हरियाणा में पीएम मोदी के आगमन से पहले बवाल, कुरुक्षेत्र में उपद्रवियों ने तोड़ीं 9 LED स्क्रीन, लाखों का नुकसान

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से ठीक पहले असामाजिक तत्वों ने जमकर उत्पात मचाया है। बाइक सवार बदमाशों ने प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए लगी 9 LED स्क्रीन पर पथराव कर उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे लाखों का नुकसान हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हरियाणा और पंजाब दौरे से ठीक पहले कुरुक्षेत्र में एक बड़ी वारदात सामने आई है। प्रधानमंत्री के स्वागत और सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगाई गई आधुनिक LED स्क्रीनों को असामाजिक तत्वों ने अपना निशाना बनाया है। कुरुक्षेत्र में कुल 9 LED स्क्रीन तोड़ दी गई हैं, जिससे इस पूरी परियोजना को भारी नुकसान पहुंचा है।

शुरुआती आकलन के अनुसार, इस तोड़फोड़ के कारण करीब 12 लाख रुपये से अधिक की क्षति हुई है। इस वारदात को मोटरसाइकिल पर सवार कुछ नकाबपोश युवकों ने रात के अंधेरे में अंजाम दिया, जिसके बाद पूरे इलाके में पुलिस मुस्तैद हो गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को हरियाणा और पंजाब के दौरे पर रहने वाले हैं। इस ऐतिहासिक दौरे के दौरान पीएम मोदी जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इसके अलावा, कुरुक्षेत्र में नवनिर्मित एलिवेटेड रेलवे ट्रैक का उद्घाटन भी प्रधानमंत्री के हाथों होना है। इसी भव्य स्वागत की तैयारियों के मद्देनजर कुरुक्षेत्र शहर को विशेष तौर पर सजाया गया था और जगह-जगह ये स्क्रीन लगाई गई थीं।

आधी रात को बाइक सवार नकाबपोश बदमाशों का हमला

इस पूरे प्रोजेक्ट की देखरेख करने वाले भाजपा युवा मोर्चा थानेसर के मंडल प्रधान विश्वकांत शर्मा ने बताया कि यह घटना रात के लगभग 2 बजे से 3 बजे के बीच की है। रात के सन्नाटे में तीन अज्ञात युवक एक ही मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए। इन तीनों बदमाशों ने अपने चेहरों को काले रंग के कपड़ों से पूरी तरह ढक रखा था ताकि उनकी पहचान छिपी रहे।

इन बदमाशों ने बेहद सुनियोजित तरीके से शहर की LED स्क्रीनों को निशाना बनाना शुरू किया। उन्होंने सबसे पहले सिविल अस्पताल के ठीक सामने स्थापित की गई स्क्रीन पर भारी पत्थरों और ईंटों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इसके बाद वे एक के बाद एक अन्य स्थानों की ओर बढ़े और वहां लगी स्क्रीनों को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। शुरुआत में ऐसा लगा कि केवल एक ही स्थान पर तोड़फोड़ हुई है, लेकिन जब सुबह पूरे शहर में लगी स्क्रीनों की गहन जांच की गई, तो पता चला कि कुल 9 अलग-अलग जगहों पर लगी स्क्रीन पूरी तरह नष्ट कर दी गई हैं।

लाखों रुपये का नुकसान, सिस्टम हुआ पूरी तरह ठप

सुबह के समय तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी क्षतिग्रस्त स्क्रीनों की बारीकी से जांच की। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि इन हमलों के कारण कुल 96 LED मॉड्यूल और उनका मुख्य पावर सप्लाई सिस्टम पूरी तरह से नष्ट हो चुका है।

विश्वकांत शर्मा ने बताया कि केवल इन नष्ट हुए मॉड्यूल और पावर सप्लाई सिस्टम को बदलने का खर्च ही लगभग 9 लाख रुपये के आसपास आने का अनुमान है। यदि इसमें लेबर और अन्य सहायक खर्चों को भी जोड़ दिया जाए, तो यह कुल नुकसान करीब 12 लाख से 13 लाख रुपये के बीच पहुंच जाता है। इनमें से 3 LED स्क्रीन तो इस कदर क्षतिग्रस्त हुई हैं कि पत्थरों की चोट के कारण उनके आंतरिक तारों में शॉर्ट सर्किट हो गया है, जिससे वे अब मरम्मत के लायक भी नहीं बची हैं।

