राजस्थान: सांसद बृजेंद्र ओला के पैतृक गांव में पानी के लिए हाहाकार, महिलाओं ने सड़क पर मटके फोड़कर जताया विरोध

झुंझुनूं के अरडावता गांव में बीते 15 दिनों से पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों ने उग्र प्रदर्शन किया। महिलाओं ने सड़क पर मटके फोड़कर अपना गुस्सा जाहिर किया, जिससे चार घंटे तक आवागमन ठप रहा।

राजस्थान के झुंझुनूं जिले में सांसद बृजेंद्र ओला का पैतृक गांव अरडावता इन दिनों भारी पेयजल संकट से जूझ रहा है। यहां स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि गुरुवार को ग्रामीणों का सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया। गांव में पिछले 15 दिनों से पीने के पानी की भारी किल्लत बनी हुई है, जिसके चलते लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।

गुरुवार सुबह करीब 9 बजे बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं सड़कों पर जमा हो गए। उन्होंने चिड़ावा-सुलताना-जयपुर मार्ग को कम से कम तीन से चार स्थानों पर पूरी तरह से जाम कर दिया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने बीच सड़क पर अपने मटके फोड़कर प्रशासन और जलदाय विभाग के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया। इस दौरान सरकारी अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई।

लंबे जाम से परीक्षार्थी हुए परेशान

सड़क पर ग्रामीणों द्वारा किए गए चक्का जाम के कारण करीब चार घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। सड़कों के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी उन अभ्यर्थियों को हुई जो आरपीएससी सेकेंड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा देकर अपने घरों को लौट रहे थे। कई अभ्यर्थी घंटों तक जाम में फंसे रहे। कुछ लोगों ने जाम खुलवाने के लिए पत्थरों को हटाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे मौके पर तनावपूर्ण माहौल बन गया था।

15 दिनों से पानी की किल्लत

ग्रामीणों का कहना है कि उनके इलाके में पिछले 15 दिनों से जल आपूर्ति की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कई मोहल्लों के नलों में पानी की एक बूंद भी नहीं आ रही है। मजबूरी में ग्रामीणों को मीलों दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इसकी शिकायत कई बार जलदाय विभाग के अधिकारियों से की, लेकिन विभाग की ओर से कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी अनदेखी के चलते नाराज ग्रामीणों ने सड़क जाम करने का कड़ा फैसला लिया।

अधिकारी को घेरा और जताया रोष

प्रदर्शन की सूचना मिलने पर प्रशासन और जलदाय विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। जब चिड़ावा जलदाय विभाग की एईएन सविता चौधरी ग्रामीणों के बीच पहुंचीं, तो महिलाओं ने उन्हें घेर लिया। आक्रोशित महिलाओं ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारी केवल कोरे आश्वासन देते हैं, लेकिन धरातल पर पानी की समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला जा रहा है।

सांसद के गांव की बदहाली पर सवाल

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सांसद बृजेंद्र ओला पर भी निशाना साधा। ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह सांसद का अपना पैतृक गांव है, जहां की हालत इतनी दयनीय है। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी सांसद के गांव का यह हाल है, तो क्षेत्र के अन्य गांवों की स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

तहसीलदार की पहल पर खुला जाम

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिड़ावा के नवनियुक्त तहसीलदार नारायण राम दैया मौके पर पहुंचे। साथ ही चिड़ावा थाने से एसआई कैलाशचंद्र ने भी पुलिस बल के साथ पहुंचकर मोर्चा संभाला। तहसीलदार ने ग्रामीणों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। एईएन सविता चौधरी ने आश्वासन दिया कि शुक्रवार तक पेयजल समस्या का उचित समाधान कर दिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना आंदोलन समाप्त किया। इसके बाद एक सराहनीय दृश्य देखने को मिला, जब खुद तहसीलदार नारायण राम दैया ने सड़क पर पड़े बड़े पत्थरों को हटाना शुरू किया। उन्हें देख गांव के युवा भी मदद के लिए आगे आए और जल्द ही यातायात बहाल हो गया।

https://www.indiatv.in/rajasthan/jhunjhunu-congress-mp-brijendra-ola-village-15-days-water-crisis-women-blocked-road-and-broken-pots-2026-07-16-1231610