बेगूसराय में खेती में नया बदलाव: ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल पर किसानों को मिलेगी 50 फीसदी सब्सिडी

बेगूसराय जिले में खेती को आधुनिक बनाने के लिए नई ड्रोन योजना शुरू की गई है, जिसके तहत कीटनाशकों और उर्वरकों के छिड़काव पर किसानों को 50 प्रतिशत तक का सरकारी अनुदान दिया जाएगा।

बेगूसराय में खेती के लिए नई पहल

बिहार के बेगूसराय जिले के किसानों के लिए खेती अब और भी अधिक हाईटेक और सुविधाजनक होने वाली है। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने और किसानों की लागत को कम करने के उद्देश्य से एक विशेष ड्रोन योजना की शुरुआत की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तैयार की गई इस योजना का लक्ष्य जिले के बड़े हिस्से को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। पौधा संरक्षण संभाग द्वारा शुरू की गई इस पहल के तहत जिले के 9630 एकड़ क्षेत्र में फसलों पर कीटनाशी और तरल उर्वरकों का छिड़काव कृषि ड्रोन के माध्यम से कराया जाएगा।

योजना का बजट और मुख्य लक्ष्य

सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को सफल बनाने के लिए कुल 39.38 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है। यह योजना प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत चतुर्थ कृषि रोडमैप के तहत क्रियान्वित की जा रही है। पूरे बिहार राज्य के लिए इस कार्यक्रम हेतु 11.21 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें से बेगूसराय जिले के लिए 39.38 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य कम समय में अधिक क्षेत्रफल को कवर करना, दवा का एक समान छिड़काव सुनिश्चित करना और मजदूरी पर होने वाले अतिरिक्त खर्च को कम करके किसानों की आय में बढ़ोतरी करना है।

ड्रोन छिड़काव पर अनुदान का गणित

बेगूसराय जिला पौधा संरक्षण संभाग की सहायक निदेशक रीमा कुमारी ने जानकारी दी कि ड्रोन से एक एकड़ जमीन में छिड़काव की मानक लागत 419 रुपये तय की गई है। इस लागत पर सरकार द्वारा 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 209 रुपये प्रति एकड़ का अनुदान दिया जाएगा। कोई भी पात्र किसान एक फसल के दौरान अधिकतम दो बार इस ड्रोन सेवा का लाभ ले सकता है।

कीटनाशकों और उर्वरकों पर भी मिलेगी सब्सिडी

यह योजना केवल ड्रोन के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार किसानों को रसायनों की खरीद पर भी आर्थिक मदद देगी। इसमें रासायनिक कीटनाशी, फफूंदनाशी, खरपतवारनाशी, नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और एनपीके जैसे तरल उर्वरक शामिल हैं। इन रसायनों की खरीद पर भी 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा, जो कि अधिकतम 200 रुपये प्रति एकड़, प्रति रसायन और प्रति छिड़काव के हिसाब से प्रदान किया जाएगा। यह अनुदान राशि सीधे अधिकृत सेवा प्रदाता या कीटनाशक विक्रेता के खाते में भेजी जाएगी। अनुमान के अनुसार, ड्रोन छिड़काव के लिए करीब 20 लाख रुपये और उर्वरक व कीटनाशकों की खरीद के लिए लगभग 19.26 लाख रुपये की सब्सिडी किसानों के बीच बांटी जाएगी।

योजना का लाभ लेने की पात्रता

इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं:

  • किसान का कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर निबंधित होना अनिवार्य है।
  • एक किसान अधिकतम 15 एकड़ भूमि तक इस अनुदान का लाभ उठा सकता है।
  • प्रति फसल चक्र में केवल दो बार ही ड्रोन छिड़काव पर सब्सिडी मिलेगी।
  • योजना 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर संचालित होगी, इसलिए किसानों को जल्द पंजीकरण कराने का सुझाव दिया गया है।

ड्रोन तकनीक क्यों है फायदेमंद?

कृषि विभाग का मानना है कि पारंपरिक छिड़काव विधियों की तुलना में ड्रोन तकनीक बेहद कारगर है। इसके माध्यम से कम रसायनों का उपयोग करके फसलों के रोगों और कीटों पर बेहतर नियंत्रण पाया जा सकता है। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि रसायनों की बर्बादी भी रुकती है। मजदूरों की कमी के दौर में ड्रोन एक बेहतरीन विकल्प के रूप में उभरा है। इस आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से फसलों की उत्पादकता में सुधार की उम्मीद है, जिससे खेती पहले से अधिक लाभकारी बनेगी। जो किसान इस योजना के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं, वे अपने स्थानीय प्रखंड कृषि कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

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