राष्ट्रीय जनता दल से इस्तीफा देने के बाद मृत्युंजय तिवारी ने तेजस्वी यादव को लेकर कही बड़ी बात

आरजेडी के कद्दावर नेता और प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में अब समर्पित कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं बचा है।

पार्टी से इस्तीफा और बढ़ती नाराजगी

बिहार की राजनीति में उस समय बड़ा हलचल मच गया जब राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी के वरिष्ठ नेता और लंबे समय तक पार्टी की आवाज रहे मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी छोड़ने का औपचारिक ऐलान कर दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को सौंप दिया है। इस इस्तीफे के साथ ही उन्होंने प्रवक्ता पद और अन्य सभी जिम्मेदारियों से खुद को अलग कर लिया है। मृत्युंजय तिवारी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी कार्यालय में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अपना इस्तीफा सौंपा है। उनके इस्तीफे ने पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और उपेक्षा की राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सम्मान की कमी बनी इस्तीफे की वजह

न्यूज18 के साथ बातचीत करते हुए मृत्युंजय तिवारी ने अपने दर्द को साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने आरजेडी के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ काम किया था, लेकिन पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर माहौल पूरी तरह बदल चुका है। उन्होंने कहा कि पार्टी में अब उनके जैसे पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं के लिए कोई सम्मान शेष नहीं रह गया है। तिवारी ने दुख जताते हुए कहा कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया, वहां अब ऐसी परिस्थितियों में काम करना उनके लिए असंभव हो गया था। यह केवल एक व्यक्ति का इस्तीफा नहीं है, बल्कि उस असंतोष का प्रतिबिंब है जो लंबे समय से पार्टी के पुराने नेताओं के मन में पल रहा था।

तेजस्वी यादव की मजबूरी का इशारा

इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या तेजस्वी यादव को इसकी जानकारी थी। इस पर मृत्युंजय तिवारी ने एक बड़ा रहस्योद्घाटन किया। उन्होंने दावा किया कि वे तेजस्वी यादव को लेकर सब कुछ जानते थे। तिवारी के शब्दों में, तेजस्वी यादव सब कुछ जानते थे, लेकिन वह अपनी मजबूरियों के चलते कुछ नहीं कर पा रहे थे। हालांकि, उन्होंने किसी का नाम लेने से साफ इनकार कर दिया, लेकिन यह संकेत जरूर दिया कि पार्टी में ऐसे लोगों का प्रभाव काफी बढ़ गया है जिनके आगे बड़े-बड़े नेता भी बेबस नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि समय आने पर वे सारी बातें स्पष्ट करेंगे कि किन कारणों से वे इस स्थिति तक पहुंचे।

क्या तेजस्वी ने किया संपर्क

मृत्युंजय तिवारी ने बताया कि उन्होंने अपनी नाराजगी और पीड़ा से कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को अवगत कराया था। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव उनकी बातों को समझते हैं, लेकिन उनकी क्या विवशता है, यह वही जानते हैं। इस्तीफे के बाद तेजस्वी यादव से किसी भी प्रकार की बातचीत के सवाल पर उन्होंने बताया कि अभी तक तेजस्वी यादव की ओर से कोई फोन या संदेश नहीं आया है। उन्होंने याद दिलाया कि तेजस्वी यादव के बेटे के जन्मदिन के अवसर पर करीब एक महीना पहले उनकी आखिरी मुलाकात हुई थी। इसके बाद से कोई संवाद नहीं हुआ है।

लालू और राबड़ी के साथ का पुराना नाता

अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए तिवारी भावुक दिखे। उन्होंने बताया कि वे दशकों से लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के काफी करीब रहे हैं। एक समय ऐसा भी आया था जब उन्हें पार्टी से हटाया गया था, लेकिन लालू और राबड़ी ने खुद उन्हें वापस बुलाकर जिम्मेदारियां दी थीं। लेकिन इस बार की स्थिति उन पुरानी घटनाओं से पूरी तरह अलग है। उन्होंने कहा कि जो स्थितियां अब पैदा हो गई हैं, उनके बीच पार्टी में बने रहना अब संभव नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी के अनुशासन के भीतर रहकर ही काम किया है और कभी भी पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं हुए।

भविष्य की राजनीति और जनसेवा

अपने अगले कदम को लेकर मृत्युंजय तिवारी ने फिलहाल पत्ते नहीं खोले हैं। उन्होंने कहा कि अभी उनका पूरा ध्यान केवल इस्तीफे की प्रक्रिया पर केंद्रित है। किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने की संभावनाओं पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की और कहा कि भविष्य की राजनीति का फैसला सही समय आने पर लिया जाएगा। उन्होंने अंत में कहा कि वे एक जनसेवक हैं और अपनी आखिरी सांस तक जनता की सेवा में तत्पर रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरजेडी में रहते हुए उन्होंने कभी किसी तरह का निजी लाभ नहीं उठाया, बल्कि पार्टी के सबसे कठिन दौर में भी वे एक ढाल की तरह संगठन के साथ मजबूती से खड़े रहे।

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