उद्घाटन कार्यक्रम में दिखी बदहाली
बिहार सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में एक साथ 211 डिग्री कॉलेज खोलने की घोषणा ने भले ही सुर्खियां बटोरी हों, लेकिन मोतिहारी के पिपरा कोठी स्थित नए डिग्री कॉलेज में हुए उद्घाटन समारोह ने शिक्षा विभाग की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। इस कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व मंत्री प्रमोद कुमार ने व्यवस्थाओं पर गंभीर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे महज खानापूर्ति करार दिया है।
डीईओ के नदारद रहने पर उठे सवाल
समारोह के दौरान की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार्यक्रम में मौजूद जिम्मेदार अधिकारी तक गायब थे। पूर्व मंत्री ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) बिना किसी सूचना के कार्यक्रम छोड़कर फरार हो गए हैं। प्रमोद कुमार का कहना है कि शिक्षा विभाग जमीनी हकीकत से दूर सिर्फ कागजों और सोशल मीडिया पर अपनी उपलब्धियों का प्रचार करने में जुटा है।
तकनीकी व्यवस्था का भद्दा मजाक
उद्घाटन के दौरान दिखाई गई तकनीकी व्यवस्था पर भी बड़े सवाल उठे हैं। पूर्व मंत्री ने बताया कि कार्यक्रम के लिए रात 9:00 बजे सूचना दी गई थी, लेकिन वहां लगाई गई टेलीविजन स्क्रीन पूरी तरह से बेकार थी। उस टीवी में न तो इंटरनेट की सुविधा थी और न ही वेबकास्टिंग की कोई व्यवस्था की गई थी। पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग केवल औपचारिकता पूरी कर रहा है, जिससे सरकारी कामकाज की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग रहे हैं। सत्ताधारी दल के ही नेताओं द्वारा विभाग की पोल खोलने से यह स्पष्ट हो गया है कि शिक्षा विभाग जमीनी स्तर पर सही तरीके से काम नहीं कर रहा है और केवल दिखावे के दावे कर रहा है।
सांसद ने बताया बड़ी उपलब्धि
हालांकि, इन शिकायतों के बीच पिपरा के इस नए डिग्री कॉलेज के उद्घाटन का फीता सुपौल के सांसद दिलेश्वर कामेत द्वारा काटा गया। उन्होंने इस मौके पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। सांसद के अनुसार, इन कॉलेजों के खुलने से अब स्थानीय छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा और न ही उनके अभिभावकों को आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ेगा। सभी 211 डिग्री कॉलेजों का उद्घाटन राज्य के अलग-अलग हिस्सों में एक ही समय पर किए जाने का निर्देश दिया गया था।
स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया
एक ओर जहां उद्घाटन के दौरान मची अफरातफरी और अव्यवस्था ने सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों में नए डिग्री कॉलेज को लेकर उत्साह भी है। लोगों का मानना है कि कॉलेज के संचालन से उनके बच्चों की पढ़ाई सुलभ हो जाएगी और उन्हें अब दूर-दराज के इलाकों में जाकर पढ़ाई नहीं करनी पड़ेगी। हालांकि, व्यवस्था में सुधार को लेकर स्थानीय लोग भी अब शिक्षा विभाग से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
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