बागवानी में फल मक्खी का खतरा
वर्तमान में पपीता, आम, अमरूद और ड्रैगन फ्रूट जैसे फलों की खेती का सीजन चल रहा है। किसान अपनी फसलों से बेहतर उत्पादन की उम्मीद में काफी मेहनत करते हैं, लेकिन इसी दौरान एक छोटी सी फल मक्खी उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेरने का काम करती है। यह कीट न केवल फलों को अंदर से सड़ा देता है, बल्कि उनकी गुणवत्ता को भी पूरी तरह बिगाड़ देता है। बाजार में खराब गुणवत्ता वाले फलों की कीमत काफी कम मिलती है, जिससे किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है।
रसायनों के बजाय वैज्ञानिक समाधान
ज्यादातर किसान फल मक्खी से अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए कीटनाशकों का अंधाधुंध छिड़काव करते हैं। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि केवल रसायनों के भरोसे रहकर इस समस्या पर पूर्ण नियंत्रण पाना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक कीट प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की तत्काल आवश्यकता है। फेरोमोन ट्रैप इसी दिशा में एक बेहद प्रभावी और सस्ता विकल्प साबित हो रहा है।
क्या है फेरोमोन ट्रैप और यह कैसे काम करता है?
विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. धीरू तिवारी के अनुसार, फेरोमोन ट्रैप एक छोटे डिब्बेनुमा यंत्र की तरह होता है। यह एक वैज्ञानिक तकनीक पर आधारित है, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 200 रुपये है। यदि किसान इसे अपने बगीचे या खेत में सही ढंग से लगा दें, तो यह हानिकारक कीटों को अपनी ओर खींचने और उन्हें पकड़ने में अद्भुत कार्य करता है।
इस उपकरण की कार्यप्रणाली के पीछे का विज्ञान काफी सरल है। इस ट्रैप के अंदर एक विशेष प्रकार का ल्योर (Lure) रखा जाता है। इस ल्योर में मादा कीट की गंध जैसी एक गंध होती है, जिससे नर कीट आकर्षित होकर ट्रैप की तरफ खिंचे चले आते हैं। जैसे ही नर कीट इस डिब्बे के अंदर प्रवेश करते हैं, वे इसमें फंस जाते हैं और बाहर निकलने में नाकाम रहते हैं।
प्रजनन चक्र पर रोक
इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह कीटों के जीवन चक्र को ही बाधित कर देता है। जब नर कीट ट्रैप में फंसकर समाप्त हो जाते हैं, तो प्रजनन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती। परिणामस्वरूप, खेत में कीटों की संख्या में तेजी से गिरावट आती है। इस तरह किसान बिना किसी महंगे और जहरीले रसायन का उपयोग किए अपनी सब्जियों और फलों को सुरक्षित रख सकते हैं।
लागत और उपयोग का तरीका
डॉ. धीरू तिवारी ने स्पष्ट किया है कि एक फेरोमोन ट्रैप की लागत मात्र 200 रुपये के आसपास होती है, और इसमें लगा ल्योर कई महीनों तक अपनी प्रभावशीलता बनाए रखता है। एक बार जब ल्योर की क्षमता खत्म हो जाए, तो बाजार से नया ल्योर लाकर इसे पुनः सक्रिय किया जा सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि हर फसल की प्रकृति अलग होती है, इसलिए अमरूद, आम या अन्य फलों के लिए बाजार से उसी के अनुसार सही ल्योर का चयन करना अनिवार्य है।
कितनी मात्रा में करें इस्तेमाल?
विशेषज्ञों के सुझाव के अनुसार, एक एकड़ के बगीचे को सुरक्षित रखने के लिए 8 से 10 फेरोमोन ट्रैप लगाना पर्याप्त होता है। एक बार इन्हें खेत में स्थापित करने के बाद, किसानों को कीटनाशक दवाओं के बार-बार छिड़काव की जरूरत से बड़ी राहत मिल जाती है। समय-समय पर जब ट्रैप कीटों से भर जाए, तो इसे सावधानीपूर्वक खाली करके उसी स्थान पर वापस लटका देना चाहिए। इस आसान और किफायती उपाय से किसान लंबे समय तक अपनी फसल को स्वस्थ और सुरक्षित बनाए रख सकते हैं।
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