सरकारी योजनाओं के प्रचार को रोकने की सोची-समझी साजिश

इस हमले के पीछे की मंशा पर बात करते हुए विश्वकांत शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह कोई व्यक्तिगत रंजिश या आपसी दुश्मनी का मामला नहीं दिखाई देता। बल्कि, यह सीधे तौर पर प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को प्रभावित करने और सरकार की विकास योजनाओं के प्रचार को रोकने की एक बड़ी और सोची-समझी साजिश है।

उन्होंने तर्क दिया कि शहर भर में सैकड़ों की संख्या में सामान्य फ्लेक्स बोर्ड भी लगे हुए हैं, जिन्हें नुकसान पहुंचाना बेहद आसान था, लेकिन हमलावरों ने उन्हें छुआ तक नहीं। हमलावरों का मुख्य उद्देश्य एलिवेटेड रेलवे ट्रैक और हाइड्रोजन ट्रेन जैसी क्रांतिकारी परियोजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुंचने से रोकना था। बुधवार रात करीब 8 बजे ही इन LED स्क्रीनों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जींद कार्यक्रम के स्वागत में विशेष विज्ञापन प्रसारित किए जाने शुरू हुए थे। इस विज्ञापन में कुरुक्षेत्र के सांसद नवीन जिंदल और पूर्व मंत्री सुभाष सुधा की ओर से बधाई व शुभकामना संदेश दिए जा रहे थे। इनमें 'मोदी जी का सपना, एलिवेटेड ट्रैक हुआ अपना' और देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश दिखाए जा रहे थे।

शर्मा ने आगे कहा कि जिस बर्बरता से पत्थरों और सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले भारी कंक्रीट के ब्लॉकों का इस्तेमाल इन स्क्रीनों को तोड़ने के लिए किया गया, उससे स्पष्ट है कि हमलावरों का इरादा स्क्रीन को पूरी तरह से मटियामेट करना था। यदि उस समय कोई भी तकनीकी कर्मचारी वहां काम से मौजूद होता, तो इस भारी पथराव में उसकी जान भी जा सकती थी।

इन 9 प्रमुख स्थानों पर की गई तोड़फोड़

हमलावरों ने शहर के व्यस्त और महत्वपूर्ण रास्तों को चुनकर इस वारदात को अंजाम दिया। जिन 9 स्थानों पर लगी LED स्क्रीनों को निशाना बनाया गया है, वे इस प्रकार हैं:

  • सिविल अस्पताल के सामने: जहां पहला और सबसे भयानक हमला बोला गया।
  • थीम पार्क: कुरुक्षेत्र का एक प्रमुख सार्वजनिक स्थल।
  • मोहन नगर: व्यावसायिक रूप से व्यस्त क्षेत्र।
  • सेक्टर-5: कुरुक्षेत्र का एक मुख्य रिहायशी इलाका।
  • सेक्टर-7: एक अन्य महत्वपूर्ण रिहायशी सेक्टर।
  • पुलिस लाइन: सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील इलाका।
  • पिपली चौक: कुरुक्षेत्र में प्रवेश करने का मुख्य चौराहा।
  • कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी गेट नंबर 2: विश्वविद्यालय के छात्रों की आवाजाही का प्रमुख केंद्र।
  • कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी गेट नंबर 3: विश्वविद्यालय परिसर का एक और व्यस्त प्रवेश द्वार।

ढाई करोड़ रुपये की लागत वाला था यह BOT प्रोजेक्ट

इस पूरे प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी देते हुए विश्वकांत शर्मा ने बताया कि यह एक अत्यंत महत्वाकांक्षी BOT (बिल्ट, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) मॉडल पर आधारित प्रोजेक्ट है। इस पूरे प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने और स्थापित करने में करीब ढाई करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई थी। संबंधित कंपनी ने सरकार के साथ 10 साल की लंबी अवधि के लिए एक विशेष अनुबंध किया हुआ है, जो वर्ष 2030 तक प्रभावी रहेगा।

शर्मा ने बताया कि पिछले करीब 6 साल से इन सभी LED स्क्रीनों का संचालन बेहद शांतिपूर्ण और सुचारू ढंग से चल रहा था और इससे पहले कभी कोई ऐसी अप्रिय घटना नहीं हुई। विश्वकांत शर्मा ने कुरुक्षेत्र प्रशासन और पुलिस विभाग से पुरजोर मांग की है कि इस पूरे मामले की अत्यंत निष्पक्षता से जांच की जाए। उन्होंने मांग की है कि शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जाएं, आरोपियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

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