पूर्णिया में सामने आया बीमा का अजीब खेल
बिहार के पूर्णिया जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है, जिसने बीमा क्षेत्र के नियमों और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चारा घोटाले के दौरान प्रचलित रही 'स्कूटर पर भैंस' की कहानी की तरह ही अब एक प्राइवेट यात्री बस को मोटरसाइकिल के बीमा पर चलाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस कथित बड़े बीमा फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब बस के एक सड़क दुर्घटना का शिकार होने के बाद मुआवजे के दावों की पड़ताल की गई। बीमा कंपनी द्वारा की गई शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि जिस पॉलिसी को बस का सुरक्षा कवर बताया जा रहा था, वह दरअसल एक बजाज डिस्कवर मोटरसाइकिल के नाम पर जारी की गई थी। इस मामले ने न केवल प्रशासन बल्कि बीमा जगत को भी स्तब्ध कर दिया है।
दुर्घटना के बाद खुली पोल
यह पूरा मामला 30 जनवरी 2025 को हुए एक भीषण सड़क हादसे से जुड़ा है। कृष्णारथ नाम की एक बस पटना से सिलीगुड़ी की ओर जा रही थी, इसी दौरान पूर्णिया जिले के बायसी थाना क्षेत्र में यह वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में संजय कुमार सरदा नामक एक यात्री की मौत हो गई, जबकि 9 अन्य यात्री घायल हो गए थे। हादसे के उपरांत पीड़ित परिवारों और घायलों ने मुआवजे के लिए उत्तर दिनाजपुर MACT न्यायालय में 10 अलग-अलग दावे दायर किए। इन याचिकाओं में दावा किया गया था कि संबंधित बस का बीमा बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी के पास है, लेकिन जैसे ही कंपनी ने अपने रिकॉर्ड खंगाले, सच्चाई सामने आ गई।
जांच में हुआ खुलासा
मुआवजा दावों की पुष्टि करने के लिए जब बीमा कंपनी ने पॉलिसी दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की, तो एक बड़ा खेल पकड़ में आया। कंपनी के अधिकारियों ने पाया कि जिस पॉलिसी नंबर को बस का बीमा बताया जा रहा था, वह हकीकत में संजीब रुईदास के नाम पर पंजीकृत एक बजाज डिस्कवर मोटरसाइकिल के लिए जारी की गई थी। कंपनी के डेटाबेस से मिलान करने पर यह स्पष्ट हो गया कि बस संख्या BR-31-PA-1567 के लिए कोई वैध बीमा पॉलिसी कभी जारी ही नहीं की गई थी। इस वाहन की मालकिन सुचिता चौधरी बताई गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक वाहनों के ऊंचे प्रीमियम से बचने के लिए, जानबूझकर दोपहिया वाहन की सस्ती पॉलिसी का उपयोग करके फर्जीवाड़ा किया गया।
कानूनी कार्रवाई और पुलिस जांच
इस पूरे मामले को बीमा कंपनी ने करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की एक बड़ी साजिश के रूप में देखा है। सेगमेंट मिसमैच और कम प्रीमियम चुकाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के पुख्ता सबूत मिलने के बाद, कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि ने इस बाबत सख्त कदम उठाए। बस मालकिन सुचिता चौधरी और मोटरसाइकिल मालिक संजीब रुईदास के खिलाफ बायसी थाना में आधिकारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी है।
पुलिस का क्या कहना है?
बायसी थाना प्रभारी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्हें बीमा कंपनी की ओर से एक आवेदन प्राप्त हुआ है, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस फिलहाल तमाम दस्तावेजों, बीमा रिकॉर्ड्स और इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका की गहनता से जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इसमें शामिल अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल, अधिकारियों का पूरा ध्यान इस बात पर है कि आखिर बिना वैध बीमा के इतने लंबे समय से यह बस यात्रियों की जान जोखिम में डालकर सड़कों पर कैसे दौड़ रही थी। इस घटना ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी कई सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
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