस प्रणाली ने 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर मौजूद पाकिस्तानी निगरानी विमान को सटीक रूप से ट्रैक और निशाना बनाया था, जिसके बाद दुश्मन के लड़ाकू विमानों को अपनी सीमा में वापस लौटना पड़ा। इस अनुभव ने भारतीय वायु रक्षा रणनीति में S-400 को और अधिक विश्वसनीय बना दिया है।
S-400 की तकनीकी विशेषताएं
इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बहुस्तरीय मिसाइल क्षमता है, जो हर तरह के खतरे से निपटने में सक्षम है:
- 40N6E मिसाइल: यह 400 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता रखती है।
- 48N6 मिसाइल: लड़ाकू विमानों और बैलिस्टिक मिसाइलों को निशाना बनाने के लिए उपयुक्त।
- 9M96E2 मिसाइल: स्टील्थ विमानों और क्रूज मिसाइलों को नष्ट करने में माहिर।
- 9M96E मिसाइल: ड्रोन और अन्य सटीक हथियारों (प्रिसिजन गाइडेड वेपन्स) के खिलाफ बेहद प्रभावी।
प्रत्येक स्क्वाड्रन में एक कमांड एवं कंट्रोल यूनिट, अत्याधुनिक रडार और लॉन्चर सहित कुल 16 वाहन शामिल होते हैं। एक स्क्वाड्रन को दो बैटरियों में विभाजित किया जा सकता है और यह एक साथ 128 मिसाइलों को तैनात करने की क्षमता रखता है।
वायु सेना का आधुनिकीकरण
S-400 सिस्टम को इंडियन एयरफोर्स के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे बड़े पैमाने पर हवाई हमलों के दौरान लक्ष्यों को सटीकता से इंटरसेप्ट किया जा सकेगा। भविष्य में इसे डीआरडीओ के स्वदेशी 'प्रोजेक्ट कुश' के साथ भी जोड़ा जाएगा, जिससे 400 किलोमीटर तक स्वदेशी इंटरसेप्टर क्षमता विकसित होगी। इसके अलावा 2.38 लाख करोड़ रुपये के पैकेज में 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट जेट, 4 स्क्वाड्रन रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट, 300 धनुष तोप, Su-30MKI इंजनों का अपग्रेड और 'आकाशतीर' नेटवर्क जैसे अनेक प्रोजेक्ट शामिल हैं।
रणनीतिक तैनाती
रणनीतिक महत्व को देखते हुए S-400 की तैनाती पहले ही सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक), पठानकोट, राजस्थान और गुजरात के संवेदनशील इलाकों में की जा चुकी है। आने वाली नई स्क्वाड्रन को पाकिस्तान और चीन के दोहरे खतरे को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण सीमाओं पर तैनात किया जाएगा। 'मिशन सुदर्शन चक्र' का अंतिम लक्ष्य वर्ष 2035 तक पूरे देश के सैन्य ठिकानों, सामरिक संपत्तियों और नागरिक प्रतिष्ठानों के लिए एक अभेद्य राष्ट्रीय हवाई कवच तैयार करना है।
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