न्याय की जीत: सात साल पुराने हत्याकांड में सजा
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में चर्चा का विषय बने विक्रम हत्याकांड में अदालत ने करीब सात साल बाद अपना फैसला सुनाया है। अपर सेशन न्यायालय, चिड़ावा ने इस मामले में बड़ा कदम उठाते हुए पांच दोषियों को उम्रभर के लिए कठोर कारावास की सजा दी है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस निर्णय के साथ ही पीड़ित परिवार के लिए सात वर्षों का लंबा संघर्ष खत्म हुआ और उन्हें न्याय मिला।
लव मैरिज बनी मौत की वजह
अपर लोक अभियोजक मनोज बजाज ने इस पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह सनसनीखेज वारदात प्रेम विवाह की रंजिश का परिणाम थी। मृतक विक्रम ने 15 मई 2018 को हमीरी गांव की रहने वाली अनिता देवी के साथ प्रेम विवाह किया था। अनिता का जीजा जोगेंद्र इस शादी से बेहद नाराज था और उसने विक्रम से बदला लेने की ठान ली थी। जोगेंद्र ने अपने परिवार के सदस्यों और जान-पहचान के लोगों के साथ मिलकर विक्रम को रास्ते से हटाने की पूरी साजिश रची। आरोपियों में जोगेंद्र के पिता इंद्राज, मां महेन्द्री देवी, पत्नी रचना देवी, भांजे जलेसिंह और रामसिंह शामिल थे, जो सभी हमीरी कलां के निवासी हैं।
कॉलेज ग्राउंड से उठाया और की हत्या
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 10 सितंबर 2019 की है। आरोपी योजना बनाकर चिड़ावा कॉलेज ग्राउंड पहुंचे, जहां से उन्होंने विक्रम का अपहरण कर लिया। अपहरण के बाद उसे सीधे अपने खेत पर ले गए। वहां आरोपियों ने बेरहमी के साथ विक्रम की पिटाई की, जिसके चलते गंभीर चोटें आने से उसकी मौत हो गई। इस बर्बर हत्या ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी। मृतक के पिता विद्याधर, जो कि आरएसी से सेवानिवृत्त जवान हैं, ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। पुलिस ने गंभीरता दिखाते हुए मामले की जांच की, साक्ष्य जुटाए और सभी गवाहों के बयान दर्ज करवाकर अदालत में मजबूत चार्जशीट पेश की।
अदालत का फैसला और परिवार की प्रतिक्रिया
लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान अभियोजन ने कई अहम गवाह और दस्तावेज कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए। सभी साक्ष्यों पर गौर करने के बाद अपर सेशन न्यायालय, चिड़ावा ने जोगेंद्र, महेन्द्री देवी, रचना देवी, जलेसिंह और रामसिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। मामले में आरोपी अंकित कस्वां, जो नंदरामपुरा का निवासी है, उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। वहीं, मुख्य आरोपी जोगेंद्र के पिता इंद्राज की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो चुकी थी, जिससे उनके खिलाफ मामला बंद कर दिया गया। फैसला आने के बाद कोर्ट परिसर में मृतक के बुजुर्ग पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े, जो लंबे समय से इंसाफ की राह देख रहे थे।
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