क्या धामन सांप सच में गाय का दूध पीते हैं? सर्प विशेषज्ञ ने खोली इस डरावनी अफवाह की पोल

मानसून के दौरान अक्सर यह चर्चा होती है कि धामन सांप गायों के पास जाकर उनका दूध पी लेते हैं। पलामू के सर्प विशेषज्ञ ने इस धारणा को पूरी तरह से गलत बताते हुए इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण स्पष्ट किया है।

मानसून और सांपों से जुड़ी भ्रांतियां

जैसे ही मानसून का आगमन होता है, खेत, खलिहान और घरों के आसपास सांपों की हलचल अचानक बढ़ जाती है। इस मौसम में लोगों के मन में सांपों को लेकर न केवल डर पैदा होता है, बल्कि कई तरह की दंतकथाएं और भ्रांतियां भी जन्म लेती हैं। इन्हीं में से सबसे प्रचलित धारणा यह है कि 'धामन' सांप गाय के पैरों में लिपटकर उसका दूध पी लेता है। लोग अक्सर इसे सच मानकर सांपों को नुकसान पहुंचाने लगते हैं। लेकिन क्या इस बात में रत्ती भर भी सच्चाई है? आज हम इस विषय से जुड़े सभी वैज्ञानिक तथ्यों और विशेषज्ञों की राय के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

सांपों के बारे में क्या कहते हैं विशेषज्ञ

पलामू जिले के प्रख्यात सर्प विशेषज्ञ डॉ. डीएस श्रीवास्तव के अनुसार, सांपों का दूध पीना केवल एक कोरी कल्पना है, जिसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह एक पूरी तरह से मिथक है। विज्ञान के नजरिए से देखें तो सांपों के शरीर में ऐसे एंजाइम विकसित ही नहीं होते जो दूध को पचा सकें। सांप एक मांसाहारी जीव है, न कि स्तनधारी।

वैज्ञानिक कारण: धामन क्यों नहीं पी सकता दूध

डॉ. श्रीवास्तव ने धामन, जिसे अंग्रेजी में रैट स्नेक भी कहा जाता है, की शारीरिक बनावट के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि सांप के न तो गाल होते हैं और न ही चूसने वाली मांसपेशियां, जो स्तनपान के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा, सांप की जीभ दो हिस्सों में बंटी होती है, जो उसे दूध पीने जैसी प्रक्रिया के लिए सक्षम ही नहीं बनाती। गाय के थन को पकड़कर दूध चूसना किसी भी सांप के लिए शारीरिक रूप से असंभव है। अतः यह धारणा कि धामन गाय का दूध पीता है, वैज्ञानिक तथ्यों के पूरी तरह से विपरीत है।

गोशालाओं में क्यों दिखते हैं धामन

अक्सर किसानों का सवाल होता है कि अगर सांप दूध नहीं पीते, तो वे गाय या बैल के बाड़े में क्या करने आते हैं? इस प्रश्न का जवाब देते हुए विशेषज्ञ ने बताया कि इसके पीछे का असली कारण दूध नहीं, बल्कि 'चूहे' हैं। पशुओं के चारे और अनाज के आसपास चूहों का जमावड़ा होना स्वाभाविक है। धामन सांप चूहों का शिकारी होता है। इसलिए वह बाड़े में किसी को नुकसान पहुंचाने नहीं, बल्कि अपने भोजन यानी चूहों की तलाश में आता है। किसान इसे दुश्मन समझ लेते हैं, जबकि असल में वह उनके अनाज की रक्षा करने में मदद कर रहा होता है।

किसानों के सच्चे मित्र हैं धामन

धामन सांप को बिना किसी हिचकिचाहट के किसानों का मित्र माना जाता है। डॉ. श्रीवास्तव ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि एक धामन सांप अपने पूरे जीवनकाल में लगभग 25 हजार चूहों का शिकार करके उन्हें खत्म कर देता है। कल्पना कीजिए कि अगर एक सांप को मार दिया जाए, तो उसके द्वारा खाए जाने वाले हजारों चूहे जीवित रह जाएंगे, जो अंततः किसानों की फसलों को बर्बाद कर देंगे। इस तरह, धामन का संरक्षण करना न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि यह किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। यह सांप विषहीन होता है, इसलिए लोगों को इनसे डरने की जगह इनका सम्मान करना चाहिए और इन्हें बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित स्थान पर छोड़ देना चाहिए।

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