बारिश में टमाटर की खेती से बढ़ाएं मुनाफा, इन आसान तरीकों से होगी बंपर पैदावार

बरसात के मौसम में टमाटर की खेती के लिए सही देखभाल और पोषण बहुत जरूरी है, जिससे किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं।

बारिश में टमाटर की खेती के टिप्स

बरसात का मौसम टमाटर की फसल के लिए काफी अच्छा माना जाता है, लेकिन यह समय पौधों के लिए चुनौतीपूर्ण भी होता है। जमुई जिले के प्रगतिशील किसान निरंजन कुमार का मानना है कि यदि इस दौरान सही प्रबंधन और देखभाल की जाए, तो टमाटर की पैदावार को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। बारिश के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी पूरी फसल को बर्बाद कर सकती है। इसलिए किसानों को पौधों के पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

पौधों की छंटाई और सफाई

निरंजन कुमार के अनुसार, बारिश के दौरान सबसे महत्वपूर्ण काम पौधों की सही देखभाल है। उन्होंने बताया कि बारिश शुरू होते ही पौधों की सूखी, पीली और जमीन को छू रही पत्तियों को तुरंत हटा देना चाहिए। पत्तियों का जमीन को छूना फफूंद जनित बीमारियों का मुख्य कारण बनता है। इन पत्तियों को हटाने से पौधों के आसपास हवा का आवागमन बेहतर होता है, जिससे नमी के कारण होने वाले रोगों का खतरा काफी कम हो जाता है। इसके अलावा, टमाटर के पौधों में निकलने वाली अतिरिक्त टहनियों की समय पर छंटाई करते रहना चाहिए। ऐसा करने से पौधों की ऊर्जा फालतू टहनियों में नहीं, बल्कि फलों को बड़ा और चमकदार बनाने में खर्च होती है।

जल निकासी का महत्व

मानसून के सीजन में खेत में जल निकासी की व्यवस्था सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। टमाटर की जड़ें बहुत संवेदनशील होती हैं और यदि खेत में पानी जमा रहता है, तो पौधों में सड़न की समस्या पैदा हो जाती है। लगातार नमी रहने से जड़ें कमजोर हो जाती हैं और अंत में पौधा नष्ट हो सकता है। इसलिए किसानों को सुनिश्चित करना चाहिए कि खेत से अतिरिक्त पानी बाहर निकलता रहे और मिट्टी में बहुत ज्यादा समय तक दलदल जैसी स्थिति न बनी रहे।

फूल आने पर पोषण और देखभाल

जब टमाटर के पौधों में फूल आने शुरू हो जाएं, तो उन्हें अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। निरंजन कुमार का सुझाव है कि इस अवस्था में खेतों में जैविक खाद का भरपूर उपयोग करना चाहिए। जैविक खाद से टमाटर के फलों का आकार बढ़ता है, उनका रंग गहरा होता है और गुणवत्ता में सुधार आता है। पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए खरपतवार पर नियंत्रण रखना भी जरूरी है। यदि खेत साफ रहेगा और पौधों को संतुलित पोषण मिलेगा, तो फसल किसी भी प्रकार के संक्रमण से लड़ने में सक्षम होगी।

रोगों की पहचान और निवारण

बारिश के मौसम में पत्तियों पर धब्बे, पीलापन या सड़न के शुरुआती लक्षण दिखना आम बात है। किसान को प्रतिदिन खेत का निरीक्षण करना चाहिए ताकि बीमारी की पहचान तुरंत हो सके। यदि बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो सही उपचार समय पर करना चाहिए ताकि वह पूरी फसल में न फैले। अगर मानसून के पूरे सीजन में इन सरल लेकिन प्रभावी उपायों को अपनाया जाए, तो टमाटर की बंपर पैदावार निश्चित है, जो किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।

https://hindi.news18.com/news/agriculture/tomato-farming-techniques-tips-and-tricks-agri-tips-local18-ws-l-10664468.html