सर क्रीक पर भारत का अभेद्य चक्रव्यूह: 11 स्वदेशी एम्फिबियस बोट्स से पाकिस्तान में खलबली

भारतीय रक्षा मंत्रालय ने सर क्रीक सेक्टर की सुरक्षा चाक-चौबंद करने के लिए 11 स्वदेशी हाई-स्पीड एम्फिबियस कॉम्बैट बोट्स की खरीद को मंजूरी दे दी है, जिससे पाकिस्तान की नापाक गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।

सीमा पर नया सुरक्षा कवच

कच्छ के रण और दलदली इलाकों में भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने और देश की संप्रभुता को चुनौती देने वाले दुश्मनों का सफाया करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक बेहद मजबूत और अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार कर लिया है। भारत और पाकिस्तान की सीमा पर स्थित सामरिक रूप से संवेदनशील सर क्रीक क्षेत्र में किसी भी प्रकार की नापाक हरकत को जड़ से मिटाने के लिए सरकार ने 11 स्वदेशी, हाई-स्पीड एम्फिबियस कॉम्बैट बोट्स (जल और थल दोनों पर चलने में सक्षम लड़ाकू नौकाओं) की खरीद प्रक्रिया को हरी झंडी दिखा दी है। यह कदम न केवल रक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि दुश्मन के लिए एक कड़ा संदेश भी है।

पाकिस्तान को कड़ा जवाब

यह आक्रामक सैन्य रणनीति पाकिस्तान की उस कायरतापूर्ण हरकत का सीधा और करारा जवाब मानी जा रही है, जिसमें पाकिस्तानी सेना ने ड्रोन के जरिए भारतीय बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का दुस्साहस किया था। खुफिया रिपोर्टों से यह बात भी सामने आई है कि पाकिस्तान इस विवादित दलदली इलाके में अपने सैनिकों की संख्या और सैन्य बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार कर रहा है। इन बढ़ते खतरों को देखते हुए भारत ने अपनी मारक क्षमता और निगरानी तंत्र को दोगुना करते हुए इन आधुनिक लड़ाकू नौकाओं को तैनात करने का निर्णय लिया है।

सर क्रीक विवाद की पृष्ठभूमि

साल 1947 में विभाजन के समय से ही सर क्रीक का क्षेत्र भारत और पाकिस्तान के बीच एक लंबे समय से चला आ रहा विवाद का बिंदु रहा है। सिंध का क्षेत्र पाकिस्तान को मिला और गुजरात भारत का हिस्सा बना, लेकिन सर क्रीक का मामला आज भी एक सुलझी हुई पहेली की तरह है। यद्यपि 1968 में ट्रिब्यूनल अवॉर्ड ने कच्छ के अधिकांश सीमा विवादों को हल कर दिया था, लेकिन सर क्रीक का मुहाना आज भी अनसुलझा है। इस विवाद की मुख्य जड़ 1914 के एक पुराने प्रस्ताव की व्याख्या में निहित है।

पाकिस्तान इस पूरे क्रीक पर अपना अधिकार जताते हुए पूर्वी तट को सीमा मानता है। इसके विपरीत, भारत थलवेग सिद्धांत (Thalweg Principle) का समर्थन करता है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, इस सिद्धांत का अर्थ है कि सीमा नौगम्य चैनल के बिल्कुल मध्य से निर्धारित होनी चाहिए। पाकिस्तान इसे यह कहकर नकारता है कि यह एक ज्वारीय मुहाना है और नदी नहीं। हालांकि, भारत ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि ऐतिहासिक नक्शे और बाउंड्री मार्कर ही देश की सीमाओं की सुरक्षा का आधार हैं और उनके साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

वैश्विक सैन्य शक्तियों के समकक्ष भारत

इन हाई-स्पीड एम्फिबियस बोट्स को शामिल करके भारत ने विश्व की प्रमुख सैन्य महाशक्तियों के क्लब में अपनी जगह और भी मजबूत कर ली है। वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे शक्तिशाली देश अपनी तटीय सुरक्षा और नदी डेल्टाओं के प्रबंधन के लिए इसी तरह की उन्नत तकनीक और लड़ाकू नौकाओं का उपयोग करते हैं। यहां तक कि पाकिस्तान भी तटीय सुरक्षा के लिए इन क्षमताओं का प्रयोग करता रहा है।

सुरक्षा का नया युग

इन 11 स्वदेशी बोट्स की तैनाती के बाद सर क्रीक के पूरे भौगोलिक क्षेत्र पर भारत का पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो जाएगा। यह दलदली और कठिन इलाका, जो पहले घुसपैठ के लिए एक सुरक्षित रास्ता माना जाता था, अब भारतीय सुरक्षा बलों के लिए एक घातक घेरा बन जाएगा। अब इस क्षेत्र में घुसपैठ करने वाले किसी भी पाकिस्तानी सैनिक या आतंकी के लिए मौत निश्चित होगी। यह तैनाती न केवल सर क्रीक की रक्षा करेगी, बल्कि भारतीय सेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को भी कई गुना बढ़ा देगी।

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