बीजेपी का कांग्रेस पर तीखा प्रहार
विपक्ष के उस कुनबे को एकजुट रखने में उसका शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह से विफल साबित हुआ है, जिसे इंडिया गठबंधन के नाम से जाना जाता है। अब जब यह समूह बिखरता नजर आ रहा है, तो इसका ठीकरा सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के सिर फोड़ने की कांग्रेस की कवायद पर भाजपा ने बेहद कड़ा और आक्रामक पलटवार किया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर विपक्षी दलों को तोड़ने और संसद में संदिग्ध रूप से दो-तिहाई बहुमत जुटाने का जो आरोप लगाया था, उसे भाजपा ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
जयराम रमेश के आरोपों पर भाजपा का रुख
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि केंद्रीय गृह मंत्री ने विपक्ष की पार्टियों को तोड़ने का काम किया है। उनका दावा था कि भाजपा चालाकी से संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश में है। रमेश ने इसे संविधान का अपमान और लोकतंत्र पर एक धब्बा करार दिया था। इस बयान के जवाब में भाजपा ने मोर्चा खोलते हुए स्पष्ट किया कि इंडिया गठबंधन अपने ही कर्मों और नेतृत्व की अक्षमता के बोझ तले दबा हुआ है, जिसके कारण वह स्वतः ही बिखर रहा है।
सुधांशु त्रिवेदी ने पूछे तीखे सवाल
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि तथाकथित इंडिया गठबंधन की नींव ही अंतर्विरोधों, घोर हताशा और सत्ता पाने की लालसा पर रखी गई थी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति अपनी ईर्ष्या और हताशा के कारण यह गठबंधन खड़ा किया था। त्रिवेदी ने कांग्रेस से सीधे सवाल करते हुए पूछा कि क्या इंडिया गठबंधन का वास्तव में कोई धरातलीय अस्तित्व है? उन्होंने चुनौती दी कि क्या कांग्रेस ने कभी लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति को लिखित में यह जानकारी दी है कि इंडिया गठबंधन के सदस्य दल कौन से हैं? साथ ही, क्या इन सभी दलों ने मिलकर किसी एक व्यक्ति को अपना सर्वसम्मत नेता चुना है?
सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा कि अगर ऐसा कोई औपचारिक स्वरूप है ही नहीं, तो जिस चीज का कोई वास्तविक वजूद नहीं है, उसके बिखरने का दोष दूसरों पर मढ़कर अपनी नाकामियों को छिपाने की निरर्थक कोशिश कांग्रेस को बंद करनी चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि कांग्रेस को किसी दूसरे पर उंगली उठाने के बजाय आत्मचिंतन करना चाहिए। उनके अनुसार, गठबंधन में शामिल दल एक-दूसरे पर भरोसा तक नहीं करते हैं।
दल-बदल रोधी कानून और लोकतांत्रिक प्रक्रिया
भाजपा के प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने जयराम रमेश के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि राजनीतिक क्षेत्र में होने वाले सभी बदलाव दल-बदल रोधी कानून के दायरे में हैं और पूरी तरह से कानूनी हैं। सिन्हा ने कहा कि जो नेता विपक्ष से अलग होकर भाजपा में शामिल हो रहे हैं, वे अपनी मर्जी से आ रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि दल-बदल रोधी कानून के सभी प्रावधानों का पूरा सम्मान किया जा रहा है।
तुहिन सिन्हा ने तर्क दिया कि अगर तृणमूल कांग्रेस के 22 सदस्य अलग होकर अपनी नई राह चुनते हैं या उद्धव ठाकरे की पार्टी विभाजित होकर कहीं और मिलती है, तो इसमें भाजपा का कोई दोष नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कभी कांग्रेस के पास संख्या बल हुआ करता था, लेकिन आज भाजपा के पास है। यह कहना कि यह संख्या गैर-कानूनी तरीके से जुटाई गई है, सिर्फ कांग्रेस की हताशा का प्रदर्शन है।
परिसीमन पर कांग्रेस की सोच पर सवाल
परिसीमन के मुद्दे पर भी भाजपा ने कांग्रेस की मानसिकता को निशाने पर लिया। तुहिन सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस परिसीमन का विरोध इसलिए कर रही है क्योंकि उन्हें डर है कि इससे राजनीतिक परिवारों का दबदबा कम हो जाएगा। उन्होंने जयराम रमेश के विरोध को कांग्रेस की विशेषाधिकार वाली सोच का परिचायक बताया और पार्टी को युवा-विरोधी तथा महिला-विरोधी करार दिया। भाजपा का मानना है कि परिसीमन की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है और इसके लागू होने से राजनीति में नए लोगों के लिए व्यापक अवसर पैदा होंगे, जिससे लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा।
https://hindi.news18.com/news/nation/india-alliance-crumbling-due-to-its-own-actions-bjp-hits-back-at-congress-10664573.html