राजस्थान के असली डॉक्टर ने पकड़ा फर्जीवाड़ा, भतीजे की पहचान का इस्तेमाल कर चाचा ने तीन जिलों में की नौकरी

मध्य प्रदेश में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहां एक व्यक्ति अपने ही भतीजे के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सालों तक सरकारी डॉक्टर बना रहा और वेतन उठाता रहा। स्वास्थ्य मंत्री ने इस पर सख्त कदम उठाते हुए दोषी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

फर्जी डॉक्टर का हैरान कर देने वाला कारनामा

मध्य प्रदेश में फर्जीवाड़े का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहडोल से सामने आया यह फर्जी डॉक्टर कांड अब प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी घोटालों में गिना जा रहा है। एक व्यक्ति ने अपने ही भतीजे की पहचान और शैक्षणिक दस्तावेजों का इस्तेमाल करके लंबे समय तक डॉक्टर बनकर सरकारी नौकरी की। मामले का खुलासा तब हुआ जब असली डॉक्टर ने खुद सामने आकर शिकायत दर्ज कराई।

राजस्थान से पहुंची शिकायत

इस पूरे मामले का पटाक्षेप तब हुआ जब राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले असली डॉ. महेश चंद्र शर्मा शहडोल पहुंचे। उन्होंने जयसिंहनगर पुलिस थाने में शिकायत दी कि वह खुद राजस्थान के डींग जिले में मेडिकल ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन उनके नाम और डिग्रियों का इस्तेमाल करके कोई दूसरा व्यक्ति मध्य प्रदेश में डॉक्टर की नौकरी कर रहा है। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी कोई और नहीं बल्कि पीड़ित के रिश्ते के चाचा सतीश शर्मा हैं। सतीश शर्मा ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे न केवल नौकरी हासिल की, बल्कि वे शहडोल, श्योपुर और खरगोन जैसे तीन अलग-अलग जिलों में पदस्थ रहे। यह अपने आप में बड़ा सवाल है कि प्रशासनिक तंत्र की आंखों में धूल झोंककर एक व्यक्ति तीन जगहों पर कैसे नौकरी करता रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी।

स्वास्थ्य मंत्री का कड़ा रुख

इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्री ने साफ कहा है कि इस तरह के फर्जीवाड़े विभाग के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया के कारण पकड़ में आ रहे हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। सरकार के एक्शन प्लान में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  • फर्जी डॉक्टर के खिलाफ तत्काल प्रभाव से FIR दर्ज की जाएगी।
  • दोषी की सेवा तुरंत समाप्त (टर्मिनेशन) कर दी जाएगी।
  • नौकरी के दौरान लिए गए पूरे वेतन की वसूली की जाएगी।
  • जिन ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की लापरवाही से यह फर्जीवाड़ा हुआ, उन पर भी सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई

शहडोल के नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि राजस्थान से प्राप्त शिकायत और सभी संबंधित पक्षों के बयानों को आधार बनाकर मामले की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार कानूनन कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल, पूरे मध्य प्रदेश की नजर इस बात पर टिकी है कि इस पूरे कांड में स्वास्थ्य विभाग के किन-किन जिम्मेदारों पर गाज गिरती है और यह जाल कहां तक फैला हुआ है। प्रशासन इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि आखिर तीन जिलों में पदस्थापना और भुगतान की प्रक्रिया में चूक कहां हुई।

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