बिहार की सियासत में गर्माया भाषा का मुद्दा
बिहार के राजनीतिक गलियारों से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। किशनगंज से कांग्रेस के सांसद मोहम्मद जावेद ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। अपने एक हालिया बयान में उन्होंने दावा किया कि हिंदी और उर्दू तो भारत की अपनी भाषाएं हैं, लेकिन संस्कृत मूल रूप से बाहर से आई हुई भाषा है। उनके इस दावे ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है और इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं।
नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू की पढ़ाई का मामला
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि बिहार के नवनिर्मित डिग्री कॉलेजों से जुड़ी है। दरअसल, राज्य सरकार द्वारा हाल ही में शुरू किए गए कई डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय की पढ़ाई की व्यवस्था न होने को लेकर विवाद चल रहा है। मोहम्मद जावेद ने इसी मुद्दे पर बिहार सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर उर्दू भाषी छात्रों की अनदेखी की है, जो कि शिक्षा के अधिकार और भाषाई विविधता के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है।
सरकार के फैसले पर सवाल
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि बिहार में उर्दू भाषा बोलने और सीखने वाले छात्रों की एक बहुत बड़ी संख्या मौजूद है। इसके बावजूद, नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू विभाग न खोलना उन छात्रों के साथ सरासर अन्याय है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस पूरे फैसले पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए और हर नए डिग्री कॉलेज में उर्दू की पढ़ाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका तर्क है कि छात्रों को अपनी पसंद की भाषा में उच्च शिक्षा हासिल करने का पूरा अधिकार है और सरकार को इस संवैधानिक अधिकार का सम्मान करना चाहिए।
संस्कृत पर टिप्पणी से बढ़ा बवाल
अपने संबोधन के दौरान मोहम्मद जावेद ने यह भी कहा कि हिंदी और उर्दू इस देश की अपनी भाषाएं हैं, जबकि संस्कृत एक ऐसी भाषा है जो बाहर से आई है। संस्कृत को लेकर उनकी इस टिप्पणी ने विवाद को और गहरा कर दिया है। यह बयान अब न केवल राजनीतिक मंचों पर बहस का केंद्र बना हुआ है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है। इंटरनेट पर उनके इस बयान को लेकर लोगों के बीच अलग-अलग विचार देखने को मिल रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और अन्य राजनीतिक दल इस संवेदनशील भाषाई मामले पर आगे क्या रुख अपनाते हैं, क्योंकि बिहार के शैक्षणिक ढांचे में उर्दू की स्थिति पहले से ही कई बार चर्चा का विषय रही है।
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