हिमाचल प्रदेश के 8 जिलों में जल्द लगेंगी 1.5 टेस्ला की MRI मशीनें, मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने दिए निर्देश

हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को अत्याधुनिक बनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के 8 जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक चिकित्सा उपकरण लगाने के निर्देश दिए हैं ताकि आम जनता को बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके।

स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का खाका तैयार

हिमाचल प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने राज्य के विभिन्न जिला अस्पतालों और सात सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के निवासियों को उनके घर के नजदीक ही विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें और उन्हें इलाज के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े। इस संबंध में आज शिमला में स्वास्थ्य विभाग की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई जिसमें इन सुधारों पर विस्तार से चर्चा की गई।

8 अस्पतालों में मिलेंगी 1.5 टेस्ला MRI मशीनें

बैठक में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश के चुनिंदा स्वास्थ्य संस्थानों में अत्याधुनिक 1.5 टेस्ला एमआरआई मशीनें स्थापित की जाएंगी। इन स्थानों में क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर, कुल्लू, ऊना और सोलन शामिल हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल किन्नौर, डॉ. वाई.एस. परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल नाहन, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला और पालमपुर में भी ये मशीनें लगाई जाएंगी। वहीं, प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में इससे भी अधिक एडवांस 3 टेस्ला एमआरआई मशीनें लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जो जांच की गुणवत्ता और विशेषज्ञ उपचार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।

डिजिटल मैमोग्राफी और एक्स-रे मशीनों की सौगात

नैदानिक सेवाओं को मजबूती देने के लिए सरकार ने डिजिटल मैमोग्राफी मशीनों की खरीद का भी निर्णय लिया है। ये मशीनें विशेष रूप से जिला अस्पताल नाहन, हमीरपुर, क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर, सोलन और धर्मशाला में स्थापित की जाएंगी। दुर्गम इलाकों में रहने वाले मरीजों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री ने 42 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों की खरीद की जानकारी दी है। इनमें से 14 मशीनें विभाग को प्राप्त भी हो चुकी हैं। इन मशीनों का उपयोग मुख्य रूप से छाती की जांच और तपेदिक यानी टीबी की समय पर पहचान करने में किया जाएगा, ताकि मरीजों को शुरुआती चरण में ही उचित उपचार मिल सके।

हाइ-एंड सीटी स्कैन और अन्य आधुनिक सुविधाएं

अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की सूची में 256-स्लाइस वाली हाई-एंड सीटी स्कैन मशीनें भी शामिल हैं। इन्हें अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटी चमियाना, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला, डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा, डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर और श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय नेरचौक में स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य भर के विभिन्न अस्पतालों में डिजिटल एक्स-रे और 4डी अल्ट्रासाउंड मशीनें भी उपलब्ध करवाई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इन सभी उपकरणों की खरीद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के मानकों के अनुरूप ही होनी चाहिए।

भर्ती प्रक्रिया और रेडियोलॉजी विभागों पर जोर

बैठक में मुख्यमंत्री ने रेडियोलॉजी विभागों को और सशक्त बनाने पर जोर दिया। साथ ही स्वास्थ्य विभाग में खाली पड़े पदों पर भर्ती की प्रगति की समीक्षा भी की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और तकनीशियनों की भर्ती में तेजी लाई जा रही है और जल्द ही सातों चिकित्सा महाविद्यालयों में पर्याप्त पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा गुणवत्तापूर्ण दवाइयों की खरीद प्रक्रिया को भी शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया गया है। बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान, मुख्य सचिव के.के. पंत, प्रधान सचिव एम. सुधा देवी, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, एनएचएम के मिशन निदेशक प्रदीप ठाकुर और स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक डॉ. गोपाल बेरी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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